• [EDITED BY : Devdutt Dubey] PUBLISH DATE: ; 18 July, 2019 01:53 PM | Total Read Count 109
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कानून व्यवस्था पर विपक्ष का हंगामा

देवदत्त दुबेः 15 वर्षों के बाद सदन के अंदर भले ही राजनीतिक दलों की भूमिकाएं बदल गई हों, लेकिन अंदाज नहीं बदले। बुधवार को विपक्षी दल भाजपा ने जब कानून व्यवस्था पर हंगामा करना शुरू किया तो सत्ता पक्ष का आरोप था कि व्यापम और पौधारोपण घोटालों से बचने के लिए भाजपा बायकाट कर रही है। दरअसल राजधानी भोपाल में 3 साल के मासूम वरुण की हत्या का मामला विधानसभा में शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उठाया।

सत्ता और विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई और नाराज विपक्षी दल भाजपा ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। इस पर मंत्री बाला बच्चन और प्रियव्रत सिंह आरोप लगाए कि आज पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सदन में रणनीति के तहत हंगामा कर रहे हैं क्योंकि सदन में आज भाजपा सरकार के भ्रष्टाचारों का खुलासा होने की संभावना थी इसलिए भाजपा ने प्रश्नकाल को हंगामे की भेंट चढ़ा दिया। 

प्रश्नकाल में चौथे नंबर पर आज व्यापम को लेकर सवाल आना था। कांग्रेस के हर्ष गहलोत ने 2009 से 2013 तक पीएमटी परीक्षा को लेकर सवाल लगाया था। यह सवाल आज प्रश्नकाल चलता तो जरूर आता है जिसके भय से भाजपा नेताओं ने सदन नहीं चलने दिया। गोपाल भार्गव ने जोर-शोर से कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा। उनका कहना था कि पूरा प्रदेश अपराध में धड़क रहा है। मासूमों को जलाया जा रहा है। बच्चियों से बलात्कार हो रहे हैं तो फिर ऐसे में क्या विपक्ष कोई दूसरा प्रश्न करे।

सदन में इन मसलों पर चर्चा होना चाहिए। इस पर अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि प्रश्नकाल चलने दें। मंत्री जीतू पटवारी, गोविंद सिंह और प्रद्युमन तोमर ने कहा कि भाजपा शासन में इससे अधिक अपराध होते थे। विधायक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश अपराधियों का टापू बन गया है। बहरहाल सदन में प्रश्नकाल के दौरान प्रश्न नहीं चलने देने को लेकर मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विधानसभा में गांधी प्रतिमा के सामने धरना दे दिया।

उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि शिवराज सिंह चौहान ने जानबूझकर आज प्रश्नकाल नहीं चलने दिया। बहुत से विधायकों के जरूरी सवाल थे। उन सब पर शिवराज सिंह चौहान ने पानी फेर दिया। इस तरह से सत्ताधारी दल के सदस्य मंत्री विपक्षी दल भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं। भाजपा शासनकाल के दौरान उठाए गए घोटालों जांच की मांग कर रहे हैं। सदन में हंगामा कर रहे हैं।

धरने पर बैठ रहे हैं। उससे कई बार लगता है जैसे सत्ताधारी दल कांग्रेस भले ही सत्ता में आ गया हो लेकिन वह अपनी पुरानी भूमिका विपक्ष को नहीं भूला है। इसी तरह भाजपा के सदस्य जब सदन में भाजपा शासनकाल की योजनाओं की उपलब्धियां गिनाने लगते हैं तब लगता है जैसे भाजपा अभी भी सत्ता पक्ष की भूमिका में हो और अपने आपको विपक्ष की भूमिका में नहीं डाल पा रही।

कुल मिलाकर 15 वर्षों के बाद सदन के अंदर भाजपा और कांग्रेस की भूमिकाएं जरूर बदल गई हैं। कांग्रेस जहां सत्ता में आ गई है वहीं भाजपा विपक्ष में पहुंच गई है। दोनों ही दलों का सदन के अंदर अंदाज अभी भी पुरानी भूमिका जैसा ही है। हालांकि इसके लिए परिस्थितियां भी जिम्मेवार हैं। जिस तरह से सदन में विपक्षी दल भाजपा कभी भी वोटिंग की डिमांड कर सकती है।

उसके लिए सत्ताधारी दल कांग्रेस भाजपा पर दबाव बनाने के लिए भाजपा शासनकाल के मुद्दों को उठाकर भाजपा नेताओं की धार को बोथरा करना चाहती है। जाहिर है कानून व्यवस्था की स्थिति पर जिस तरह से भाजपा ने सदन के अंदर हंगामा किया है उस पर कांग्रेस ने भाजपा पर ही प्रश्नकाल ना चलने देने के आरोप लगाकर स्थितियों को बदलने की कोशिश की है।

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