• [WRITTEN BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 29 August, 2019 06:37 AM | Total Read Count 287
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हरियाणा में कांग्रेस माने हुड्डा या तंवर?

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रोहतक की रैली को ले कर वहां जाने वाले पत्रकारों से लेकर पार्टीजनो व आम हरियाणावासी को उनकी बातें सुनकर निराशा ही हुई। क्योंकि यह माना जा रहा था कि कांग्रेस में अपनी उपेक्षा से दुखी होकर हुड्डा उस दिन अपनी अलग प्रादेशिक पार्टी बनाने का ऐलान कर देंगे। मगर इस रैली में हुड्डा ने अपना विरोध तो जताया मगर पार्टी नहीं छोड़ी और हाथी न खाता है न पीता है न ही चलता है के अंदाज में पार्टी से अपने संबंध तोड़ने का ऐलान करते हुए उसे मना कहने से बचे। 

इस रैली में उन्होंने खुद को हरियाणा के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। मालूम हो कि वहां चंद माह बाद विधानसभा का चुनाव होने वाला है व हाईकमान पिछले कई सालों से उनकी अनदेखी करता आया है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी का समर्थन मिले या न मिले मुख्यमंत्री बनकर दिखाएंगे व चार उप मुख्यमंत्री भी बनाएंगे। इनमें से एक पिछड़ा, एक दलित व एक ब्राह्मण होगा। 

उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर में धारा 370 व 35ए समाप्त करने पर पार्टी द्वारा उसकी आलोचना करने पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी भटक गई है। केंद्र में सरकार का पतन होने से पहले ही हुड्डा कांग्रेस व उसके नेताओं का खर्च चला रहे थे। इसके बावजूद पार्टी उनकी लगातार उपेक्षा करती रही। राहुल गांधी ने उनके विरोधी अशोक तंवर को उनकी इच्छा के विरूद्ध प्रदेश अध्यक्ष बनाया जिन्होंने टिकट वितरण में अपनी चलाई व उनके कहने पर जिन आधा दर्जन लोगों को विधानसभा के टिकट दिए गए उनकी जमानते जब्त हो गई। 

अगर भूपिंदर सिंह हुड्डा की बातें मानी गई होती तो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इतनी बुरी तरह से ना हारती। इससे भी ज्यादा बुरा तो तब हुआ जब मुख्यमंत्री रहते हुए सत्ता खोने के बाद उन्हें परंपरा के मुताबिक कांग्रेस हाईकमान ने हरियाणा विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने की जगह उनकी विरोधी किरण चौधरी का यह पद थमा दिया। इससे पहले उनके खिलाफ खुलकर अभियान चलाने वाली शैलजा ने हालात भांपते हुए चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था और वे राज्यसभा में पहुंच गई थी। 

चर्चा यह है कि हाईकमान वास्तव में उनसे घबराता है। सोनिया गांधी ने उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए मना लिया और भविष्य में उनका ध्यान रखने का वादा किया है। मालूम हो कि उन पर सरकार ने नियम कानून ताक पर रखकर नैशनल हैरल्ड के लिए जमीन देने व सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के जमीन के जरिए करोड़ो का लाभ पहुंचाने के आरोप लगा जांच चलाई हुई है। इस सबके बीच अभी तक पार्टी ने उनका बचाव नहीं किया। 

पार्टी ने उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा को सूचना तकनीक का जानकार होने के बावजूद हरियाणा के ही जाट नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को अहमियत देते हुए उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना रखा है। इतना ही नहीं इस रैली के बाद अशोक तंवर ने उनके प्रति आक्रामक रवैया अपनाते हुए उन्हें चेतावनी देने के अंदाज में कहा कि जिस तरह से इस रैली में जो कुछ कहा गया, मैं तो इतना ही कहूंगा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो वह पार्टी से ऊपर नहीं है। जो कुछ कहा गया वह अनुशासनहीनता की परिभाषा में आता है। उनका यह कहना भी गलत है कि पार्टी पहले जैसी नहीं रही। इसी पार्टी ने उन्हें 10 साल तक मुख्यमंत्री बना कर रखा था उन्हें स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने जो कहा कांग्रेस के सर्वोच्च नेतृत्व के बारे में उसका मतलब क्या था। 

संदेह नहीं कि हरियाणा में कांग्रेस की हालात बहुत पतली है और अगर जाट नेता हुड्डा अपनी अलग पार्टी बना लेते तो कांग्रेस को इसका जबरदस्त नुकसान होता। वे भाजपा विरोधी जाट, मुस्लिम मत काट देते जिसका कि उसे फायदा था। अब कांग्रेस व हुड्डा दोनो के लिए समय बहुत कम बचा है पर मेरा मानना है कि तमाम मानवीय गुण होने के बावजूद भी हुड्डा विगत में भी सही मौके को खोते आए हैं। 

कई वर्ष पहले जब केंद्र में नरसिंह राव की सरकार थी तब हरियाणा में जबरदस्त बाढ़ आई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री से कह कर बाढ़ के दौरे के लिए सेना के हैलीकाप्टर का इंतजाम करवाया। जब पालम के टेक्नीकल एरिया में कृषि मंत्री जाखड़ के साथ पहुंचे उसमें बैठे तो पता चला कि हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल फोटोग्राफर के साथ हैलीकाप्टर में चढ़ गया। पायलट ने कहा कि इसमें कैमरामैन के लिए जगह नहीं है तो वे कहने लगे कि कोई बात नहीं यह खड़ा होकर चला चलेगा। 

फिर भजनलाल उनके पास आए जोकि खिड़की के पास जाखड़ के साथ बैठे थे। भजनलाल ने उनसे कहा कि आपकी अंग्रेजी अच्छी है अतः आप अफसरो के साथ बैठकर उन्हें अंग्रेजी में समस्या की गंभीरता के बारे में बताइए। वे बेचारे उठ गए और भजनलाल कृषि मंत्री के साथ बैठ गए व कैमरा चालू हो गया। जब दिल्ली लौटकर उन्होंने टीवी खोला तो देखा कि दूरदर्शन में भजनलाल व कृषि मंत्री को बाढ़ग्रस्त इलाके का दौरा करते हुए दिखाया जा रहा था व कह रहे थे कि आज मुख्यमंत्री भजनलाल ने हरियाणा के बाढ़ग्रस्त इलाको का दौरा किया। इस मौके पर कृषि मंत्री भी उनके साथ थे। 

यह देखकर वे और दूसरे नेता अवाक रह गए। ऐसा ही तब भी हुआ जबकि नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर नरसिंहराव से मिलने गए। तब तक अयोध्या कांड को चुका था। मैंने मुलाकात के बाद उनसे पूछा कि आपने उनसे क्या कहा तो वे मासूमियत से कहने लगे कि क्या कहता भाईसाहब जिसका खुद अपना मकान ढह गया हो उससे क्या कहा जाए कि राजनीतिक जलजले में मेरा घड़ा और बर्तन भी टूट गए हैं। अब देखना यह है कि इस बार भी वे चूकते है या कांग्रेस के हुड्डा माने हरियाणा को साबित करके दम लेंगे क्योंकि अशोक तंवर तो पार्टी के अंदर लंबे समय से जारी असंतोष को समाप्त करने का ऐलान लगातार कर रहे हैं।

 

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