• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 29 July, 2019 07:10 AM | Total Read Count 105
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नौकरियों में आरक्षण देने की होड़

देश में नौकरियों की संख्या घट रही है। हर दिन नौकरी कम होने के आंकड़े आ रहे हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर में दस लाख नौकरियां कम होने की खबर दो दिन पहले ही आई है। संचार के क्षेत्र में भी नौकरियां कम हो रही हैं और दूसरे कई सेक्टर में हालत खराब है। पर इन सबके बीच नौकरी बढ़ाने की बजाय सरकारों में नौकरियां आरक्षित करने की होड़ मची है। इसका असर देश की आर्थिकी पर कई तरह से दिख रहा है। विदेशी निवेशकों के भारत में आने की हिचक और शेयर बाजार से संस्थागत विदेशी निवेशकों के हाथ खींचने के पीछे एक कारण इसे भी माना जा रहा है। कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने आर्थिक आधार पर दस फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया। उसे इसका राजनीतिक फायदा मिला होगा पर अर्थ जगत पर इसका नुकसान ही हुआ है। 

अभी आंध्र प्रदेश सरकार ने 75 फीसदी नौकरियां स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने का कानून पास किया है। ध्यान रहे आंध्र प्रदेश सूचना क्रांति का केंद्र रहा है। वहां ढेर सारी देसी, विदेशी कंपनियों ने अपने कार्यालय खोले हैं। नौकरियों में 75 फीसदी आरक्षण स्थानीय लोगों को देने के सरकार के फैसले से कंपनियां परेशान हैं। अगर स्थानीय स्तर पर उन्हें अच्छे लोग नहीं मिले तो वे वहां से अपना कामकाज समेट सकती हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश सरकार ने भी अपने यहां नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था लागू कर दी है। दिल्ली में भी सरकार इस पर विचार कर रही है। अगर वोट की राजनीति में राज्यों की इस संरक्षणवादी नीति को रोका नहीं गया तो बड़ा नुकसान संभव है। 

 

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