• [EDITED BY : Devdutt Dubey] PUBLISH DATE: ; 10 July, 2019 01:50 PM | Total Read Count 110
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बजट में बाजीगिरी तय करेगी सरकार की दिशा और दशा

देवदत्त दुबेः मध्यप्रदेश विधानसभा में आज सरकार अपने बजट पेश करेगी। एक तरफ वचन पत्र में दिए गए वादे पूरे करना है तो दूसरी ओर खजाना खाली है। ऐसे में बजट में दिखाई गई बाजीगिरी सरकार की आगे की दिशा और दशा तय करेगी। दरअसल आम जनता की बजट के प्रति बहुत जिज्ञासा होती है। बजट से ही आशा और निराशा है, खासकर जब सरकार का खजाना खाली हो तब सरकार आमजन को निराश ना करे यही उसके लिए काफी होता है। जैसा कि कमलनाथ सरकार के वित्त मंत्री तरुण भनोट ने बजट पेश करने के एक दिन पहले मंगलवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा।

उन्होंने कहा कि भले ही केंद्र सरकार के बजट ने लोगों को निराश किया है लेकिन प्रदेश सरकार अपनी जनता को निराश नहीं करेगी। मंत्री के बयान के बाद आम जनता को उम्मीद जागी है कि सरकार कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाएगी लेकिन यह भी दिखाई दे रहा है कि इस सरकार का खजाना खाली है, सरकार कर्ज में डूबी है और उसको वचन पत्र में दिए गए वादों को पूरा करना है जिसके लिए भारी राशि की जरूरत है। ऐसे में सरकार की बाजीगिरी बीच का रास्ता निकाल पाएगी जिसमें प्रदेश की जनता पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाया जाए और वादे भी पूरे कर दिए जाएं।

बहरहाल आज मध्यप्रदेश विधानसभा में कमलनाथ सरकार पहला बजट पेश करेगी। इससे पहले सरकार ने लोकसभा चुनाव के चलते लेखानुदान पेश किया था। बजट को लेकर आम जनता में तमाम प्रकार की जिज्ञासा और आशंका है। खजाना खाली है और वादे बड़े-बड़े हैं। ऐसे में सरकार कैसे संतुलन बनाएगी। यही बाजीगिरी आज देखने लायक होगी। विपक्षी दल भाजपा जिस तरह से किसानों की कर्ज माफी के मुद्दे पर लगातार सरकार को घेर रही है उससे बजट के बाद सदन में और भी गहमागहमी होने की संभावना है।

मंगलवार को शून्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 200000 तक के किसानों के कर्ज करने का वादा कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में किया था लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। अब सिर्फ अल्पकालीन ऋण माफ किए जा रहे हैं। कर्ज माफी के लिए 48 हजार करोड़ की जरूरत है, जबकि सरकार ने सिर्फ 5000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इससे किसान परेशान हो रहा है।

बैंक उन्हें लोन नहीं दे रहा है। वह पुराना कर्ज चुकाने की बात कर रहा है। इसके चलते किसान साहूकारों के चंगुल में फंस रहा है। वह खाद-बीज नहीं खरीद पा रहा है। उन्होंने अध्यक्ष से कहा कि इस मामले में उन्होंने स्थगन की सूचना दी है। लोक महत्व का विषय है इसलिए सभी काम रोककर चर्चा कराई जाए। आज बजट पेश होने के बाद सदन में बजट पर चर्चा होगी तो विपक्षी दल भाजपा के सदस्य विभागवार बजट में कितनी राशि का प्रावधान किया गया है और कितनी राशि वचन पत्र में किए गए वादों को पूरी करने के लिए आवश्यक है, इससे संबंधित प्रश्न खड़े करेंगे।

इसके लिए भाजपा सरकार के समय मंत्री रहे वरिष्ठ विधायकों को विभागवार जिम्मेवारी सौंपी जाएगी ताकि वे तथ्यात्मक जानकारी जुटाकर सरकार को घेर सकें। विपक्ष की कोशिश रहेगी कि कांग्रेस सरकार को अभी 6 महीने ही हुए हैं ऐसे में नए मंत्रियों को किस तरह से घेरा जा सकता है। विधानसभा के पिछले सत्र में मंत्रियों ने ऐसे घोटालों पर क्लीनचिट दे दी थी जिन्हें कांग्रेस चुनाव के पहले भाजपा सरकार के खिलाफ मुद्दा बना रही है। कुल मिलाकर आज पेश होने वाला मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सरकार की दिशा और दशा तो तय करेगा ही सदन के अंदर पक्ष-विपक्ष के बीच शक्ति परीक्षण जैसी स्थिति भी बना सकता है।

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