• [WRITTEN BY : Ajay Setia] PUBLISH DATE: ; 11 September, 2019 07:05 AM | Total Read Count 301
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पाक के मीडिया में मतभेद

पाकिस्तानी मीडिया में क्या चल रहा है इसे ले कर अपनी उत्सुकता हमेशा से बनी रही है। गाहे-ब-गाहे इंटरनेट पर पाकिस्तानी वेबसाईटों और टीवी चेनलों की डिबेट को खंगालते रहता हूं| जब से भारत ने कश्मीर से 370 और 35ए हटाई है तब से मैं पाकिस्तानी मीडिया में चल रही खबरों को बारीकी से देख रहा हूं। दो दिन पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी ने कहा था कि कश्मीर को ले कर जैसी एकता पाकिस्तान में ह वैसी भारत में नहीं है। लगातार कांग्रेस पार्टी और उस के नेताओं के बयानों को इस्तेमाल कर रहे पाकिस्तान ने पहली बार कश्मीर को ले कर भारत में मतभिन्नता की बात कही है। अपने बयान में शाह महमूद कुरैशी ने संसद में 370 हटाने का विरोध करने वाली कांग्रेस, कम्यूनिस्ट और समाजवादी पार्टी का जिक्र भी किया। 

शाह मोहम्मद कुरैशी का यह बयान सौ फीसदी सही है कि पाकिस्तान के राजनीतिक दलों में कश्मीर को ले कर एकता है। इसकी वजह यह है कि उन्हें पाकिस्तानी सेना की कश्मीर नीति ही स्वीकार करनी होती है| दूसरी तरफ पाकिस्तान के आवाम और वरिष्ठ पत्रकारों में कश्मीर को लेकर उत्साह खत्म होता जा रहा  इसे अपन ने पहली बार पन्द्रह साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अपनी पाकिस्तान यात्रा के समय महसूस किया था। 

जैसे भारतीय टीवी चेनलों पर 370 हटाने के बाद आवाम की प्रतिक्रिया दिखाई गई थी , वैसे ही पाकिस्तानी टीवी चेनलों पर भी आवाम की राय भी दिखाई गई है। जिस में ज्यादातर लोगों का मानना है कि कश्मीर के चक्कर में पाकिस्तान ने अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा सेना पर बर्बाद कर के अपनी माली हालत खराब कर ली है। 

पाकिस्तानी टीवी चेनलों पर शाम को होने वाली बहस में भी कश्मीर पर सरकारी रूख का विरोध किया जा रहा है। अनेक विशेषज्ञों को तो यह कहते भी सुना गया कि अगर पाक अधिकृत कश्मीर पर पाक का पूरा अधिकार है तो भारत को आप कैसे रोक सकते हैं। एक कमेंटेटर ने तो यहाँ तक विश्लेष्ण किया कि 370 और 35 ए संयुक्त राष्ट्र के कश्मीर सम्बन्धी प्रस्ताव के बाद लागू हुए थे इसलिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से इस का कुछ लेना-देना नहीं है। 

संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बाद अगर भारत को जम्मू कश्मीर में विशेष अधिकार देने का हक था , तो उसे वापस लेने का हक भी है। 370 हटाने के पक्ष में इतनी मजबूत दलील तो अमित शाघ ने भी उस समय लोकसभा में नहीं दी थी जब अधीर रंजन ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का सवाल उठाया था।

पाकिस्तान के अनेक विशेषज्ञों ने टीवी चेनलों पर बहस में यहाँ तक कहा कि आज पूरी दुनिया भारत के साथ खडी है क्योंकि भिखारियों के साथ कौन खड़ा होना चाहेगा? एक एंकर ने जब एक राजनीतिक विश्लेषक से कश्मीरी मुसलमानों पर गोली चलाए जाने सम्बन्धी सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अगर आज़ाद कश्मीर ( पीओके ) में कश्मीरी युवक भारत के झंडे लहराएं और नारे लगाएं कि कश्मीर बनेगा भारत का हिस्सा, तो पाकिस्तानी सेना क्या करेगी? लब्बोलुबाब यह कि भावनाओं में बहने की बजाए पाकिस्तान में अब तार्किक आधार पर बातें की जाने लगी हैं। 

दूसरी तरफ अगर हम भारत के तीन राजनीतिक दलों और उन के समर्थकों को छोड़ देंतो भारतीय आवाम पूरी तरह भारत सरकार के साथ खडी है। हाँ, कश्मीरी आवाम को लेकर तब तक आशंका बनी रहेगी  जब तक हालात सामान्य नहीं होते। भारतीय मीडिया में भी 370 हटाने का विरोध करने वालों की तादाद न के बराबर है। राष्ट्रीय भावनाओं के उभार में उन की आवाज धीमी पड चुकी है। हाँ भारतीय मीडिया का एक वर्ग मानवाधिकारों के नाम पर कश्मीर के मुद्दे को अपने दृष्टिकोण से उठा रहा है जिसे ले कर मीडिया में ही मतभेद हैं लेकिन यह पत्रकारीय आज़ादी का मामला है न कि 370 पर मतभेद का मामला|

 

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