• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 11 July, 2019 07:07 AM | Total Read Count 209
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विपक्षी पार्टियों में बन रहा तालमेल

लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी पार्टियों का तालमेल खत्म हुआ दिख रहा था पर तीन हफ्ते तक संसद चलने के बाद फिर से तालमेल बन गया है। प्रादेशिक पार्टियां एक दूसरे की मदद कर रही हैं। मिसाल के तौर पर तृणमूल कांग्रेस अपने मुद्दे कम उठा रही है और डीएमके व टीडीपी के सांसद उसके हित के मुद्दे ज्यादा उठा रहे हैं। यह भी देखने को मिला कि लोकसभा में अधीर रंजन चौधरी के कांग्रेस का नेता होने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने कर्नाटक के मसले पर कांग्रेस का साथ दिया और सदन से वाकआउट किया। राज्यसभा में भी सदन का कामकाज ठप्प करने में तृणमूल के सांसदों ने कांग्रेस की मदद की। मौजूदा सत्र में पहली बार मंगलवार को उच्च सदन की कार्यवाही पूरे दिन ठप्प रही और लोकसभा में भी कांग्रेस ने आक्रामक तेवर दिखाए। 

इसी तरह कहा जा रहा है कि संसद में जो कमरा टीडीपी को मिला हुआ है वह तृणमूल को देने पर राजी हो गई है। बहरहाल, इन छोटी छोटी बातों पर तालमेल के अलावा सभी पार्टियां अब चुनाव से पहले वाले मोड में लौट रही हैं। चुनाव नतीजों से जो सदमा लगा था वह खत्म हो गया है। लोकसभा में डीएमके सांसदों की संख्या बढ़ने का फायदा भी कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों को मिल रहा है। टीडीपी के सांसदों की संख्या भले कम है पर टीडीपी, टीएमसी और डीएमके सांसदों ने आपस में बेहतर तालमेल किया है और कांग्रेस की मदद से वे सदन की कार्यवाही को जीवंत बनाए हुए हैं। 

 

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