• [EDITED BY : Ajit Dwivedi] PUBLISH DATE: ; 09 July, 2019 11:54 PM | Total Read Count 189
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कक्षाओं में सीसीटीवी लगाना बुरा नहीं!

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार अपने स्कूलों और यहां तक की कक्षाओं में भी सीसीटीवी लगाने जा रही है। जितनी देर तक कक्षा में पढ़ाई होती रहेगी उतनी देर तक कैमरे चालू रहेंगे और कक्षा में क्या हो रहा है, इसे बच्चों के अभिभावक कहीं से भी अपने स्मार्ट फोन पर देख सकेंगे। यानी कक्षा की सारी गतिविधियों का सीधा प्रसारण होगा और बच्चों के माता-पिता उसे लाइव देख सकेंगे। यह अपनी तरह का अभिनव प्रयोग है। पर जैसा कि हर नए प्रयोग के साथ होता है, इसका भी विरोध हो रहा है। भाजपा तो राजनीतिक कारणों से विरोध कर रही है पर हैरानी की बात है कि तमाम प्रगतिशील किस्म के लोग भी इसके विरोध में उतर आए हैं। 

बच्चों के निजता के अधिकार के नाम पर कक्षाओं में सीसीटीवी लगाने का विरोध किया जा रहा है। इसके अलावा एक बिना सिर पैर का तर्क यह है कि इससे बच्चे हमेशा सावधान या अटेंशन में और अनुशासन में रहेंगे और इससे उनकी रचनात्मकता प्रभावित होगी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बच्चे हों या बड़े सबकी निजता की रक्षा होनी चाहिए। पर सवाल है कि बच्चे जब एक सार्वजनिक जगह पर हैं, तो उनकी निजता सीसीटीवी कैमरे से कैसे प्रभावित होगी? अगर कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरे से निजता प्रभावित होने के तर्क को स्वीकार करें तब तो क्लोज सर्किट टीवी की पूरी अवधारणा को रद्द करना होगा। 

आखिर सीसीटीवी कैमरे तो सार्वजनिक जगहों पर ही लगते हैं। भीड़ भाड़ वाले बाजारों में, पार्क, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन, शैक्षणिक परिसर या सड़कों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं। थिएटर में, मॉल में, अस्पतालों में सब जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं। क्या अस्पताल में सीसीटीवी लगाने का कभी इस आधार पर विरोध हो सकता है कि इससे लोगों की निजता और गोपनीयता प्रभावित हो रही है? आखिर इन सब जगहों की वीडियो फुटेज कहीं न कहीं स्टोर की जा रही है और जिनकी भी पहुंच वहां तक है उसे पता होगा कि कौन सा व्यक्ति कौन सी मूवी देखने गया या किस अस्पताल में इलाज के लिए गया। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि कक्षा में मौजूद बच्चों का लगातार अभिभावक की निगरानी में होना ठीक नहीं है। आखिर बच्चे छह घंटे के स्कूल के बाद तो अभिभावक की लाइव निगरानी में ही होते हैं!

उलटे इसके फायदे  देखने की जरूरत है। बच्चों का क्लास बंक करना यानी स्कूल नहीं जाकर कहीं बाहर घूमना, फिरना कितना कम हो जाएगा। इससे कक्षाओं में उपस्थिति बढ़ेगी। ऊपर से क्लास में होने वाली अनुशासनहीनता बंद होगी। बच्चे ध्यान लगा कर शिक्षक की बात सुनेंगे। और शिक्षक भी अपना सबसे बेहतरीन देने की कोशिश करेंगे क्योंकि उनको पता होगा कि उन्हें कहीं न कहीं देखा जा रहा है। स्कूलों में सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय है। गुड़गांव के स्कूल में पिछले दिनों पांचवीं क्लास के एक बच्चे की हत्या की वीभत्स घटना हुई थी। इसी सोमवार को हरियाणा के एक स्कूल में एक छात्र ने एक शिक्षिका को छुरा मार दिया। स्कूलों और कक्षाओं में लगने वाले सीसीटीवी कैमरे ऐसी घटनाओं को रोकने या कम करने में मददगार होंगे। 

निजता प्रभावित होने की चिंता की तरह ही रचनात्मकता प्रभावित होने की चिंता का भी कोई आधार नहीं है। बच्चों की रचनात्मकता उनकी अनुशासनहीनता में नहीं होती है। वह स्कूल के माहौल, शिक्षक की गुणवत्ता, स्कूल के पाठ्यक्रम व पाठ्यचर्चा, शिक्षोत्तर गतिविधियों की उपलब्धता आदि चीजों पर निर्भर करती है। बच्चे अगर क्लास में एक दूसरे पर कागज के गोले बना कर फेंक रहे हैं, पिछली बेंच पर बैठ कर सीटी बजा रहे हैं या सो जा रहे हैं तो क्या यह कोई रचना कर्म है? और अगर सीसीटीवी कैमरे लगने से यह सब रूक जाता है तो क्या उसे रचनात्मकता में बाधा डालने वाला कहेंगे? कतई नहीं! यह सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए दिल्ली में किए जा रहे प्रयासों का ही एक जरूरी हिस्सा है। 

 

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