• [WRITTEN BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 11 September, 2019 07:02 AM | Total Read Count 61
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कश्मीर में पाक का क्या लेना-देना?

अजित कुमार

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल पिछले दिनों देशी-विदेशी पत्रकारों से मिले। उनको कश्मीर के हालात के बारे में बताया। इस दौरान उन्होंने एक हैरान करने वाली बात कही। डोवाल ने कहा कि कश्मीर में लगी पाबंदियां कब तक हटेंगी, वहां सामान्य जनजीवन कब तक बहाल होगा, कब तक सुरक्षा बलों की तैनाती रहेगी, जैसे मामले इस बात पर निर्भर करेंगे कि पाकिस्तान का कैसा बरताव रहता है। उन्होंने कश्मीर के हालात को सीधे तौर पर पाकिस्तान के बरताव से जोड़ दिया। 

उन्होंने कहा नहीं पर कहने का आशय यह था कि अगर पाकिस्तान अस्थिरता फैलाने का प्रयास करता है तो कश्मीर के हालात जस के तस रहने हैं।  सवाल है कि जब कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और उसका विशेष दर्जा खत्म करना भी पूरी तरह से भारत का आंतरिक और एक संप्रभु सरकार का फैसला है तो फिर उसे पाकिस्तान के बरताव के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है? 

डोवाल का बयान हैरान करने वाला इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने जब कश्मीर के हालात को पाकिस्तान के साथ जोड़ा उसी समय यह भी कहा कि कश्मीर के ज्यादातर लोग अनुच्छेद 370 को खत्म करने के फैसले से खुश हैं और फैसले के साथ हैं। अब ये दोनों बातें आपस में एक दूसरे की विरोधाभासी हैं। 

अगर जम्मू कश्मीर के 90 फीसदी या ज्यादातर लोग सरकार के फैसले के साथ हैं तो तो सरकार को पाबंदियां लगाने और कर्फ्यू जैसे हालात बनाने की जरूरत नहीं है। अगर सचमुच लोग सरकार के साथ हैं और खुश हैं तो कश्मीर के हालात को पाकिस्तान के बरताव के साथ जोड़ने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि जब लोग भारत के साथ हैं तो वे पाकिस्तान के साथ नहीं हो सकते हैं। असली चीज तो कश्मीर के लोगों का भरोसा ही है और अगर वह भारत सरकार के साथ है तो फिर क्या दिक्कत है? पर डोवाल के बयानों से ऐसा लग रहा है कि मामला इतना सरल नहीं है। 

ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने देशी-विदेशी मीडिया के साथ बातचीत में आधा सच बताया या तस्वीर का आधा हिस्सा दिखाया। उनकी एक बात सही है और दूसरी हो सकता है कि आंशिक रूप से सही हो। उन्होंने जब कहा कि जम्मू कश्मीर में भारत सरकार का अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान का बरताव कैसा होता है तो वे पूरी तरह से सही बात बयान कर रहे थे। पर जब उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के ज्यादातर लोग अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले के साथ हैं तो वह एक आंशिक सच था और एक प्रचार का, एजेंडा सेटिंग का हिस्सा था। 

ध्यान रहे केंद्र सरकार बड़े पैमाने पर इस बात का प्रचार कर रही है कि जम्मू कश्मीर में सब कुछ सामान्य है और वहां के लोग सरकार के फैसले से खुश हैं। डोवाल ने तो मीडिया में यह बात कही ही केंद्र सरकार के सौ दिन पूरे होने के मौके पर केंद्रीय मंत्रियों ने जहां जहां प्रेस कांफ्रेंस किए वहां यह बात दोहराई। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने उत्तराखंड में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जम्मू कश्मीर में लोग खुश हैं और सरकार के साथ हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि यह कूटनीति और पाकिस्तान के दुष्प्रचार का जवाब है, जो ऐसे ही दिया जा सकता है। पर असलियत यह नहीं है। असलियत यह है कि सरकार को पाकिस्तान के बरताव को लेकर बड़ी चिंता है। सरकार इस बात को लेकर आशंकित है कि पाकिस्तान चुप नहीं बैठने वाला है।

अजित डोवाल ने मीडिया से बात करते हुए कई किस्म के खतरे बताए। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवादियों के लांच पैड फिर से तैयार हो गए हैं। ध्यान रहे भारतीय फौज के दो बार की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आतंकियों के लांच पैड या तो नष्ट हो गए थे या आतंकी संगठनों ने खुद ही उन्हें बंद कर दिया था। पर अब अगर वे फिर से सक्रिय हो गए हैं तो यह निश्चित रूप से चिंता की बात है। 

फिर डोवाल ने यह भी बताया कि 230 के करीब आतंकवादी सीमा पार पूरी तरह से तैयार होकर बैठे हैं और घुसपैठ करने की फिराक में हैं। यह भी चिंता की बात है। इससे जाहिर होता है कि पाकिस्तान चुप नहीं बैठा है। पाकिस्तान की फौज और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई अस्थिरता और हिंसा फैलाने की योजना बना रहे हैं। भारत को इसका अंदाजा है इसलिए कश्मीर में हालात जैसे हैं वैसे ही रहने हैं। 

इसमें कोई संदेह नहीं है कि पाकिस्तान हिंसा फैलाना चाहता है। इसमें भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि उसके निशाने पर कश्मीर के बाहर का इलाका भी है। तभी गुजरात के कच्छ में संदिग्ध नौकाएं मिली हैं और पुख्ता खुफिया सूचना के आधार पर सेना ने दक्षिण भारत में आतंकी हमले का अलर्ट जारी किया है। इसलिए सरकार का तैयार रहना और कश्मीर में पाबंदियों का लागू रहना समझ में आता है। 

कश्मीर के हालात को सीधे तौर पर पाकिस्तान के साथ जोड़ना कूटनीतिक रूप से गलत भी हो सकता है। पाकिस्तान इसका मुद्दा बना सकता है। कश्मीर के लोग भारत के नागरिक हैं। जब कहा जा रहा है कि वे सरकार के कदम से खुश हैं और सरकार के साथ हैं तो उन पर भरोसा न करके पाकिस्तान के नाम पर कश्मीर की मौजूदा स्थिति को न्यायसंगत ठहराना लंबे समय की राजनीति नहीं हो सकती है।

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