• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 10 July, 2019 07:01 AM | Total Read Count 176
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कर्ण सिंह की सलाह कारगर नहीं है

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पार्टी को चूं चूं का मुरब्बा बना देने वाली एक सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को जल्दी से जल्दी राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति करनी चाहिए और राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ देश के चार हिस्सों के लिए चार कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति करनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी राज्यों में यह प्रयोग कर रही है। इसलिए इसमें नया कुछ नहीं है। दिल्ली में कांग्रेस ने शीला दीक्षित को अध्य़क्ष बनाया तो तीन कार्यकारी अध्य़क्ष बना दिए। कर्नाटक, तेलंगाना और कई राज्यों में कांग्रेस ने अध्य़क्ष के साथ कार्यकारी अध्यक्ष बनाए हैं। उनके ऊपर पार्टी ने हर राज्य में एक प्रभारी और तीन-चार सह प्रभारी बना कर उनको इलाकेवार जिम्मेदारी दी है। पर संगठन का यह मॉडल बुरी तरह से फेल हुआ है। 

तभी कांग्रेस के नेता मान रहे हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ कार्यकारी अध्यक्ष या तीन-चार उपाध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं है और इससे संगठन चलाने में मुश्किल आएगी। सबसे पहले तो इससे राष्ट्रीय अध्यक्ष की सत्ता बहुत शक्तिशाली नहीं बन पाएगी। उनके हाथ में बहुत ज्यादा अधिकार नहीं होंगे। संगठन के कई स्तर बन जाएंगे। क्षेत्र विशेष के नेता के ऊपर सह प्रभारी होगा, फिर प्रभारी होगा, फिर प्रदेश अध्यक्ष होगा और फिर उस इलाके का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष होगा और तब उसके ऊपर अध्यक्ष होगा। इससे फैसला करने की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी। इसके अलावा कांग्रेस के नेता यह भी कह रहे हैं कि इतने औपचारिक स्तर के बाद सर्वोच्च सत्ता यानी सोनिया, राहुल और प्रियंका की सत्ता होगी। सो, कांग्रेस पार्टी लीडरशिप के मकड़जाल में ही उलझ कर रह जाएगी। इसके अलावा एक संकट यह भी है कि किसी की सीधी जवाबदेही तय नहीं हो पाएगी। सो, कर्ण सिंह की यह सलाह तो ठीक है कि मनमोहन सिंह की अध्य़क्षता में कार्यसमिति की बैठक हो और जल्दी अध्यक्ष चुन कर अनिर्णय की स्थिति को खत्म किया जाए पर चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का सुझाव व्यावहारिक नहीं है। 

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