• [EDITED BY : Devdutt Dubey] PUBLISH DATE: ; 17 July, 2019 02:13 PM | Total Read Count 133
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गुरु शक्ति का देखेगा सदन में असर

देवदत्त दुबेः वैसे तो सदन संख्या बल के आधार पर चलता है। लोकसभा में सांसद और विधानसभा में विधायक किस दल के पास कितने हैं, इसके आधार पर ही सरकार और विपक्ष की सीटें तय होती हैं लेकिन कई बार शक्ति के दुरुपयोग की भी घटनाएं हुई हैं लेकिन यदि किसी भी व्यक्ति के पास गुरु की शिक्षा का असर यदि होगा तो वह चाहे सदन में रहे, चाहे सड़क पर रहे, चाहे जंगल में रहे, चाहे आसमान में रहे और फिर चाहे पाताल में रहे वह नैतिकता की दायरे में ही कार्य करेगा।

आज से मध्यप्रदेश विधानसभा में कटौती प्रस्ताव पेश किए जाने हैं और जिनमें आशंका है कि कभी भी वोटिंग की डिमांड हो सकती है। ऐसे में विधायकों की संख्या के साथ गुरु पूर्णिमा पर गुरु का आशीर्वाद लेकर लौटे अधिकांश सदस्यों के व्यवहार में शक्ति का असर भी देखने को मिलेगा। दरअसल भारत देश में गुरु का महत्व भगवान से भी बड़ा बताया गया है। गुरु ही है जिसने भगवान से परिचय कराया।

कई ऐसे तपस्वी गुरु हुए हैं जिन्होंने अपने शिष्यों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन किया है लेकिन धीरे-धीरे गुरु-शिष्य परंपरा आस्था से ज्यादा आडंबर में तब्दील होने लगी। सबसे गुरुओं को मानने वालों की संख्या तो बढ़ी है लेकिन गुरु की सीख मानने वालों की संख्या घटी है। कुछ ऐसे भी आए जब गुरु ही दिशा भ्रमित होते देखे गए लेकिन तमाम उतार-चढ़ाव के बाद भी गुरु परंपरा का गौरवशाली इतिहास देश और प्रदेश में आज भी देखा जा रहा है।

यहां तक कि सामान्य जीवन में उद्दंड व्यक्ति भी बीच सड़क पर बीच चौराहे पर गुरु के चरणों में नतमस्तक होते हुए देखे जाते हैं। वर्तमान राजनीति में जिस तरह से गुरु परंपरा को बढ़ाने की होड़  लगी है उससे विधानसभा की 2 दिन की छुट्टी ही रही ताकि तमाम विधायक-मंत्री अपने-अपने गुरु दरबार में हाजिरी लगा सकें और गुरु पूर्णिमा पर गुरु से आशीर्वाद लौटे सदस्यों का आज सदन में असर दिखेगा कि किसके गुरु ने किसको क्या सीख दी और फिर उसे सीख को कितने सदस्यों ने आत्मसात किया।

बहरहाल देश में ऐसे भी गुरु हुए हैं जिनका दखल राज्यों की ही नहीं, केंद्र की सरकार तक में रहा है। ऐसे भी गुरु हैं जो दो विरोधी दलों के नेताओं को एक साथ बिठाते हैं और आगे की राजनीति की दिशा निर्धारित कराते हैं। इस समय जिस तरह का माहौल है उसमें गुरु पूर्णिमा के अवसर पर राजनीतिक चर्चा जरूर हुई होगी। माना जाना चाहिए कि गुरु की शिक्षा का असर आज सदन में देखने को मिल सकता है।

जहां तक सत्ताधारी दल कांग्रेस की बात है तो वह अपनी तैयारी पूरी शिद्दत से कर रही है। आज शाम को विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित की गई है जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में सभी विधायक उपस्थित रहें। विपक्षी दल भाजपा बजट पर चर्चा के दौरान कभी भी मतदान की मांग रख सकती है और यदि भाजपा ना भी रखे तो सरकार ऐसी परिस्थितियां बनाएगी कि जिससे शक्ति परीक्षण हो जाए।

इसके पहले भी विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में सरकार अपना बहुमत मत विभाजन के दौरान सिद्ध कर चुकी है। इसमें विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को 120 वोट मिले थे। मुख्यमंत्री कमलनाथ चाहते हैं कि सदन में यदि शक्ति परीक्षण की स्थिति बनती है तो उसका मजबूती से मुकाबला किया जाए और एक बार और सदन में बहुमत सिद्ध करके भाजपा नेताओं के मुंह बंद कर दिए जाएं जिसमें भी सरकार को कभी लंगड़ी-लूली, बैसाखी वाली तो कभी, कभी भी गिर जाने वाली सरकार कहते हुए थकते नहीं हैं।

विधायक दल की बैठक में इस बात की रणनीति बनाई जाएगी कि ना केवल कांग्रेसी वरन बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों की भी उपस्थिति और एकजुटता भाजपा के सामने दिखनी चाहिए। वहीं विपक्षी दल भाजपा भी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। खासकर पहली बार मंत्री बनने वाले मंत्रियों को उनके विभाग की चर्चा के दौरान घेरने की कोशिश रहेगी और यदि उपस्थिति के मामले में सत्तारूढ़ दल जरा भी चूक करता है तो फिर वोटिंग की डिमांड तुरंत की जाए और इसके लिए जरूरी है कि सभी विधायक पूरे समय सदन में मौजूद रहें। 

कुल मिलाकर 4 दिन की छुट्टियों के बाद आज जब सदन में कार्रवाई शुरू होगी तब गुरु शक्ति से लबरेज अधिकांश सदस्य सदन में अपने बेहतर परफॉरमेंस के लिए तो बेताब होंगे ही, साथ ही गुरु ने गुरु पूर्णिमा पर जो शिक्षा नैतिकता की, ईमानदारी की, कर्मठता की, दयालुता की, कृतज्ञता की दी होगी उसका असर भी सदस्यों में देखने को मिल सकता है।

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