• [WRITTEN BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 26 August, 2019 06:16 AM | Total Read Count 387
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खय्याम, गौर और जेटली

पिछले कुछ वर्षों के अनुभवो के कारण मैं बहुत ज्यादा भाग्यवादी हो गया हूं। जैसे कि जब बाहर निकलता हूं और पहली ट्रेफिक लाइट लाल मिलती है तो आगे की भी सभी बत्तियो पर रूकना पड़ जाता है। तो कभी सभी लाइटे हरी मिलती है। मैं तो इसे भाग्य से जोड़कर देखता हूं। मेरा मानना है कि पिछले कुछ दिनों से आ रही महान लोगों के निधन की खबरे भी इसी तरह के भाग्यवादी परंपरा का परिणाम है। 

पहले खय्याम का निधन हुआ, फिर मध्यप्रदेश में कांग्रेसी नेता बाबू लाल गौर नहीं रहे और अब अरूण जेटली का स्वर्गवास हो गया। दिल्ली मे पानी की झड़ी भले ही न लगी हो मगर पूरे देश में हो रही मूसलाधार बारिश की तरह चर्चित हस्तियों के दुनिया छोड़कर जाने की मानों झड़ी लगी है। 

महान संगीतकार खय्याम के गीतों का मैं भी देश के तमाम दूसरे लोगों की तरह प्रेमी था। जब यह सिलसिला शुरू हुआ तो मैं सोचने लगा कि कहीं यह सप्ताह अपने कॉलम में लोगों को श्रद्धाजंलि देने में तो नहीं निकल जाएगा। अतः मैंने तय किया कि एक ही कॉलम में सबको याद कर लूं। खय्याम के बारे में तो कुछ कहना तो मानो सूरज को दीपक दिखाना होगा। वे तो मानों फिल्म और संगीत क्षेत्र में अरूण जेटली थे। 

उन्होंने इतने मनमोहक व सुकूनदायक गीत तैयार करे जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। एक मुसलमान होने के बावजूद उन्होंने एक हिंदू गायिका से शादी की जो कि सुरैया सरीखी गायिकाओं के स्तर की थी। वे अपनी करोड़ो रुपए की संपत्ति एक ट्रस्ट को दान में दे गए हैं जो कि फिल्म क्षेत्र से जुड़े युवा व कलाकारों की मदद करेगा। वे लाजवाब थे। 

वहीं बाबू लाल गौर एक विशिष्ट प्रतिभा के धनी थे। वे उत्तर प्रदेश में पैदा हुए और मध्य प्रदेश में सत्ता संभाली। इसकी एक बड़ी वजह यह भी रही होगी कि वे भगवान श्रीकृष्ण के वंशज थे जोकि यादव के घर से मध्य प्रदेश आकर गौर हो गए थे। उनमें अपने पूर्वज के तमाम गुण कूट-कूट कर भरे हुए थे। वे न तो मक्खन खाते थे और न ही बांसुरी बजाते थे मगर उन्हें गोपियो के बीच उठना-बैठना अच्छा लगता था। 

यह बात मुझे खुद मध्य प्रदेश की एक महिला पत्रकार ने बताई कि वे आधुनिक गोपियो के संसर्ग में रहना पसंद करते थे व इस कारण उन्हें लेकर तरह-तरह की किवंदतियो ने जन्म लिया। वे देश के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री कहे जा सकते हैं जोकि अपने ही राज्य में नई सरकार बनने पर उसमें उप मुख्यमंत्री बने। 

जब एक बार मैं दिल्ली में उनसे प्रेस कांफ्रेंस में मिला तो एक पत्रकार ने राज्य में हुए बाल विवाह का जिक्र करते हुए उनसे पूछा कि वहां डेढ़ हजार बाल विवाह कैसे हो गए। इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि आप गलत कह रहे हैं। कुल डेढ़ हजार नहीं 85,000 बाल विवाह हुए थे यह तो एक सामाजिक समस्या है। इसे कानून से थोड़ी निपटा जा सकता है। पत्रकार अवाक रह गया।

