• [WRITTEN BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 04 September, 2019 07:17 AM | Total Read Count 599
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आरिफ मोहम्मद खान का मतलब

सतपाल मलिक की तरह ही आरिफ मोहम्मद खान शुरुआती उन नेता दोस्तों में से थे जिनसे दिल्ली आने पर मेरी व वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री से घनिष्ठ मित्रता हुई थी। वे बेहद पढ़े लिखे संतुलित व्यक्ति थे। उनकी एक खासियत यह भी थी कि न केवल हमारे शहर कानपुर में उनकी ससुराल थी बल्कि वे एक बार वहां से लोकसभा का चुनाव लड़कर भी जीते थे। उनकी एक साली शाजिया इलमी दंबग पत्रकार रहीं। 

वे बहुत स्पष्टवादी व तेज तर्रार नेता थे व खुलकर आपनी बात करते थे। जब एक बार वह सूचना और प्रसारण मंत्रालय में थे तो उन्होंने हर पत्र—पत्रिका को अपने मुख पृष्ठ पर अपनी प्रसार संख्या छापने का आदेश जारी किया। मैं तब सरिता के दिल्ली प्रेस समूह में था। हमारे संपादक जी ने मुझसे कहा कि मैं उनका इंटरव्यू लेकर आऊं और यह सवाल खासतौर से पूछूं कि अगर हम लोग आप के बारे में खबरें छापते समय उसमें हर बार यह उल्लेख करें कि आपने कितनी बार दल बदल किया है और किन-किन दलों से होते हुए यहां आए हैं? 

मैंने अपनी बात कह दी। यह सवाल सुन कर हंसे और कहने लगे कि आपने अच्छा सवाल पूछा है। अब अपना टेप रिकार्डर खोल लीजिए और मेरा जवाब अपने संपादक को सुना दीजिएगा। देखें मेरी बात सुनकर वे क्या जवाब देते हैं, मैंने वैसा ही किया भी। वे हंसते हुए मेरा सवाल सुनकर कहने लगे कि आप लोग बड़े शौक से हमारे इतिहास भूगोल के बारे में छापिए। 

मीडिया तो हमारे बैडरुम तक की खबरें छापने के लिए तैयार है मगर अपनी प्रसार संख्या छापने तक में शरम आती है। तब वे काफी चर्चा में थे। अगर यह कहा जाए कि भारतीय जनता पार्टी का जनाधार बढ़ाने में उन्होंने न चाहते हुए भी मदद की थी तो कुछ गलत नहीं होगा। 

उन्होंने बहुचर्चित शाहबानों मामले पर जो रुख अपनाया उससे भारत समेत पूरी दुनिया में चर्चित हो गए। उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में रहने वाले आरिफ मोहम्मद खान ने जामिया मिलिया व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा ली । वे एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। वे महज 26 साल की उम्र में भारतीय क्रांति दल के उम्मीदवार के रुप में उत्तरप्रदेश के सियाना विधानसभा से जीते जो कि दिवंगत चौधरी चरण सिंह का दल था। 

उन्होंने 1980 में कांग्रेस के टिकट पर कानपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा व जीते। वे राजीव गांधी मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री बने और तभी ऐतिहासिक शाहबानो का मामला सामने आया। एक काफी बुजुर्ग असहाय महिला शाहबानो को उसके वकील पति ने तलाक दे दिया। कुछ मदद न मिलने पर शाहबानो अदालत में गई व मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 

सर्वोच्च न्यायालय ने उसके हक में फैसला देते हुए कहा कि उसे अपने पति से जीवन भर गुजारा भत्ता पाने का अधिकार है। हालांकि उसने गुजारा भत्ता की जो रकम तयय 179.32 रुपए ही की थी। इस फैसले पर हंगामा बरपा। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे तब वे गृह राज्य मंत्री आरिफ मोहम्मद खान से इस मसले पर संसद में सरकार का पक्ष रखने को कहा क्योंकि यह अपराधिक दंड संहिता का मामला था व मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड इसकी खिलाफत कर रहा था। 

आरिफ मोहम्मद खान ने मुस्लिम विद्वानों से विचार करने के बाद संसद में जमकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पक्ष में अपनी राय रखी। इस बीच बिहार में हुई एक विशाल रैली में करीब 3 लाख मुसलमानों द्वारा इस फैसले का विरोध करने से राजीव गांधी डर गए। आरिफ मोहम्मद खान के मुताबिक एनडी तिवारी, अर्जुन सिंह व डा. नजमा हैपतुल्लाह ने उन्हें मुसलमानों की नाराजगी का भय दिखाया। 

जस्टिस एम ए अहमदी, ताहिर मोहम्मद, प्रो. मुशिरुल हक सरीखे लोगों ने राजीव गांधी को भड़काया कि अगर ऐसा किया तो मुसलमान नाराज हो जाएंगे। तभी घबराकर राजीव गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही बदल दिया व विरोध में आरिफ मोहम्मद खान ने कांग्रेस व अपने पद से इस्तीफा दिया। 

भविष्य में ताहिर मोहम्मद खान अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष बने तो जस्टिस अहमदी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सर्वोच्च न्याालय के मुख्य न्यायाधीश के पद तक पहुंचाया जब वीपी सिंह ने जनमोर्चा बनाया तो अरुण नेहरु व आरिफ मोहम्मद खान उसमें शामिल हो गए व केंद्र में मंत्री बने हालांकि बाद में उन्होंने जनमोर्चा से इसलिए इस्तीफा दे दिया क्योंकि मुसलमानों द्वारा उन्हें नापसंद किए जाने के कारण वीपी सिंह उन्हें अपने साथ चुनाव प्रचार में नहीं ले जाते थे। 

उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के हक में जो विरोध किया था वह हाल ही में सरकार द्वारा तीन तलाक को समाप्त किए जाने वाला कानून बनाने से फलीभूत हुआ। उन्होंने राम की तरह लंबा राजनीतिक वनवास काटा व संयोग से डा नजमा हेपतुल्ला आज भाजपा में है व मणीपुर की राज्यपाल है। जब उन्हें खुद को केरल का राज्यपाल बनाए जाने की खबर मिली तो वे इमामे हिंद-राम कार्यक्रम में अपना भाषण दे रहे थे।

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