• [EDITED BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 25 June, 2019 06:56 AM | Total Read Count 325
  • Tweet
आईएसआईः पाक के आतंकवाद का डीएनए

बहुत पुरानी कहावत रही है कि पाकिस्तान को तीन 'अ' अल्लाह, अमेरिका व आर्मी चलाते हैं। यह तीनों ही उसका मूल भविष्य तय करते हैं। पाकिस्तान की आजादी के 72 सालों में से आधे से ज्यादा समय तक वहां सेना सत्ता में रही। वहां सेना ही उसकी सामरिक व विदेश नीति तय करती है व सेना से टकराव लेकर कोई भी सरकार सत्ता में बनी नहीं रह सकती है। 

अब जब जनरल फैज हमीद ने पाकिस्तानी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस याकि आईएसआई नामक खुफिया एजेंसी के निदेशक का पद संभाला है तो हर भारतीय के मन में यह सवाल पैदा होना स्वाभाविक है कि उनका इस पद पर आना हमारे लिए कैसा रहेगा? उनके सत्ता में आने के बाद भारत मे आतंकवादी संगठनों की गतिविध्यिों में तेजी आएगी या नहीं?

आईएसआई वहां की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी है जोकि सेना के तहत काम करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आंकड़े व सूचनाएं एकत्र कर उनके आधार पर अपनी कार्रवाई करते हैं। उनका शुरू से ध्येय भारत विरोधी कार्रवाई करना रहा है। यह एजेंसी पाक सेना व सरकार को अहम सुरक्षा संबंधी जानकारियां उपलब्ध करवाती है। पाकिस्तान की सेना के तीन अंग जल, थल व वायु सेना में से किसी एक सेना का आला अफसर इसका प्रमुख होता है जोकि सेनाध्यक्ष का बेहद विश्वासपात्र होता है। 

इस कुख्यात जासूसी एजेंसी का 1948 में भारत-पाक में पाकिस्तानी सेनाओं की कमियां सामने आने व जल व वायुसेना इंटेलीजेंस ब्यूरो व मिलिटरी इंटेलीजेंसी के बीच कई समन्वय न होने का खुलासा होने के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन सेना के उपाध्यक्ष डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल राबर्ट काथोम ने गठन किया था। उन्होंने सेना के आला अफसरो डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ कर्नल शाहिद हमीद को इसका प्रमुख बनाया था व यह एजेंसी एनडब्ल्यूएफपी व कश्मीर में खासतौर से गोपनीय सूचनाएं एकत्र करती थी। 

सन् 1958 में सरकार का ताख्ता पलटने के बाद देश की सभी गुप्तचर एजेंसियों को राष्ट्रपति व मार्शल लॉ प्रशासन के अधीन कर दिया गया। अयूब खान के शासन के दौरान इसे और अहमियत व मजबूती मिली। सरकार की किसी तरह की आलोचना को देश विरोधी माना गया। जब पाक सेना प्रमुख जनरल जिया उल हक ने 5 जुलाई 1977 को सत्ता हथियाई तो आईएसआई ने पाकिस्तान कम्यूनिस्ट पार्टी व पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को खासतौर पर अपना निशाना बनाया। जबकि 1980 के सोवियत अफगान युद्ध के दौरान इसे अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर कुख्यात होने का मौका मिला। 

इस युद्ध के लिए आईएसआई से ब्रिगेडियर मोहम्मद युसुफ के तहत एसएस डायरेक्टरेट बनाया गया जोकि युद्ध की सारी कार्रवाई खुद देखता था। सोवियत सेनाओं के खिलाफ अपनी गतिविधियां तेज करने के लिए आईएसआई के अफसरो को अमेरिका में सीआईए ने प्रशिक्षण दिया। इसके लिए अफगान मुजाहीद्दीन का इस्तेमाल किया गया। सितंबर 2001 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने आईएसआई में अपने अफसर भरकर भारत के आतंकवादी संगठनों को मदद देनी शुरू कर दी। 

उनके कार्यकाल के दौरान आईएसआई ने बोस्निया, चीनी व फिलीफीन समेत मध्य एशिया के मुस्लिम आतंकवादी संगठनों को मजबूत करना शुरू कर किया। आईएसआई का महानिदेशक  तीन सितारो वाला सेना का लेफ्टीनेट जनरल स्तर का अधिकारी होता है। आंकड़ो के मुताबिक इसके कर्मचारियों के लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी व सबसे कुख्यात गुप्तचर एजेंसी है।

भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक देश में नक्सली आतंकवाद को पनपाने में इस एजेंसी की अहम भूमिका रही है। देश के दूर-दराज हिस्सो में जहां आईएसआई का अपना नेटवर्क नहीं है वहां नक्सली आतंकवादियों के जरिए आधारभूत ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अमेरिका में निक्सन प्रशासन के दौरान राष्ट्रपति निक्सन की पहल पर सीआईए व आईएसआई ने मिलकर पंजाब में खालिस्तान आंदोलन को बढावा दिया। पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक ने 1988 में इसी एजेंसी की मदद से कश्मीर में आपरेशन टोपैक शुरू करके वहां के आतंकवादियों की मदद की थी। 

पाकिस्तान की यह एजेंसी वहा समानांतर सरकार चलाती है। बेनजीर भुट्टो को मारने व उनकी हत्या में इसी एजेंसी का हाथ माना जाता है। वहां के चुनावों में भी उसका दखल रहता आया है व मौजूदा प्रधानमंत्री को उसका समर्थन हासिल है। इसके बावजूद वह ओसमा बिन लादेन की अमेरिका द्वारा हत्या को रोक नहीं पाई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा भारत से मित्रता के पत्र को लेकर हम व हमारे चैनल भले ही उनका कितना ही मजाक क्यों न उड़ाए मगर पाकिस्तान में सेना ने आईएसआई महानिदेशक आसिम मुनार को नियुक्ति के महज आठ महीनो में ही उनके पद से हटाकर कट्टरपंथी ले़ जनरल फैज हामिद को नियुक्त करके इशारा कर दिया है कि उनका भारत के प्रति कैसा रवैया रहेगा। 

इससे पाक में मुल्ला-मिलिट्ररी गठबंधन को और मजबूती मिलेगी। पड़ोसी देश में किसकी सरकार बनेगी व सत्ता में आने वाली सरकार कैसे काम करेगी यह सब सेना ही तय करती हे। अतः आईएसआई का महानिदेशक बदलने का सीधे मतलब यह है कि सेना मौजूदा प्रमुख की भारत विरोधी हरकतों से खुश नहीं थी जिन्होंने पुलवामा सरीखी घटनाओं को अंजाम दिलवाया। दरअसल यह एजेंसी आतंकवाद का वहां के डीएनए से ही है।

 

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

Categories