• [WRITTEN BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 20 August, 2019 06:53 AM | Total Read Count 195
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आर्थिकी जरा सी रूठी हुई है!

मैं कोई आर्थिक विशेषज्ञ या विद्वान नहीं हूं। मगर एमए अर्थशास्त्र में करने व अपनी सामान्य बुद्धि के कारण इतना जरूर जानता हूं कि जब आर्थिक समृद्धि आती है तो कंपनियों का लाभ बढ़ता है व उनका मुनाफा होने के कारण शेयरों के दाम बढ़ते हैं। मगर इस बार मेरा सिर चक्कर खा गया। बात यह थी कि पिछले कुछ वर्षों में शेयर बाजार में शेयरो के दाम तो बढ़े मगर उनके जरिए मिलने वाला लाभांश या नैट एसेट वैल्यू (एनएवी) नहीं बढ़ा। 

मतलब जैसे कि कोई व्यक्ति मोटा तो हो गया हो मगर उनका स्वास्थ्य न बढ़ा हो। यह देखकर मेरी समझ में कुछ नहीं आया। हां, एक घटना जरूर याद आ गई। जब जनसत्ता में था तो मेरे एक वरिष्ठ साथी ने एक अन्य कलाकार साथी के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा था कि नोबल पुरुस्कार विजेता अमर्त्यसे न इनकी बैंक की पासबुक देख ले तो उसका सिर चकरा जाए क्योंकि इनकी तमाम ज्ञात स्त्रोंतो से होने वाली आमदनी की तुलना में इनके द्वारा बैंक ऋणों के बदले में चुकाई जाने वाली किश्तो की राशि कहीं ज्यादा है। 

यह सुनकर संबंधित सहयोगी जिनके बारे में यह टिप्पणी की गई थी ही-ही-ही- करके हंसने लगा। अब जब देश की आर्थिक स्थिति के बारे में आने वाली खबरों को पढ़ा तो वह कहानी याद आ गई।

व्यासजी समेत तमाम जानकारो ने लिखा है कि तमाम क्षेत्रों में आर्थिक प्रगति गड़बड़ा रही है। इनमें आटोमोबाइल क्षेत्र सबसे आगे है। वहां करीब 36 फीसदी गिरावट आ चुकी है। कम उत्पादन होने के कारण आटो उद्योग से जुड़े कलपुर्जे बनाने वाले सहायक उद्योग भी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। और तो और फैक्टरी से दूसरे शहरों में डीलर के शोरूम तक वाहन ले जाने वाली ट्रके खाली खड़ी  हुई है और उनके कर्मचारी काम के अभाव में खाली बैठे हुए हैं। 

जबकि हमारी सरकार विशेष कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, देश की आर्थिक प्रगति पर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। यह सब देखकर मुझे याद आता है कि जब हम लोग बचपन में फिल्म देखने जाते थे तो अक्सर दर्शको को सिनेमा हाल में अंधों का हाथी नामक फिल्म दिखाई जाती थी। इसमें कुछ अंधों को एक हाथी को छूकर कल्पनाएं करते हुए दिखाया जाता था। इसमें दिखाया जाता है कि एक अंधा हाथी का पैर छूकर उसे खंबा समझ रहा है तो दूसरा पैर को छूते हुए उसे पेड़ समझ रहा है। तो कोई उसकी पूंछ को छूते समय सोच रहा है कि वह तो अजगर को पकड़ रहा है। 

अब जब मैं तमाम खबरियां चैनलो पर मोदी व उनके सहयोगियो को देश की अर्थव्यवस्था रोजगार को लेकर की जाने वाली वाहवाही को सुनता हूं तो मुझे वे सब अंधों द्वारा हाथी को छूता ही ही नजर आता हैं। मगर उनका जवाब गजब का है। एक और डिस्कवरी चैनल पर उनके साथ अपना कार्यक्रम दिखाकर उन्हें अंर्तराष्ट्रीय स्तर के नेता के रूप में स्थाेपित करने पर तुले हैं क्योंकि याद दिला दे कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सत्ता के बाहर होने के पहले इसी कार्यक्रम में उन्हें बेयर ग्रिेल ने सालमन मछली खाते हुए दिखाया था। अब यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि वे तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर के नेता है। 

एक प्रधानमंत्री की जानकारी के साधन व स्त्रोत बहुत ज्यादा होते हैं। अतः यह नहीं कहा जा सकता कि उनके पास जानकारी देने वाली एजेसियां व नेता नहीं होंगे। मगर कई बार मुझे लगता है कि शायद वे सभी उन तक सच्ची सूचनाएं नहीं पहुंचा रहे हैं। एक पुरानी कहानी है कि एक राजा का बहुत जबरदस्त जलवा था। लोग उसके सामने मुंह खोलने से घबराते थे। राजा ने एक हाथी पाल रखा था जिसे वह बहुत ज्यादा प्यार करता था। एक बार उसका हाथी मर गया। सब इस सोच में पड़ गए कि राजा को उसके निधन की खबर कैसे दें। सबने सलाह करके योजना बनाई। एक मंत्री ने राजा से कहा कि सर आपका हाथी खाना नहीं खा रहा है। दूसरा बोला कि सर आपका हाथी चल फिर नहीं रहा है। तीसरे ने कहा कि सर वह सांस नहीं ले रहा है। वैसे सबकुछ ठीक है। राजा प्रसन्न रहा। ऐसे ही इन दिनों कई बार जब वे देश के हालात पर खुशी जताते हैं तो मुझे बरबस इस किस्से की याद हो जाती है। सब ठिक है आर्थिकी बस जरा सी रूठी हुई है। 

 

  • सही कहा लेकिन 5 साल तो काटने ही पड़ेंगे।

    on 10:50 AM | August 20

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