• [WRITTEN BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 06 September, 2019 06:57 AM | Total Read Count 346
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सबको सर्वहारा बनाने में लगी सीटू

देश में अर्थव्यवस्था की ऐसी-तैसी होने के साथ ही लोगों के रोजगार और नौकरियों पर भी प्रश्न चिन्ह लगने लगा है। जहां मारूति कार सरीखे देश की सबसे बड़ी कार कंपनी ने अपने हरियाणा स्थित दो बड़े निर्माण प्लांट दो दिनों के लिए बंद कर दिए हैं, जिसके कारण लोगों की तनख्वाह में कटौती किया जाना तय है तो एशिया की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की सोना गिरवी रख कर कर्ज देने वाली कंपनी मुथूट फाइनेंस कंपनी केरल के श्रम संगठनों के निशाने पर आ गई है। वहां उनकी मनमानी को देखते हुए इस कंपनी ने राज्य की छह सौ में से तीन सौ शाखाओं में 20 अगस्त से काम बंद कर दिया है व वहां काम करने वाले कर्मचारी फिलहाल बिना काम के घर बैठे हैं। 

केरल की वामपंथी दलों की सरकार में शामिल माकपा से जुड़ी कर्मचारी यूनियन का नाम सीटू है। उसने कुछ समय पहले नॉन बैकिंग एंड प्राइवेट फाइनेंस एंप्लाइज एसोसिएशन, एनबीपीएफईए बनाई थी। सरकार से संरक्षण प्राप्त सीटू चाहती है कि उनकी यूनियन में मुथूट फाइनेंस की भी मान्यता हो। पिछले ढाई साल में सीटू ने अपनी मांग को लेकर आठ बार उनके खिलाफ आंदोलन किए। केरल में इस कंपनी के साढ़े 28 सौ कर्मचारियों में से केवल 220 कर्मचारी ही इस यूनियन के साथ जुड़े। पूरे देश में उनके कर्मचारियों की संख्या 35 हजार है। देश भर में उनकी कंपनी की शाखाएं हैं। मगर दिक्कत सिर्फ केरल में ही उठ रही है। कंपनी के मुताबिक राज्य में उनकी दो सौ शाखाएं पिछले तीन सालों से घाटे में चल रही है। इसके बावजूद उन्होंने इनका दूसरी शाखाओं में समावेश कर दिया। न तो उन्हें बंद ही किया और न ही किसी कर्मचारी की छुट्टी की। वह उन्हें इस क्षेत्र में मिलने वाला अच्छा वेतन व दूसरी सुविधाएं दे रही हैं। जबकि सीटू के हस्तक्षेप के बाद से कंपनी का व्यापार खत्म होना शुरू हो गया है। 

पिछले तीन वर्षों में केरल में कंपनी का धंधा 11 फीसदी से घट कर चार फीसदी रह गया है। जबकि केरल के बाहर उनके धंधे में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के मुताबिक सीटू के गुंडे उन्हें काम नहीं करने दे रहे है और आए दिन कर्मचारियों का डरा धमकाकर वहां हड़ताल करवा देते हैं। और उन्हें काम नहीं करने देते हैं।

यहां यह बताना जरूरी हो जाता है कि मुथूट फाइनेंस एक भारतीय वित्तीय कंपनी है। सोना गिरवी रख कर लोगों को कर्ज देने वाली यह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। इसके अलावा यह विदेशी मुद्रा बदलने, पैसा बाहर लाने-ले-जाने के अलावा उसके प्रबंधन और पर्यटन में भी मदद देती है। वह अपनी शाखाओं पर सोने के सिक्के भी बेचती है। उसका मुख्यालय केरल में है व देश में उसकी चार हजार शाखाएं हैं। उसके ब्रिटेन, अमेरिका व संयुक्त अरब अमीरात में भी दफ्तर हैं। वह छोटे व्यापारियों, किसानो, वेतन भोगी लोगों को उनका सोना गिरवी रख कर कर्ज देती है। उसका 1997 में एक प्राइवेट लि. कंपनी के रूप में गठन हुआ था व 2008 में वह पब्लिक लि. कंपनी बन गई। उसका राजस्व 25 हजार करोड़ रुपए है। इसका प्रबंधन व संचालन मुथूट परिवार करता है। यह बहुत पुरानी कंपनी है जिसकी शुरुआत 1887 में मुथूट मथाई ने की थी। उन्होंने तत्कालीन त्रावणकोर राज्य के एक छोटे से इलाके से अपना गिरवी गांठ का धंधा शुरू किया था। त्रवणकोर को अब केरल कहा जाता है। 

