• [WRITTEN BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 13 August, 2019 07:24 AM | Total Read Count 111
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पाकिस्तान को बेचैनी से क्या हासिल?

सुशांत कुमार

जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट देने के फैसले के बाद पाकिस्तान में गजब की बौखलाहट है। यह समझ में नहीं आने वाली बात है कि आखिर पाकिस्तान इतना क्यों परेशान हुआ है। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यह सिर्फ सैद्धांतिक लाइन नहीं है, बल्कि भौगोलिक रूप से भी वह भारत का हिस्सा है। 

इसके अलावा पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर और चीन के कब्जे वाला अक्साई चीन भी भारत का हिस्सा रहा है। इसका जिक्र अमित शाह ने संसद में अपन भाषण में किया। उन्होंने कहा कि जब वे जम्मू कश्मीर की बात करते हैं तो इसका मतलब है कि वे पीओके और अक्साई चीन का भी जिक्र कर रहे हैं। पर भारत ने अभी इन दो क्षेत्रों को लेकर कोई पहल नहीं की है। इसलिए भी पाकिस्तान की बौखलाहट समझ में नहीं आने वाली है। 

क्या उसे ऐसा लग रहा है कि जम्मू कश्मीर का मसला सुलझाने के बाद भारत पीओके को हासिल करने की पहल करेगा? क्या वह इसी वजह से घबराया है? या उसे लग रहा है कि अब कश्मीर का कानूनी रूप से भारत में पूर्ण एकीकरण करने के बाद शासन, प्रशासन, पुलिस और सैन्य बलों की तैनाती में ऐसे बुनियादी बदलाव होंगे, जिनसे पाकिस्तान को अपने घुसपैठिए भेजने या स्थानीय लोगों को भड़काने का उसका एजेंडा पूरा नहीं होगा? 

आतंकवाद में कमी आए और राज्य में विकास की प्रक्रिया शुरू हो तो भारत का एक बड़ा सिरदर्द खत्म होगा। ध्यान रहे भारत के करीब 80 फीसदी सैनिक इलाके में तैनात हैं। कश्मीर की शांति कई तरह से भारत के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी। संभवतः इस वजह से भी पाकिस्तान बेचैन है। 

पर उसकी सबसे बड़ी बेचैनी इस बात को लेकर है कि वहां की आंतरिक राजनीति पर सबसे ज्यादा असर डालने वाला मुद्दा वहां की सरकार और पार्टियों के हाथ से निकल रहा है। ध्यान रहे पाकिस्तान में सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रहे और कोई भी पार्टी विपक्ष में रहे पर उनकी सारी राजनीति कश्मीर को हासिल करने और भारत का विरोध करने के दावे पर टिकी होती है। वे भारत का विरोध करते हैं और लोगों से वादा करते हैं कि जम्मू कश्मीर को आजाद कराएंगे या पाकिस्तान में शामिल कराएंगे। कश्मीर के नाम पर पाकिस्तान की गरीबी, बेरोजगारी, बदहाली, हिंसा आदि सारी चीजों को छिपाया जाता है। अगर कश्मीर का मुद्दा खत्म हो गया तो उनके पास कुछ नहीं बचेगा। 

तभी पाकिस्तान ने अपने यहां तैनात भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को वापस भेज दिया। उसने भारत से राजनयिक संबंध कम करने का फैसला पांच अगस्त को ही कर लिया था। पर भारत को लग रहा था कि शायद वह इस पर फिर से विचार करेगा। पर उसने ऐसा नहीं किया और बिसारिया को भारत लौटना पड़ा। पाकिस्तान ने भारत से दोपक्षीय कारोबार भी बंद कर लिए हैं। समझौता एक्सप्रेस को बंद कर दिया गया है। वह लगातार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे को उठाने का प्रयास कर रहा है हालांकि उसे कामयाबी नहीं मिल पाई है। उसके राजनयिक दुनिया भर के देशों में घूम कर समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहे हैं पर कहीं से उसे भी समर्थन नहीं मिल रहा है। 

अमेरिका ने पाकिस्तान की बात नहीं सुनी। ध्यान रहे कुछ ही दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका यात्रा के दौरान उनसे कहा था कि वे नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर मसले पर मध्यस्थता के लिए कहा है। पर तुरंत ही अमेरिका इस बात से पलट गया। कश्मीर का विशेष राज्य का दर्ज खत्म किए जाने के बाद अमेरिका के तेवर और भी बदल गए। उसने दो टूक अंदाज में कहा कि इस बारे में भारत ने उससे कोई बात नहीं की और यह भारत का आंतरिक मामला है। 

चीन, जो हमेशा पाकिस्तान की तरफदारी करता है वह लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के फैसले का विरोध तो कर रहा है पर जम्मू कश्मीर के मसले पर चुप है। उसने भी पाकिस्तान का साथ देने से इनकार कर दिया है। यहां तक कि संयुक्त अरब अमीरात से भी पाकिस्तान को समर्थन नहीं मिला है। उसने भी भारत का समर्थन कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ में इस मुद्दे को उठाने का पाकिस्तान का प्रयास भी विफल हो गया है। अब संभव है कि अगले महीने होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की सालाना बैठक में पाकिस्तान के नेता इस मुद्दे को उठाएं पर उससे भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। 

कहने को कुछ लोग कह सकते हैं कि भारत के स्टैंड से कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण हुआ है। पर यह आधा सच होगा। अंतरराष्ट्रीयकरण तो पहले से ही पाकिस्तान कर रहा था। पर अब तो दुनिया ने कश्मीर पर भारत के स्टैंड को एक तरह से मंजूरी देकर पाकिस्तान का यह दावा ही खत्म कर दिया कि जम्मू कश्मीर विवादित क्षेत्र है। दुनिया ने उसे भारत का अभिन्न हिस्सा मान लिया है। यह भारत की बड़ी जीत है। असल में दुनिया का शायद ही कोई देश है, जो किसी न किसी किस्म के सीमा विवाद में नहीं उलझा है। इसलिए भी दुनिया के देशों ने पाकिस्तान के दावे को ज्यादा तरजीह नहीं दी है।  

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