अरूण जेटली क्या थे इसका अनुमान तो उन्हें अखबारों और खबरियां चैनलो पर मिलने वाले प्रचार से ही लगाया जा सकता है। वे एक ऐसे अनोखे इंसान थे जिसकी अपने दुश्मन दूसरी पार्टी के नेताओं से भी दोस्त हैं व जिसकी अपनी पार्टी के बड़े से बड़े नेता उनसे टकराव लने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। 

एक बार जब भाजपा ने सत्ता में आने के पहले लालकृष्ण आडवाणी के घर पर काले धन पर जमा रिपोर्ट जारी की तो एक दक्षिण भारतीय ने विशेषकार कुछ ज्यादा ही विस्तार से इस बारे में बताकर वहां मौजूद पत्रकारो को बोर करने लगे। नेता भी ऊंबने लगे। अतः मैंने उनको चुप कराने के लिए अचानक जोर से तालियां बजा दी। मेरी देखा-देखी सब तालियां बजाने लगे और वह नेता चुप हो गया। 

बाद में जब हम लोग प्रेस कांफ्रेंस के बाद चाय पी रहे थे तो एक बड़े नेता का फोन आया। उसने मुझसे कहा कि आज तो तुमने सबको बोर होने से बचा लिया। बाद में मेरे आग्रह पर उन्होंने बताया कि यह खबर उन्हें प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद अरूण जेटली ने दी थी। उनका भाजपा मुख्यालय के साथ अशोक रोड पर स्थित घर पत्रकारो का मक्का था जहां वे लोग प्रेस कांफ्रेंस के बाद उनसे घटनाओं व राजनीति को समझने के लिए जाते थे। 

उन्होंने अपना सरकारी आवास पार्टी के बुजुर्ग नेताओं को रहने के लिए दे दिया था जिसे भाजपा की घुड़साल कहा जाता था। जब सुषमा स्वराज के ललित मोदी से संबंधों को लेकर हंगामा हुआ व पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष नितीन गडकरी के व्यवसायिक ठिकानों पर छापे पड़े तब भी इनके पीछे उनका हाथ होने की अफवाहे उड़ी थी मगर इन दोनों में से किसी भी नेता ने कभी इस और इशारा तक नहीं किया। 

वे अच्छे खाने के साथ-साथ अच्छी घड़ी, अच्छे कपड़ो, अच्छी शाल आदि के शौकीन थे व अक्सर पत्रकारो को उन्हें दिखा कर बताते थे वह उन्होंने किस देश में कहां से कितने में खरीदी थी। लक्ष्मी व भाग्य दोनों ही उन पर मेहरबान थे। पत्रकार उन्हें मुंह फाड़े सुनते रहते थे। उन्होंने जीवन में महज एक बार चुनाव लड़ा जोकि अमृतसर का लोकसभा चुनाव था। उसमें वे हार गए मगर उनका कद तो प्रधानमंत्री के बराबर हो चुका था।

अरूण जेटली यारो के यार थे। उन्होंने नरेंद्र मोदी के गुजराज का मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें अपने चैनल पर जी भर के गरियाने वाले पत्रकार का ह्दय परिवर्तन होने के बाद उसके द्वारा नरेंद्र मोदी की चाटुकारिता में लिखी पुस्तक का कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम के साथ लोकार्पण भी किया। उन्होंने एक चंपू बुलडॉग अंग्रेजी के एंकर को तो चैनल का मालिक ही बना दिया व उनके इशारे पर वह मोदी व सरकार के सामने दुम हिलाने लगा। मुझे उनके जीवन का सबसे अच्छा काम बड़बोले अरविंद केजरीवाल से मानहानि के मुकदमे में अदालत में माफी मंगवाना लगता है।

 

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