• [WRITTEN BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 22 August, 2019 05:57 AM | Total Read Count 416
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अरुण जेटली के दीर्घायु की कामना

सच कह रहा हूं कि मैं इस कॉलम को लिखना तो नहीं चाहता था मगर पिछले कुछ दिनों से फोन पर लोगों की बातें सुनते-सुनते और अपने मित्र पत्रकार व पूर्व सहयोगी आर्येंद्र उपाध्याय से फोन पर लंबी चर्चा करने के बाद इसे लिखने के लिए बाध्य हो गया। मुद्दा यह है कि आज भाजपाई समेत पूरा देश पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की तबियत का हाल जानना चाहता है। अखबारों मे जो कुछ इस बारे में छप रहा है उस पर उन्हें विश्वास नहीं है और वे सीधे सादे शब्दों में पूछते हैं कि वे कब खाने-पीने लगेंगे। कब घर आकर सामान्य जीवन बिताएंगे। इतने दिनों से देश के सबसे बड़े अस्पताल के अनुभवी व कुशल डाक्टरों द्वारा उनकी तबियत गंभीर बताए जाने की बात उनके गले नहीं उतर रही है। इसके कई वाजिब कारण भी हे। 

एक भाजपाई नेता ने जब उनकी हालात के बारे में पूछा तो मैंने कूढ़ कर जवाब दिया कि मैं न तो उन्हें कवर करने वाला रिपोर्टर हूं और न ही डाक्टरों के संपर्क में हूं। मैं तो उतना ही जानता हूं जितना की आप जानते हैं। अतः मुझसे कुछ अलग जानने की अपेक्षा मत करिए। उनकी तबियत के बारे में पढ़-सुनकर मुझे बेहद दुख हो रहा है। क्योंकि वे हम लोगों के काफी घनिष्ठ थे। इतने ज्यादा कि व्यासजी तो विधि, मुझे व कुछ और लोगों को लेकर 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके क्षेत्र अमृतसर सिर्फ उनसे मिलने व चुनावी हालात का आकलन करने गए थे व वहां उन्होंने पहला सवाल उनसे पूछा कि यह बताइए कि आपको अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए किसने कहा था। यहां हालात अच्छे नहीं हैं। बेहतर होता कि आप दिल्ली या जयपुर से चुनाव लड़ते और अपना नामांकन भरने के बाद देश भर में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करते। आगे क्या हुआ वह सबको पता है।

सीमा स्थित इस चुनाव क्षेत्र में राष्ट्रीयता का पुरोधा होने का दावा करने वाली पार्टी की हवा में उसका वह वरिष्ठ नेता हार गया। जिसकी अमृतसर में ससुराल तक थी। बाद में उनके वित्त मंत्री बनने के बाद व्यासजी के उनसे संबंध खराब हो गए और वे उन्हें रगड़ा देने लगे। ऐसी-ऐसी बाते लिखने लगे जोकि उनकी पत्नी या अभिन्न मित्र ही उनके बारे में जानते होंगे। कई बार मुझे लगता है कि व्यासजी दुर्वासा ऋषि के खानदान से हैं। बहुत जल्दी नाराज हो जाते हैं। जब अहमद पटेल कांग्रेस व देश में र्स्वश थे तब उन्होंने अपने कॉलम में उन्हें रगड़ा लगाया था फिर उनका फोन मेरे पास आया। व्यासजी व मेरी घनिष्ठता व आत्मीयता के कारण लोगों को लगता है कि वे क्या कर व सोच रहे हैं। वह मुझे पता होगा। जब एक वरिष्ठ पत्रकार के अंतिम संस्कार में अरूण जेटली मुझे लोदी रोड शमशान घाट पर मिले तो उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम्हारे व्यासजी को क्या हो गया है। मुझसे इतना नाराज क्यों हैं। मैंने कहा जो कुछ छप रहा है उससे तो लगता है कि आप दोनों अभिन्न मित्र रहे हैं। आप सीधे उनसे ही बात क्यों नहीं कर लेते हैं। उन्होंने लंबी सांस भरते हुए कहा कि कोई फायदा नहीं होगा। 

जब घर लौटकर मैंने यह बात व्यासजी को बताई तो वे खिलखिला कर हंसने लगे और बोले कि वो तिलमिला गया? यही तो मैं चाहता था। मैंने उनसे कहा की भाई साहब आप हर चीज में मुझसे श्रेष्ठ हैं। मगर यह बताइए कि आज जो व्यक्ति सरकार व प्रधानमंत्री को चला रहा है उसे लगातार निशाना बनाने का क्या फायदा है। बोले तुम यह क्यों नहीं सोचते कि यह हमारा क्या नुकसान कर लेगा। जब हम दोनों दिल्ली आए थे तो हमारे पास कुछ नहीं था। किराए के सरकारी मकान में रहते थे। अपनी मेहनत व योग्यता से खुद को खड़ा किया। ऐसे ही खाली हाथ चले जाएंगे। इस तरह की बातें सोचा मत करो और मैं चुप रह गया।

अरूण जेटली की कई खासियतें थी वे देश के जाने-माने वकील होने के साथ-साथ बेहद संपन्न व्यक्ति थे। पत्रकार उन्हें घेरे रहते थे और वे अक्सर उन्हें व्यक्ति नेता व पार्टी के बारे में इशारे भी करते रहते थे। स्वास्थ्य के कारण बिना दुध की चाय पीते और जब भाजपा के पूर्व मुख्यालय के साथ स्थित उनके बंगले में पत्रकार उनसे मिलने जाते तो अकेले ककड़ी, टमाटर खीरे का सलाद खाते रहते। कभी झूठा भी वे नहीं कहते कि आप भी ले लीजिए। फिर भी उनकी वाकपतुता के कारण लोग उनके दीवाने रहते हैं। वे मेरी तरह दिल व डायबिटीज के शिकार थे। कुछ वर्षों से उनके पैरो में इतनी ज्यादा सूजन आने लगी थी कि उन्होंने जूते की जगह चप्पल पहनना शुरू कर दिया था। वे बीच में गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। उन्हें लेकर अटकले लगाए जाने की वजह हमारा पिछला राजनीतिक इतिहास है। 

जब वरिष्ठ नेता बाबू जगजीवन राम का देहांत हुआ तो यह पता चलने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लगा कि उन्हें अपना विदेश दौरा रद्द करना पड़ेगा। अतः यह सूचना जगजाहिर करने वाले तत्कालीन प्रधान सूचना अधिकारी श्रीराव को हटा दिया गया था व डाक्टरों ने बाबूजी को आक्सीजन देना शुरू कर दिया था। राजीव गांधी के दिल्ली वापस आते ही उनके स्वर्गवास का ऐलान कर दिया गया। हालांकि बाबूजी के क्रिया कर्म उस तारीख के दिवस से ही किए गए जबकि उन्हें यह लोग स्वर्गवासी घोषित किया गया था। एक व्यक्ति ने कहा कि आजकल तो डाक्टर भगवान हो गए हैं। जन्म हो या मौत सबकुछ उनके हाथों में रहता है। बच्चे के जन्म के पहले मां-बाप से पूछते हैं कि वह किस तारीख को उसका जन्म करना है। दूसरे मामले में तो यह और भी आसान है क्योंकि उससे तो चंद क्षण लगते हैं। भगवान अरूण जेटली को दीर्घायु करे व स्वस्थ रखे।

 

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