• [EDITED BY : Devdutt Dubey] PUBLISH DATE: ; 25 June, 2019 11:36 AM | Total Read Count 167
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झाबुआ से बहुमत की झंझट दूर करने की कोशिश

देवदत्त दुबेः हमीदिया में हाथ की सर्जरी कराने के बाद दूसरे दिन ही मुख्यमंत्री कमलनाथ झाबुआ पहुंचे और और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया इससे समझा जा सकता है मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए झाबुआ सीट कितनी अहम है बे उपचुनाव में यह सीट जीतकर सरकार में पूर्ण बहुमत प्राप्त करना चाहते हैं जिससे बहुमत के झंझट से मुक्ति पाई जा सके। दरअसल कभी कभी कोई एक विधानसभा सीट का चुनाव अपना महत्वपूर्ण हो जाता है कि उस पर सरकार का भविष्य निर्भर करने लगता है या कई बार किसी बड़े नेता के लिए भी उप चुनाव जीतना भी महत्वपूर्ण हो जाता है और इस प्रकार के चुनाव जीतने के लिए दोनों ओर से पूरी ताकत लगाई जाती है वैसे तो उपचुनाव में सत्ताधारी दल को मदद मिलती रही लेकिन जब पक्ष मजबूत हो और केंद्र में उसकी सरकार हो तब तब जरूर मुकाबला जरूर मुकाबला संघर्ष पूर्ण हो जाता है।

ऐसा ही कुछ झाबुआ विधानसभा के उपचुनाव के लिए अभी से परिस्थितियां बनना शुरू हो गई। बहरहाल सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने झाबुआ पहुंचकर जहां पर गंड कार्यक्रमों में भाग लिया वहीं कांग्रेश के नेताओं के साथ उप चुनाव को जीतने की रणनीति बनाई एक तरह से उन्होंने झाबुआ उप चुनाव का शंखनाद कर दिया है और यह भी जता दिया है यह चुनाव उनकी प्राथमिकता में है क्योंकि इस एक विधानसभा के उपचुनाव जीतने से पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े 116 पर पहुंच जाएगी वहीं भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरीके से विधायक पद से इस्तीफा आया है उससे वह 109 विधायकों से घटकर 108 पर पहुंच गई है।

और यही नहीं झाबुआ लोकसभा चुनाव के दौरान झाबुआ विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने बढ़त बनाई भाजपा सांसद यहां लगभग 10000 वोटों से पिछड़े हुए नजर आए ऐसे में जब पूरे देश में मोदी लहर थी और प्रदेश में 29 में से 28 सीटें जीती और लगभग 210 विधानसभाओं पर भाजपा ने बढ़त बनाई तब झाबुआ विधानसभा पर भाजपा का बिछड़ना वैसे ही भाजपा के लिए मुश्किल भरा काम है यही कारण है की मुख्यमंत्री कमलनाथ यह उपचुनाव जीतने की रणनीति बनाना शुरू कर दिया है जिससे कि वह विपक्ष के बार-बार अल्पमत के आरोपों से निजात पा सके और 116 बहुमत के आंकड़े पर पहुंच सकें झाबुआ राजनीतिक दलों के लिए हमेशा झंझट बनाने वाला रहा है पिछले लोकसभा 2014 के चुनाव में जहां झाबुआ लोकसभा भाजपा ने जीती थी वही 1 साल बाद यही लोकसभा सीट कांग्रेश जीतने में सफल हुई जबकि भाजपा सत्ता और संगठन ने यहां पूरी ताकत झोंकी थी इसलिए दोनों ही दलों के लिए झाबुआ लोकसभा का उपचुनाव बेहद अहम है।

 किसी के लिए भी आसान नहीं है खासकर जब भाजपा लगातार सरकार गिराने की बात कर रही हो मध्यावधि चुनाव के संभावना पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री रामलाल जता रहे हो तब झाबुआ विधानसभा का उपचुनाव उनके लिए मील का पत्थर जैसा है यदि वह चुनाव हारते हैं तो फिर उनके सरकार गिराने की मंसूबे कमजोर पड़ सकते हैं। कुल मिलाकर झाबुआ को लेकर दोनों ही दलों में जोर आजमाइश शुरू हो गई है। लेकिन चुनावी झमेले में झाबुआ जीतने या हारने पर दोनों ही दलों में झंझट जरूर पैदा करेगा।

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