• [EDITED BY : Devdutt Dubey] PUBLISH DATE: ; 15 July, 2019 02:04 PM | Total Read Count 286
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कांग्रेस के संकटमोचक कमलनाथ की मध्यप्रदेश में किलाबंदी

देवदत्त दुबेः देश में कांग्रेस पार्टी पर जब-जब संकट आता है तब कमलनाथ संकटमोचक की भूमिका होते हैं। इसी भूमिका में इस समय कर्नाटक में गोवा पर भी नजर है और मध्यप्रदेश में मजबूत किलाबंदी किए हुए हैं। 10 दिन के अंदर दूसरी बार 17 जुलाई को विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री निवास पर बुलाई गई है जिसमें बसपा, सपा और निर्दलीय विधायक भी उपस्थित रहेंगे। दरअसल राजनीतिक दलों में अलग-अलग क्षेत्र में माहिर नेता होते हैं। कोई अच्छा वक्ता होता है तो कोई अच्छा मैनेजमेंट वाला होता है।

कांग्रेस पार्टी में कमलनाथ मैनेजमेंट के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। 9 बार लोकसभा का चुनाव जीतने वाले कमलनाथ केंद्र में बरसों मंत्री भी रहे। इस दौरान लोकसभा के अंदर फ्लोर मैनेजमेंट का काम बखूबी निभाते रहे और पार्टी को जब-जब जहां-जहां विपरीत परिस्थितियां दिखीं वहां-वहां उन्होंने कमलनाथ को जरूर भेजा। जैसा कि इस समय भी कर्नाटक में आए संकट को दूर करने के लिए सक्रिय हैं।

यही नहीं, गोवा पर भी उनकी नजर है और वहां के नेताओं के संपर्क में भी हैं। ऐसे अनुभवी नेता को मध्यप्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा लगातार सरकार गिराने की धमकी देती रहती है लेकिन कमलनाथ बेफिक्र हैं। मध्यप्रदेश में मजबूत किलाबंदी कर चुके हैं। यहां तक कि कभी कांग्रेस के विधायक रहे नेता जो इस समय भाजपा में हैं वे कभी भी कमलनाथ के साथ आ सकते हैं।

बसपा, सपा और निर्दलीय विधायक बातें कितनी भी करें लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ सबको साधे हुए हैं। यहां तक कि भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व फिलहाल कमलनाथ सरकार को डिस्टर्ब करने के मूड में नहीं है। बहरहाल मध्यप्रदेश में विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है जिसमें सामान्य बजट पर चर्चा हो चुकी है। अब अनुदान कटौती प्रस्ताव पेश किए जाएंगे और इस दौरान भाजपा द्वारा मत विभाजन की स्थिति पैदा की जा सकती है जिसके लिए कमलनाथ ने मजबूत किलाबंदी शुरू कर दी है।

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 10 दिन के अंदर विधायक दल की बैठक दूसरी बार 17 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास पर बुलाई गई है जिसमें कांग्रेसी विधायकों के साथ बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों को भी बुलाया गया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक मंत्री को तीन-तीन विधायकों की देखरेख की जिम्मेवारी पहले ही दे रखी है।

मध्यप्रदेश में प्रादेशिक नेता कितना भी कमलनाथ सरकार को लूली-लंगड़ी बताने की कोशिश करें लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व की ऐसी कोई मंशा दिखाई नहीं देती जिसमें वे कमलनाथ सरकार को गिराने की सोच रहे हों। विधानसभा के अंदर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा भले ही कहें कि गोवा-कर्नाटक का मानसून मध्य प्रदेश पहुंच सकता है लेकिन केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते का साफ कहना है कि मध्य प्रदेश में सरकार गिराने की कोई परिस्थिति नहीं है।

कुलस्ते का मानना है कि दलबदल और इस्तीफे का कल्चर साउथ और नार्थ ईस्ट में रहा है जबकि मध्यप्रदेश में ऐसा कोई कल्चर नहीं है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य प्रदेश में कर्नाटक की तरह विधायकों को मैनेज करने वाले ही नहीं हैं। यहां अधिकतम मैनेजमेंट करने वाले नेता मुख्यमंत्री कमलनाथ ही हैं और वे धीरे-धीरे कांग्रेस के अन्य गुटों के विधायकों और मंत्रियों को अपने पाले में कर रहे हैं साथ ही भाजपा के कुछ विधायकों से भी सतत संपर्क बनाए हुए हैं, खासकर वे विधायक जो कभी कांग्रेस में कमलनाथ के समर्थक हुआ करते थे।

कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में जब से कांग्रेस की सरकार बनी है तब से भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान, गोपाल भार्गव, कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्र तोमर और नरोत्तम मिश्रा सरकार को कभी भी गिर जाने वाली सरकार बताते रहे लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के अंदर कमलनाथ आज भी संकटमोचक बने हुए हैं सरकार की मजबूती बनाए रखना उनके लिए कोई कठिन काम नहीं है जिसके लिए वो मजबूत किलाबंदी कर रहे हैं।

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