• [WRITTEN BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 13 August, 2019 06:45 AM | Total Read Count 362
  • Tweet
यदि भारत व पाकिस्तान एक रहते तो...

आजकल बेंगलुरू में समय बिताने के लिए करना है कुछ काम सिद्धांत का पालन करते हुए अखबारों को बहुत गहराई से पढ़ रहा हूं। ऐसी-ऐसी खबरों को भी चटखारा लेते हुए पढ़ जाता हूं जिन्हें मैं दिल्ली में अनदेखा कर देता था। इसकी एक वजह यहां अखबारों व खबरों की कमी होना है। ज्यादातर खबरें ऐसे लोगों या इलाको के बारे में होती हैं जिन्हें कि मैं जानता ही नहीं हूं। बाकी बरसात के कारण सरकार के नाकारापन को उजागर करने वाली होती हैं। 

ऐसी ही एक खबर अखबारों में छपी पाकिस्तान के रेलमंत्री शेख रईस अहमद के बयान पर आधारित वह समाचार है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर अबकी बार दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ तो वह अंतिम युद्ध साबित होगा। दुनिया में पाकिस्तान की स्थिति बहुत खराब है। उसके बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सही ही कहा है कि भगवान दुश्मन को भी ऐसा पड़ोसी न दे। 

पाकिस्तान बुरी तरह से आर्थिक संकट से गुजर रहा है व सेना के प्रभुत्व में काम करने वाली सरकारें लगातार वहां सक्रिय आतंकवादियों को भारत के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बढ़ावा देती आई है। हालांकि इस चक्कर में वे खुद भी इसका शिकार बनती आई है।

मेरा मानना है कि वे सच ही कह रहे हैं क्योंकि भारत व पाकिस्तान में होने वाले युद्ध से पाकिस्तान को ही सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। हमने तो 1971 कें युद्ध में उसका पूर्व इलाका उससे काट कर अलग देश बांग्लादेश ही बना दिया था। 1965 कें युद्ध से कारगिल युद्ध तक उसने मुंह की खाई है। 

वैसे मेरा मानना है कि इस मामले में हमें अपनी पीठ ज्यादा ठोंकने की जरूरत नहीं है। भारत के सामने पाकिस्तान बहुत छोटा-सा लगभग उत्तर प्रदेश के बराबर देश है। अतः उससे अपनी तुलना करना ठीक नहीं है। मगर उसकी भूमिका वहीं है जो कि पुराने समय में तय करने के लिए बैठे ऋषि-मुनि पर उस दौरान हड्डी, मांस व मलमूत्र फेंक कर उन की पूजा को विचलित करने वाले राक्षसों की होती थी।

मेरा मानना है कि अगर अबकी बार युद्ध हुआ तो मंत्री के मुताबिक यह अंतिम ही होगा क्योंकि इसके बाद पाकिस्तान का तो नामों-निशान ही मिट जाएगा। जोकि मैं नहीं चाहता हूं। मैंने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन हमें पाकिस्तान का भी नेतृत्व संभालना पड़े। तमाम पाठक मेरे विचारो से असहमत हो सकते हैं मगर मेरा अभी भी यह मानना है कि चाहे अगस्त 1947 का दोनों देशों के बीच हुआ बंटवारा दुनिया के इतिहास का सबसे क्रूर बंटवारा हो जिसमें दसियों लाख लोग मारे गए थे, मगर वह एक अच्छा कदम था। 

जरा कल्पना करिए कि अगर बंटवारा न हुआ होता तो आज उत्तर पूर्व से लेकर अफगानिस्तान की सीमा तक अखंड भारत होता जिसमें आतंकवादी खुलेआम घूमते हुए अपने कारनामों को अंजाम देते। आए दिन हाफिज सईद जैसे लोग दिल्ली के क्नाट प्लेस स्थित किसी रेस्तरां में प्रेस कांफ्रेंस करके आराम से निकल जाते। जब हम अनुच्छेद 370 की समाप्ति पर देश के ही तमाम दलो व उनके नेताओं के बीच एकरूपता नहीं पा रहे हैं तब उस हालत में क्या होता। जबकि आतंकवादियों को चुनाव में राष्ट्रीय नेताओं के सामने लड़ते देखा जाता। 

मैं बेटी की जिस सोसायटी में रह रहा हूं। उसमें इन दिनों मुख्य गेट को बहुत बड़ा करके स्वचालित बनाने का काम चल रहा है। पता चला कि बेंगलूरू में कुछ साल पहले हुई आतंकवादी घटनाओं को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। जैसे पाकिस्तान में आतंकवादियों ने स्कूलो व मस्जिदो पर हमला करके निर्दोष बच्चों को अपना निशाना बनाया उसे देखते हुए सोसायटी के प्रबंधकों ने दरवाजा बेहतर बनाने का कदम उठाया है। 

अगर कभी हाफिज सईद जैसा आतंकवादी संसद या विधानसभा तक पहुंच गया होता तो उसकी बयानबाजी व निजी विधेयक लाए जाने का क्या परिणाम होता। हमारे नेता तो आज तक आतंकवादियों के नामों के आग 'जी' लगाकर बोलते रहे हैं। इसका आर्थिक पहलू भी है। आज पाकिस्तान जिस आर्थिक संकट से गुजर रहा है उसका सीधा प्रभाव हमारी भी आर्थिक स्थिति पर पड़ता। हम भी दुनिया के पैसे वाले देश के कर्जदारों में शामिल हो गए होते। वहां के पैसे वालो व निजी सेनाओं की तरह हमारे देश में भी आए दिन इन सेनाओं के अत्याचारों की कहानियां पढ़ने को मिलती। हमारी अनुशासित सेना भी बर्बाद हो गई होती और हमारे नेता और डरपोक हो गए होते। 

मैं यह कल्पना नहीं कर सकता कि तब हमारे नेता हालात बदल देते। इस मामले में मुझे एक पुराना चुटकूला याद आ रहा है। जब लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे तब उनसे मिलने आए एक जापानी प्रतिनिधि मंडल ने उनसे कहा कि अगर आप हमें बिहार सौंप दे तो हम इसको पांच साल में जापान जैसा बना देंगे। जवाब में खैनी खाते हुए लालू ने कहा कि अगर आप अपना जापान हमें सौंप दे तो हम 6 माह में इसे बिहार बना देंगे। मतलब दोनों देशों का एकीकरण तो सिर्फ बर्बादी में हैं। उनका मिलना तो जैसे किसी कैंसर ग्रस्त अंग को स्वस्थ शरीर में लगाना हो। 

हम पढ़ रहे है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध समाप्त कर दिए जाने के बाद लाखों टन पाकिस्तानी टमाटर व आलू के सड़ जाने की समस्या पैदा हो गई है। इसमें नया क्या है। हमारे देश में हर साल टमाटर, आलू व प्याज की फसलें तैयार होने पर इनकी मांग न होने के कारण किसानों को इन्हें सड़को पर फेंक कर बर्बाद होते देखा जा सकता है। विलय के बाद बर्बाद होने वाले किसानों की संख्या और ज्यादा बढ़ जाती। दाऊद इब्राहिम सरीखे आतंकवादी तक किसी-न-किसी सामाजिक समारोह में मुख्य अतिथि बनकर नैतिकता व शांति पर हमें भाषण देते नजर आते। भगवान बचाए ऐसे विलय से।

 

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

Categories