• [EDITED BY : नया इंडिया टीम] PUBLISH DATE: ; 17 April, 2019 08:36 AM | Total Read Count 140
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शकील अहमद के लिए विकल्प क्या था?

बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर शकील अहमद ने पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है और मधुबनी की अपनी पारंपरिक लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उनके पिता शकूर अहमद भी कांग्रेस से ही जुड़े थे और विधानसभा के स्पीकर रहे थे। इतने पुराने परिवार के कांग्रेस छोड़ने पर सवाल उठ रहे हैं। पर मुश्किल यह है कि शकील अहमद के सामने दूसरा कोई रास्ता नहीं था। राजद और लालू प्रसाद की जिद के चलते तीसरी बार उनके लिए मुश्किल हुई है। 2009 के चुनाव में कांग्रेस और राजद का तालमेल नहीं हुआ था और तब लालू प्रसाद ने शकील अहमद के खिलाफ अपने सबसे बड़े मुस्लिम नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी को उतार दिया था। इस वजह से शकील अहमद तीसरे स्थान पर चले गए। 

अगले चुनाव में 2014 में कांग्रेस ने राजद से तालमेल कर लिया और शकील अहमद से कहा गया कि वे चुनाव नहीं लड़ें। दूसरी बार इस सीट से सिद्दिकी लड़े और फिर हार गए। बीच में कांग्रेस को राज्यसभा की सीट मिली तो वह भी शकील अहमद की बजाय राजद से आए अखिलेश सिंह को दे दी गई। सो, इस बार शकील अहमद को भरोसा था कि सीट उनको मिलेगी। इस बार लालू प्रसाद ने मधुबनी सीट खुद नहीं ली और अपने अब्दुल बारी सिद्दिकी को दरभंगा सीट से उतार दिया। पर मधुबनी सीट दूसरे सहयोगी विकासशील इंसान पार्टी को दिला दी। इसका नतीजा यह हुआ कि न तो कीर्ति आजाद को टिकट मिली और न शकील अहमद को। पूरे मिथिलांचल में कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली।

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