• [WRITTEN BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 11 September, 2019 07:15 AM | Total Read Count 133
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सरकार स्थायी समितियां बना रही है

नई लोकसभा और केंद्र में नई सरकार बने एक तीन महीने से ज्यादा हो गए हैं पर अभी तक विभागों से संबंधित संसदीय समितियों का गठन नहीं हुआ है। सरकार ने संसद के सुचारू संचालन के लिए जरूरी समितियां बना दी हैं और वित्त से संबंधित समितियों का गठन हो गया है। पर विभागों के संबंधित समितियां अब तक नहीं बनी हैं। सरकार ने सबसे पहले कार्यमंत्रणा समिति, लोक लेखा समिति, अनुमान समिति आदि का गठन कर दिया। उसके बाद लोकसभा और राज्यसभा से जुड़ी विभागों की समितियों के लिए सभी पार्टियों से सांसदों के नाम मांगने शुरू किए। तभी कई छोटी पार्टियों के नेता लगभग हर दिन यह पता लगाते घूम रहे हैं कि संसदीय समिति का गठन कब तक होगा। 

बताया जा रहा है कि सरकार जल्दी ही विभागों की संसदीय समितियों का गठन कर देगी। भाजपा की दो सहयोगी पार्टियों जनता दल यू और शिव सेना को लोकसभा से जुड़ी एक एक समिति की अध्यक्षता मिल सकती है। कांग्रेस की अध्य़क्षता वाली समितियों की संख्या इस बार घट सकती है। वैसे कांग्रेस को पिछली लोकसभा के मुकाबले इस बार आठ सांसद ज्यादा जीते हैं पर कहा जा रहा है कि उसे कम से कम दो समितियां कम मिलेंगी। वह भी वित्त और विदेश से संबंधित समिति कांग्रेस के हाथ से जा सकती है।

संसदीय परंपरा के मुताबिक संसद की लोक लेखा समिति का अध्यक्ष मुख्य विपक्षी पार्टी का होता है। चूंकि किसी पार्टी को मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा नहीं मिला है इसलिए सबसे बडी विपक्षी पार्टी कांग्रेस को यह पद मिला है। पिछली बार लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे लोक लेखा समिति के अध्यक्ष थे। इस बार लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को यह जिम्मेदारी मिली है। पिछली बार वित्त व विदेश मंत्रालय की समिति का अध्यक्ष भी कांग्रेस का था पर इस बार शायद ऐसा नहीं होगा।

बताया जा रहा है कि इस बार वित्त व विदेश मंत्रालय की स्थायी समिति का अध्यक्ष भाजपा का होगा। पिछली बार वित्त मंत्रालय की स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस के वीरप्पा मोईली और विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर थे। राहुल गांधी विदेश मामलों की समिति के सदस्य थे। इस बार वीरप्पा मोईली चुनाव हारे हुए हैं और माना जा रहा है कि कांग्रेस के पास लोकसभा में कोई वरिष्ठ सांसद ऐसा नहीं है, जिसको वित्त जैसे अहम मंत्रालय की स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया जाए। शशि थरूर जरूर लोकसभा का चुनाव तीसरी बार जीते हैं पर उन्हें इस बार विदेश की स्थायी समिति का जिम्मा नहीं मिलना है। बताया जा रहा है कि भाजपा के लोकसभा सदस्यों की संख्या 282 से बढ़ कर 303 हो गई है इसलिए भाजपा ज्यादा समितियों की अध्यक्षता चाह रही है।

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