• [WRITTEN BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 03 September, 2019 06:44 AM | Total Read Count 369
  • Tweet
कंचन चौधरी व किरण बेदी और भाग्य

इस धरती पर बहुत कम लोग ही ऐसे होते है जोकि इतनी जबरदस्त दृढ़ इच्छाशक्ति के मालिक होते हैं कि जो करने की ठान लेते हैँ उसे हासिल भी कर लेते हैं। मगर मेरा मानना है कि इसमें उनकी किस्मत का भी बहुत बड़ा हाथ होता है। मेरा अपना मानना व अनुभव यही है कि आप चाहे कुछ भी कर लें आपको जो हासिल होता है उसमें आपकी किस्मत का बहुत ज्यादा योगदान होता है। 

ऐसा ही एक उदाहरण कंचन चौधरी का है। उनका हाल ही में निधन हुआ। वे देश की एकमात्र ऐसी महिला आईपीएस थी जोकि पुलिस महानिदेशक तक बनी। हालांकि हम जब भी किसी महिला आईपीएस के बारे में सोचते हैं तो हमारे मन में किरण बेदी की तस्वीर घूम जाती है। उनका उदाहरण यह साबित करता है कि भाग्य इंसान की जिदंगी में कैसे-कैसे खेल करता है। 

एक समय था जबकि वे पूरे देश में चर्चित हो रही थी। उन्होंने जब दिल्ली पुलिस में ट्रेफिक का जिम्मा संभाला तो बड़े-बड़े नेताओं की गलत तरीके से पार्क की हुई गाड़ी को कनाट प्लेस से उठवा लेने के कारण क्रेन बेदी के नाम से मशहूर हुई। वह इतनी चर्चित हुई कि तब दूरदर्शन के सालाना कार्यक्रम में उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया जाने लगा था। 

तब देश में दूरदर्शन ही हुआ करता था व 31 दिसंबर को उस पर विशेष मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किया जाता था। तब किसी सरकारी अफसर का ऐसे किसी कार्यक्रम में जाना बहुत बड़ी बात होती थी। तब इस चर्चा ने जोर पकड़ा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उन्हें मिलने वाले इस बेइंतहा प्रचार से खुश नहीं थी। समय ने पलटा खाया और तमाम अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार जीतने के बाद भी वे पुलिस महानिदेशक नहीं बन पाई। जिस नाम से बड़े-बड़े लोग कांपते थे। उस महिला ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में काम करने के दौरान 10x10 फुट के कमरे वाले दफ्तर में गुमनामी के दिन बिताए। 

उस दौरान जब मैं उनसे मिला तो उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आप चाय पिएंगे। मैं शुरू से ही चाय प्रिय हूं। अतः मेरे हां कहते ही उन्होंने चपरासी को बुलाने के लिए घंटी का बटन दबाया। कुछ देर बाद आए चपरासी ने उनसे पूछा कि मैं जरूरी काम कर रहा था। आपका कुछ खास काम है क्या? उसका व्यवहार बता रहा था कि अपने अफसर के प्रति उसके मन में कितनी इज्जत थी। उन्होंने अपने पर्स से 10 रुपए का नोट निकालते हुए कहा कि मेरे परिचित पत्रकार आए हैं। आप तीन चाय ले आइए। एक अपने लिए और दो हमारे लिए। 

उस घटना से मैं समझ गया कि वक्त ने उन्हें खुड्डे लाइन लगा दिया है। समय का फेर देखिए कि वे न तो पुलिस महानिदेशक ही बन पाई और न ही दिल्ली की पुलिस आयुक्त। फिर वे अन्ना के साथ चली गई और जब वे रामलीला मैदान में धरने पर बैठे तो मंच पर झंडा लहराते नजर आई। बाद में उनका बाकी नेताओं की तरह ही आप पार्टी से मोहभंग हो गया और उन्होंने उसे छोड़ दिया। 

भाग्य का खेल देखिए कि राजनीति के पुरोधा माने जाने वाले अरुण जेटली ने उन्हें दिल्ली विधानसभा के चुनाव में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया और उनके पुलिसिया अंदाज के कारण पार्टी नेता व कार्यकर्ता उनसे बिदके और दिल्ली से भाजपा का ऐसा सूपड़ा साफ हुआ कि 2014 में मोदी लहर के बावजूद वह सत्ता से बाहर रही। कुछ दिनों वह घर बैठी और फिर भाग्य के जोर मारने पर पुडेचेरी की उपराज्यपाल बना दी गई। अब वहां के महानिदेशक उन्हें सलाम ठोक रही है।

दूसरा मामला कंचन चौधरी भट्टाचार्य का है जोकि हिमचाल प्रदेश में पैदा हुई व किरण बेदी के आईपीएस बनने के अगले साल चुनी गई। मगर वे अंततः उत्तराखंड की पुलिस महानिदेशक के पद से रिटायर हुई। वे सीबीआई में भी रही और उन्होंने इस दौरान बहुचर्चित सैयद मोदी हत्याकांड रिलायंस-बॉम्बे डाइंग मामले की जांच की। बताते है कि वे एक संकल्प के तहत आईपीएस बनी थी। 

वे एक साधारण घर में पैदा हुई थी व उनके पिता की संपत्ति पर कुछ दबंगों ने कब्जा कर लिया था। जब वे पुलिस के पास गई तो उसने आदतन कुछ नहीं किया और उन्होंने लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए यहां आने का प्रण कर लिया। उनसे प्रेरित होकर उन पर दूरदर्शन ने 1987-91 के बीच उड़ान नामक धारावाहिक बनाया जिनमें उनके प्रयास व संघर्षों का जिक्र था। इसमें उनकी भूमिका उनकी छोटी बहन कविता चौधरी ने अदा की थी व इसे बेहद पसंद किया गया। 

वे भाग्यशाली थी इसलिए महानिदेशक पद तक पहुंची व इसे महिला सशक्तिकरण का उदाहरण माना गया। उन्होंने 2014 में हरिद्वार से आप पार्टी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा और हार गई। हाल ही में उनका निधन हो गया और उन्होंने किस्मत के उदाहरण को सत्य साबित कर दिया।

 

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

Categories