आजकल उनकी तीसरी व चौथी पीढ़ी यह काम संभाल रही है। उनके बेटे एम जार्ज मुथूट ने 1939 में अपनी चिटफंड कंपनी के जरिए वित्तीय लेन-देन का धंधा शुरू किया व कंपनी का नाम मुथूट बैंकर रखा। 2001 में उसका नाम बदल कर मुथूट फाइनेंस कर दिया गया। अब रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों के मुताबिक वह एक गैर बैंकिंग वित्तीय संस्था है जो कि देश की सोना गिरवी रख कर कर्ज देने वाली सबसे बड़ी कंपनी है। उसकी इस क्षेत्र में विश्वसनीयता सबसे ज्यादा है। इस कंपनी ने लोगों के घर में रखे हुए बेकार पड़े सोने के बदले कर्ज देकर उसे व्यवहार में लाए जाने का अनोखा प्रचार किया। 

ऐसा माना जाता है कि भारत में सोना खरीदने व जमा करने के इच्छुक लोगों के पास 20 हजार टन सोना है जो कि दुनिया के किसी देश की भी तुलना में सबसे ज्यादा है। यह कंपनी घर बनाने व अपना वाहन खरीद कर उससे कमाई करने के लिए भी कर्ज दे रही है। इस कंपनी का कामकाज जार्ज एलेक्जेंडर मुथूट आजकल संभाल रहे हैं जो कि सीरियन इसाई हैं। उनको केरल के सबसे प्रभावशाली लोगों में से गिना जाता है। वे वहां के सबसे बड़े व्यापारिक परिवार में आते हैं। मुथूट की सफलता की एक बड़ी वजह, कम पढ़-लिखे आम आदमी हैं जो कि लघु व मध्यम वर्ग से आते हैं, जिनके लिए अपनी छोटी-मोटी जरूरतों जैसे बेटी की शादी, बीमारी, काम धंधा शुरू करने के लिए बैंक से कर्ज लेना बहुत मुश्किल होता है। वहीं इस कंपनी ने उनके द्वारा गिरवी रखे जाने वाले 18 से 22 कैरेट सोने के जेवर के बाजार मूल्य की तुलना में उन्हें उसकी 75 फीसदी शशि कर्ज में देना शुरू कर दी वह महज एक फीसदी मासिक ब्याज पर। इसके साथ ही उसका जेवर भी सुरक्षित जगह पर रखा जाने लगा। इससे कर्ज लेने वाले व देने वाले दोनों ही सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए। मगर अब केरल में वामपंथी उन्हें चौपट करने पर उतारू हैं। पूरी दुनिया में वामपंथियों का सफाया हो चुका है मगर भारत में वे केरल में अस्तित्व में हैं। हार कर मुथूट के मौजूदा अध्यक्ष जार्ज एलेक्जेंडर कंपनी मुख्यालय के बाहर कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए। क्योंकि हड़ताली सीटू के नेता उन लोगों को अंदर नहीं जाने दे रहे हैं। उन्होंने अपने हाथों में 'राइट टू वर्क' के बैनर थमा रखे हैं। मगर ऐसा लग रहा है कि सीटू इस लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के दौर में सबको सड़क पर लाकर सर्वहारा बनाना चाहती है।

 

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