• [EDITED BY : Ajit Dwivedi] PUBLISH DATE: ; 25 June, 2019 06:45 AM | Total Read Count 157
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पर दुनिया अमेरिका जैसे सोचेगी!

अमेरिका हर साल दुनिया भर के देशों की धार्मिक स्वतंत्रता पर एक रिपोर्ट तैयार करता है। ऐसी ही रिपोर्ट वह मानवाधिकारों की स्थिति पर भी तैयार करता है। पिछले साल यानी 2018 की धार्मिक स्वतंत्रता की रिपोर्ट तैयार हुई है उसमें कहा गया है कि भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति ठीक नहीं है। इसमें कहा गया है कि गौरक्षा के नाम पर बहुसंख्यकों ने उन्हें निशाना बनाया। भारत सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा दोनों इस रिपोर्ट से बहुत भड़के हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रेस कांफ्रेंस करके इसे खारिज किया है। भारत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका किस हैसियत से भारत के बारे में ऐसी बातें कर रहा है? 

सवाल है क्या अमेरिका की रिपोर्ट खारिज करके और उसकी हैसियत पर सवाल उठा देने से यह मामला समाप्त हो जाएगा या हकीकत बदल जाएगी? अमेरिकी रिपोर्ट खारिज करने से पहले यह सोचें कि क्या अमेरिका से भारत की कोई दुश्मनी है? कोई दुश्मनी नहीं है। उलटे अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावे पर भरोसा करें तो अमेरिका क्या सारी दुनिया अब भारत का सम्मान करने लगी है। अमेरिका के पिछले राष्ट्रपति के साथ तो मोदी के तू तड़ाक में बात करने वाले संबंध थे। अमेरिका का मौजूदा निजाम तो वैसे ही उस विचारधारा का समर्थक है, जिसका समर्थन भाजपा करती है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपने देश को महान बनाने में लगे हैं तो नरेंद्र मोदी भी भारत को विश्व गुरू बनाने में लगे हैं। ऐसे में अगर अमेरिकी रिपोर्ट भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है तो सबसे पहले सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी को ही यह सोचते हुए विचार करना चाहिए कि उसके एक मित्र देश और मित्र राष्ट्रपति की सरकार ने ऐसी रिपोर्ट कैसे बनाई? 

अमेरिकी रिपोर्ट छोड़ भी दें तो क्या हर दिन होने वाली छिटपुट घटनाओं से ऐसा नहीं लग रहा है कि समाज के एक बड़े वर्ग की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है? दो दिन पहले रविवार को झारखंड में एक चोर को पीट पीट कर मार डालने की खबर आई है। अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले उस कथित चोर को पीटते समय लोगों ने उससे जय श्री राम के नारे लगवाए। यह क्या धार्मिक सहिष्णुता की मिसाल है? 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से बाद ऐसी घटनाएं देश के हर हिस्से में हुई हैं। बेगूसराय में एक फेरीवाले से उसका नाम पूछ कर उसे यह कहते हुए गोली मारी गई कि तुमको तो पाकिस्तान में होना चाहिए। दिल्ली से सटे गुड़गांव में युवकों के एक समूह ने नमाजी टोपी लगाए एक व्यक्ति के साथ मारपीट की और उसे जय श्री राम का नारा लगाने के लिए मजबूर किया। 

अमेरिका की रिपोर्ट में गौरक्षा के नाम पर देश के अलग अलग हिस्सों में हुई घटनाओं का जिक्र किया गया है। अखलाक से लेकर पहलू खान तक अनगिनत मिसालें हैं, जिनके बारे में जानने के लिए अमेरिकी रिपोर्ट देखने की जरूरत नहीं है। हरियाणा से लेकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड तक भीड़ द्वारा लोगों को पीट पीट कर मार डालने की घटनाएं सब जानते हैं। 

सही है कि भारत बुनियादी रूप से सहिष्णु देश है। ऐसी धार्मिक सहिष्णुता का इतिहास दुनिया के किसी और देश का नहीं रहा है। यह भी सही है कि भारत का संविधान हर नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार की रक्षा की गारंटी देता है। धार्मिक सहिष्णुता के लंबे इतिहास और संविधान से मिले अधिकारों की रक्षा करना सरकार का दायित्व है। अमेरिका की रिपोर्ट का सिर्फ इतना सबक है कि इसे गंभीरता से लिया जाए और स्थिति ठीक करने का प्रयास हो। 

 

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