• [EDITED BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 13 June, 2019 07:49 AM | Total Read Count 343
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खाने का शौक और जिग्स कालरा

हमारे परिवार में ही नहीं बल्कि पूरे खानदान में खान-खिलाने पर हमेशा जोर रहा परवार के सभी सदस्यो से लेकर मेरा बेटा भी तरह-तरह के पकवान बनवाकर खाने के शौकीन है। संयोग से मेरी पत्नी भी बहुत अच्छे व्यंजन तैयार करती है। जब कोई मेहमान हमारे यहां आता है तो हमलोग जब एक समय कुछ खा रहे होते हैं तभी बात करते हुए यह तय कर लेते है कि अगली बार खाने में क्या बनेगा।

बच्चों के साथ जब किसी शहर जाते है तो पहले से ही यह खोज करके रखते थे कि वहां किस दुकान या रेस्तरां पर कौनसी चीज अच्छी मिलती है और तो और मेरा दिवंगत कुत्ता स्टफी भी खाने पीने का इतना शौकीन था कि हम लोग बाहर से उसके लिए खाने का सामान लेकर आते। हमारे घूमकर घर वापस लौटते समय वह फ्रिज के सामने उछलने लगता था क्योंकि उसे पता होता था कि मैं मंगलवार को हनुमान जी पर प्रसाद चढ़ाने के बाद उसका डब्बा फ्रिज पर रख देता हूं। वह प्रसाद खाकर ही सोता।

भगवान की उस पर हमेशा इतनी कृपा रही कि कुत्ता होकर मीठा खाने के बाजवूद उसे कभी खुजली का रोग नहीं हुआ। जब पत्नी के साथ बेटे से मिलने के लिए कनाडा गया तो हम यहां से छोले भटूरे समेत तमाम तरह का खाना बनाने का सामान लेकर गए थे व हमारे कुछ परिचित भारतीय भी शाम को घर आकर खाते थे। उन्हें पता था कि हमारे यहां खाने में कुछ विशेष जरुर बना होगा।

अब मुझे ज्यादा खाने पीने का शौक नहीं रहा है पर खिलाने व पिलाने का शौक आज भी है। कनाडा से लौटते समय एयर पोर्ट से कुछ बढ़िया शराब की बोतेलें लाकर अपने घर के बार में सजा दी थी।

मैं पहले भी बता चुका हूं कि मुझे खबरियां चैनलों की चक चक पसंद नहीं है। डिस्कवरी सरीखे जानवरों वाले चैनल देखना ज्यादा पसंद करता हूं। जब उन पर कुछ विशेष नहीं आ रहा होता तो व्यंजन बनाना सिखाने वाले चैनल देखता हूं। मेरा मानना है कि बिना भूख के ही इस चैनल पर बनने वाले व्यंजनों का आनंद लिया जा सकता है।

कुछ साल पहले शुरु हुए इस चैनल पर व्यंजनों को बनाने का एक कार्यक्रम शुरु हुआ था ‘लास्ट रेसेपिसीज’। इसमें उन व्यंजनों को बनाने की जानकारी दी जाती थी जो कि हमारे देश में कभी बनते थे व आज कल उनका बनाना बंद हो चुका है। दूसरे देश के विभिन्न हिस्सों में बनायी जाने वाली खाने की चीजों की जानकारी भी दी जाती है। जहां वे बनती थी वहां जाकर उनकी जानकारी लेकर प्रोग्राम तैयार किया जाता था फिर वह कार्यक्रम बंद हो गया और दूसरे चैनल पर 'राजा रसोई व अन्य कहानियां नामक' कार्यक्रम शुरु हो गया।

इस पर राजा-रजवाड़ों से लेकर देश के तमाम हिस्सो में बनती आयी खाने पीने की चीजों को बनाना सिखाया जाता है। यह मुझे देखने में बहुत अच्छा लगता है। इनके साथ ही टीवी पर तरह तरह का खाना बनाना सिखाने वाले कार्यक्रम की भरमार हो गई है। विश्वास खन्ना, संजीव कपूर, कुणाल कपूर, आदित्य बहल से लेकर रणवीर बत्रा तक जाने माने शैफ नई से नई चीजें बनाने की जानकारी प्रदान कर रहे हैं।

मेरे परिवार ही नहीं पूरे खानदान में एक अजीब बात यह है कि हम सभी लोग पुरुषों के हाथ का  बनाया तो खाना कहीं भी खा लेते हैं। मगर परिचित परिवार की महिलाओं के अलावा अन्य अनजानी महिलाओं के हाथ का बना खाना नहीं खाते हैं। वैसे भी मेरा मानना है कि दुनिया में सबसे अच्छे टेलर व खानसामे पुरुष ही होते हैं। मैं जब टीवी पर पुष्पेश पंत व जिग्स कालरा को तरह-तरह की चीजें बनाना सिखाते या उनकी जानकारी देते देखता तो मैं आश्चर्य में पड़ जाता। क्योंकि डा. पुष्पेश पंत तो अंर्तराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर हैं जो कि लंबे अरसे तक जवाहर लाल नेहरु विवि में पढ़ाते रहे।

जब उन्हें एक बार किसी कार्यक्रम में बैंगन की जानकारी देते देखा तो हतप्रभ रह गया। व्यंजनों के बारे में उनकी जानकारी व ज्ञान का जवाब नहीं है। यही स्थिति जिग्स कालरा की थी। चंद दिन पहले 3 जून को उनका निधन हो गया। उन्हें भारतीय व्यंजनों का शाह या भारतीय स्वाद का राजदूत कहा जाता था। इस 72 वर्षीय विशेषज्ञ ने टाइम्स आफ इंडिया में ट्रेनी पत्रकार के रुप में अपना कैरियर 499 रुके भत्ते से शुरु किया था व बाद में दुनिया भर में बहु चर्चित खाना बनाने की पुस्तक लिखी जिसकी 60 लाख प्रतिया छप चुकी है। माताएं अपनी बेटियों को शादी में इस पुस्तक को दिया करती थी।

उनका पूरा नाम जसपाल इंदर सिंह कालरा था। उन्हें प्यार से ‘जिग्स' नाम से बुलाते थे। उन्होंने आईटीसी ओबेराय व पार्क होटलों में शैफ का काम किया और मसाला बार, मसला लाइब्रेरी वकैफे नाम से भारतीय रेस्तरां खोले जिनके स्वाद लाजवाब होते है अब उनका कारोबार बोस्टन विश्वविद्यालय से एमबीए करके आया उनका बेटा जोरावर सिंह संभाल रहे हैं। उन्होंने तो दूरदर्शन पर मास्टर शैफ सरीखे कार्यक्रम तब देना शुरु कर दिया था जब कि विदेशों में इन्हें शुरु भी नहीं किया गया था।

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