• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 12 July, 2019 01:33 PM | Total Read Count 118
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कर्नाटक के बाद किसकी बारी?

कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनना महज वक्त की बात है। वहां ऑपरेशन कमल को कामयाबी के साथ अंजाम दिया जा चुका है। कांग्रेस और जेडीएस के नेता पिछले एक हफ्ते से जो कुछ भी कर रहे हैं वह दीये के बूझने से से पहले की फड़फड़ाहट है। अब तक कांग्रेस और जेडीएस के 16 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं और निर्दलीय व बसपा विधायक खुशी खुशी अपना समर्थन देने भाजपा के खेमे में चले गए हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या घट कर एक सौ रह गई है। भाजपा की सरकार बनने के बाद ऑपरेशन कमल और जोर शोर से चलेगा। तब यह संख्या और कम होगी।

सो, अब सवाल है कि कर्नाटक के बाद किसकी बारी है? मध्य प्रदेश की? मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने अपना बजट पेश किया है और किसानों को केंद्र में रख कर ढेर सारी घोषणाएं की हैं। पर इस बजट पर अमल का मौका सरकार को शायद ही मिल पाएगा। भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि वहां कांग्रेस की सरकार गिराने की पूरी तैयारी हो गई है। भाजपा ने ऐसी घेराबंदी की है कि कमलनाथ को अपनी सरकार मजबूत करने का मौका नहीं मिल रहा है। वे खुद चुनाव लड़ने के लिए भी किसी भाजपा विधायक से इस्तीफा नहीं करा पाए।

कर्नाटक के मुकाबले मध्य प्रदेश में कम इस्तीफे कराने होंगे। वहां कांग्रेस और भाजपा के बीच सिर्फ पांच सीटों का फर्क है। सो, भाजपा की योजना के मुताबिक कांग्रेस के पांच विधायक इस्तीफा दे दें और सरकार को समर्थन दे रहे सपा, बसपा व निर्दलीय विधायक भाजपा के साथ आ जाएं तो भाजपा की सरकार बन जाएगी। पहले ऐसा लग रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहेगी पर अब लग रहा है कि जैसे कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा की कमान में ऑपरेशन कमल चला है वैसे ही मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की कमान में ऑपरेशन कमल चलेगा।

मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान की बारी आएगी। वहां भाजपा को ज्यादा मेहनत करनी होगी इसलिए उसे सबसे आखिर में रखा गया है। ध्यान रहे राजस्थान में कांग्रेस के अंदर घमासान चल रहा है। भाजपा इसका फायदा उठाएगी। कांग्रेस से संबद्ध निर्दलीय विधायकों पर उसकी नजर है। उसके बाद कांग्रेस के कुछ विधायकों का इस्तीफा कराया जा सकता है। हालांकि वहां भाजपा को सरकार बनाने में थोड़ी मुश्किल आएगी क्योंकि भाजपा के विधायकों की संख्या और बहुमत के आंकड़े में 27 का फर्क है। इसलिए संभव है कि अपनी सरकार बनाने की बजाय कांग्रेस के अंदरूनी झगड़े का फायदा उठा कर सरकार गिरा दी जाए और मध्यवाधि चुनाव कराया जाए। तभी भाजपा के जानकार नेता दावे के साथ कह रहे हैं कि राज्य की सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी।

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