• [WRITTEN BY : Devdutt Dubey] PUBLISH DATE: ; 13 August, 2019 01:03 PM | Total Read Count 127
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नियुक्तियों से पैना पन लाएगी सरकार

देवदत्त दुबे

प्रदेश में 15 वर्षों के बाद लौटी कांग्रेस सरकार न केवल अपना सकारात्मक संदेश बनाना चाहती है वरन निगम-मंडलों से लेकर एल्डरमैन की नियुक्तियां करके कार्यकर्ताओं, नेताओं में ऐसा उत्साह लाना चाहती है जोकि भाजपा का हर मोर्चे पर मुकाबला कर सके।

दरअसल लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस पार्टी प्रदेश में सत्ता में लौटी है इस कारण जो नेता विधायक और मंत्री बन गए वह तो सत्ता का सुख महसूस कर पा रहे हैं लेकिन जो कार्यकर्ता और नेता 15 वर्षों तक भाजपा सरकार के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं उनमें से अधिकांश अभी भी प्रदेश में अपनी सरकार होने का एहसास नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि न तो निगम मंडलों में नियुक्ति हुई हैं और ना ही नगर निगमों एल्डरमैन ही अब तक नियुक्त हो पाए है। यही कारण है कि एक के बाद एक कमलनाथ सरकार निर्णय ले रही है लेकिन उसकी माउथ पब्लिसिटी नहीं हो पा रही है क्योंकि कार्यकर्ताओं-नेताओं में उत्साह नहीं  है। यही कारण है कि झाबुआ उपचुनाव में जाने के पहले पार्टी में जहां विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासियों को सौगातें दी हैं। इसके पहले पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण दे चुकी है। वहीं अब नेताओं कार्यकर्ताओं को उपकृत करने का सिलसिला शुरू हो रहा है जिसमें सूची लगभग तैयार हो चुकी हैं। क्षत्रप नेताओं की सहमति होना बाकी है।

नेताओं की आपसी खींचतान के कारण ही यह नियुक्ति हैं। अब अब तक टाली जाती रही हैं लेकिन अब और ज्यादा दिन टालना संभव नहीं है। राष्ट्रीय नेतृत्व को लेकर भी बादल छट गए हैं। फिलहाल सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बन गई हैं और संभावना जताई जा रही है कि अति शीघ्र ही प्रदेश अध्यक्ष का चयन भी हो जाएगा और उसके बाद धड़ाधड़ नीतियों का दौर शुरू होगा।

बहरहाल, प्रदेश में संभावित नियुक्तियों को लेकर नेताओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं क्योंकि एक अनार सौ बीमार की स्थिति है। लंबे अरसे बाद मिले मौके को कोई भी यूं ही गवाना नहीं चाह रहा है और सभी अपने अपने माध्यम से अपने-अपने आका नेताओं से अपनी-अपनी सिफारिशें लगाने में जुटे हुए हैं। महिला नेत्री जहां महिला बाल विकास में पद पाने के लिए जोड़-तोड़ कर रही हैं। वहीं अधिकांश नेताओं की नजर में पर्यटन और खनिज जैसे निगम मंडल है जिनमें भी अपनी नियुक्ति चाहते हैं। हांलाकि योजना उपाध्यक्ष से लेकर और भी कई ऐसे पद हैं जिन पर वरिष्ठ नेताओं की निगाहें हैं। पार्टी ने कुछ गाइडलाइन ने तय की हैं जिसमें भाजपा से आए नेताओं से तो परहेज किया ही जाना है। उन नेताओं से परहेज किया जाएगा जो कांग्रेस में रहकर भाजपा सरकार में सांठगांठ करते रहे है। ऐसे नेताओं को जरूर मौका मिलेगा जो कि विधानसभा और लोकसभा में टिकट के मजबूत दावेदार थे लेकिन ऐन वक्त पर उनका टिकट काटा गया इसके बावजूद उन्होंने पार्टी के लिए काम किया है। वैसे तो पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की एक लंबी सूची है जिन्हें यदि उपकृत किया गया तो नेताओं को कम ही मौका मिल पाएगा। यही कारण है कि पार्टी के नेता आपस में लगातार चर्चा करके ऐसे नामों को छांट रहे हैं जिन्हें इस बार मौका देना जरूरी है जो टिकट लेकर उपकृत हो चुके हैं उन पर कम ही विचार किया जाएगा।

कुल मिलाकर सत्ता और संगठन में तालमेल बनाने के साथ-साथ आक्रमक नेतृत्व तैयार करने के लिए सरकार द्वारा नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हो रहा है और ऐसे ऊर्जावान नेतृत्व की तलाश की जा रही है जो नियुक्तियों का सदुपयोग करके सरकार और संगठन की धार पैनी कर सके और भाजपा के खिलाफ पार्टी की मजबूत जमावट करने में सफल हो सके।

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