• [WRITTEN BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 27 August, 2019 09:21 AM | Total Read Count 323
  • Tweet
फ्रांस, विमान दुर्घटना और होमी भाभा

हर नेता की कुछ-न-कुछ खासियत होती है। जैसे कि बसपा नेता कांसीराम कहा करते थे कि एक्सपोज, डिपोज एंड प्रपोज। मतलब पहले हम राजनीति में सत्तारूढ़ दल की खामियो का भंडाफोड़ करेंगे। फिर उसे दूसरे आम चुनाव में हराएंगे व फिर तीसरे चुनाव में सरकार बनाने का प्रस्ताव रखेंगे। भाजपा नेता व मौजूदा उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू अपनी तुकबंदियो के लिए मशहूर हैं। 

एक बार किसी के कुछ कहने पर उन्होंने कांग्रेस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि उधर गिद्द है और भाजपा में कलचर (संस्कृति) हैं।  उनका वह अंदाज आज भी जारी है। अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खासियत है कि वे व्यक्तियो, घटनाओं, तारीखों को अहमियत देकर उन्हें चर्चा में ला देते हैं। जैसे बिहार में आम चुनावो से पहले उन्होंने अचानक जाने-माने कवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्म शताब्दी मना कर भूमिहारो का मन जीतने की कोशिश की थी। 

जब इजरायल के दौरे पर गए तो वहां रफिया नामक स्थान ढूंढ़ निकाला जहां भारतीय सैनिको ने उसकी मदद के लिए अपना बलिदान दिया था। अब जब फांस गए तो अचानक उन्होंने दो विमान दुर्घटनाओं की याद दिलाते हुए भारत को उनसे जोड़ दिया। इनमें से एक घटना 1950 की व दूसरी 1966 की है।

बता दें कि फांस के एलप्स पर्वतो के मांट ब्लाक इलाके में एयर इंडिया के दो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए थे जिनमें काफी लोग मारे गए थे। इनमें 1966 में हुई विमान दुर्घटना में भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा भी शामिल थे। उनके साथ विमान चालक, स्टाफ व 117 लोग मारे गए थे। 

पहली दुर्घटना तब हुई जबकि एयर इंडिया की उड़ान एआई-245 पर जा रहा विमान मलाबार प्रिंसेज मांट ब्लॉक की पर्वत श्रेणी से टकरा गया। यह विमान मुंबई से लंदन की उड़ान पर था। इस दुर्घटना को लेकर तरह-तरह की अफवाहे उड़ी मगर अंत में माना गया कि इसके लिए खराब मौसम जिम्मेदार था क्योंकि दो दिनों तक मौसम खराब होने के कारण विमान की खोज व राहत के काम नहीं शुरू किए जा सके। 

जब दूसरा विमान दुर्घटना हुआ तब उसमें भारतीय परमाणु ऊर्जा के अध्यक्ष होमी भाभा सवार होकर विएना जा रहे थे। वह विमान न्यूयार्क जा रहा था। बताते हैं कि जिनेवा एयरपोर्ट व पायलट के बीच हुई बातचीत में कुछ गड़बड़ी होने के कारण यह दुर्घटना हुई थी। तब इन अफवाहो ने दम पकड़ा था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने भारतीय परमाणु कार्यक्रम को असफल बनाने के लिए होमी भामा को मरवा दिया था। जोकि भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे। 

अमेरिका तब भी पाकिस्तान का मित्र था व 1965 के युद्ध में भारत से हार चुका था। उस हार का बदला चुकाने के लिए सीआईए ने उसके सामान रखने वाले स्थान में बम लगा दिया था जिसमें विस्फोट होने पर विमान के परखच्चे उड़ गए। नरेंद्र मोदी ने इन दोनों दुर्घटनाओं की याद में मृतको को श्रद्धांजलि देने के लिए वहां बनाए गए यादगार स्थल का पेरिस से वीडिया कांफ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन किया।

डा. होमी जहांगीर भाभा ने ट्रांबे में परमाणु ऊर्जा अनुसंधान केंद्र की स्थापना की थी। वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक थे। बाद में उनके द्वारा स्थापित अनुसंधान केंद्र का नाम भाभा एटामिक सेंटर रखा गया। इंदिरा गांधी ने जो परमाणु विस्फोट किए थे उसकी यह क्षमता हासिल करने की शुरुआत उन्होंने ही की थी। उन्हें 1952 में एडम्स पुरुस्कार व 1954 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। 

उन्हें 1951, 1953 से 1958 तक भौतिकी के नोबल पुरुस्कार के लिए मनोनीत किया जाता रहा था। वे जाने-माने पारसी थे और जाने-माने व्यापारी दिनशॉ मानेकजी पेटिट व दोराबजी टाटा के रिश्तेदार थे। उनके पिता जहांगीर होरमुस जी भाभा जाने-माने पारसी वकील थे। उन्हें 1935 में अपना पहला वैज्ञानिक शोध पत्र प्रस्तुत करने पर परमाणु विज्ञान में डाक्टरेट मिली थी। उन्होंने कैंब्रिेज व दूसरे देशों के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई की। वे 1939 में छुट्टी मनाने के लिए भारत आए और द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो जाने पर उन्होने इंग्लैंड वापस नहीं जाने का फैसला किया। 

वे बाद में रायल सोसायटी ऑफ लंदन के फैलो बने व नोबल पुरुस्कार विजेता सीवी रमन की अध्यक्षता वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरू में प्राध्याप्क बने। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू समेत कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेताओं को परमाणु ऊर्जा का महत्व समझाया। उन्होंने अपने बलबूते पर भारत के परमाणु विकास का काम शुरू किया था। तब देश आजाद भी नहीं हुआ था। 

उन्होंने एटामिक एनर्जी कमीशन व टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना की थी। वे जेनेवा में परमाणु के शांतिपूर्वक उपयोग पर हुए सम्मेलन के अध्यक्ष बनाए गए थे। जब भारत-चीन युद्ध हुआ तो उसके परिणामों को देखते हुए भाभा परमाणु अस्त्र हासिल करने की वकालत करने लगे। जब वे विमान दुर्घटना में मारे गए तब यह कहा गया था कि भारत का परमाणु कार्यक्रम बर्बाद करने के लिए अमेरिका ने यह किया था। 

बाद में ग्रेगरी डगलस नामक एक अमेरिकी पत्रकार ने सीआईए के पूर्व जासूस राबर्ट क्राओली से हुई बातचीत को टेप करके खुलासा किया था कि सीआईए ने भाभा की हत्या करवाई थी। उसने इस संबंध में अपनी किताब में भी इसका खुलासा किया था। मगर उस बात को अफवाह की तरह ही लिया गया था। 

 

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

Categories