• [WRITTEN BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 06 September, 2019 07:21 AM | Total Read Count 74
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सीमाओं की सुरक्षा का सवाल

अरुणाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के सांसद तापिर गाओ ने कहा है कि चीन के सैनिक भारतीय सीमा में घुस गए हैं और उन्होंने कम से कम एक जगह पर लकड़ी का पुल बना लिया है। उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट लिख कर बताया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से करीब 60 किलोमीटर अंदर तक चीन की फौजें घुस गई हैं और चांगलागाम जिले के अंजाव में लकड़ी का एक पुल भी बना लिया है। 

भारतीय सेना ने तापिर गावो की इस बात को खारिज किया है और कहा है कि चीन की सेना कहीं भी भारतीय सीमा के अंदर नहीं घुसी है। दूसरी ओऱ जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना के दो बड़े अधिकारियों ने बुधवार को मीडिया के सामने पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ कर रहे लश्कर ए तैयबा के दो आतंकवादियों को पेश किया और वीडियो के जरिए बताया कि कैसे पाकिस्तान सीमा पार से घुसपैठ को बढ़ावा दे रहा है। सेना के दोनों अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से माना की सीमा पार फिर से आतंकवादियों के लांचपैड बन गए हैं और पाकिस्तान बड़ी संख्या में आतंकवादियों को भारतीय सीमा में घुसाने का प्रयास कर रहा है। 

इसके लिए पाकिस्तानी फौज संघर्षविराम का उल्लंघन करके फायरिंग कर रही है, जिसकी आड़ में आतंकवादी भारतीय सीमा में घुसने का प्रयास कर रहे हैं। लीपा घाटी में दो दर्जन आतंकवादियों के मौजूद होने और कुल एक सौ खूंखार आतंकवादियों के सीमा में प्रवेश के प्रयासों की खबर है। यानी एक तरफ चीन अरुणाचल प्रदेश में और लद्दाख में भी कुछ गड़बड़ी के प्रयास कर सकता है तो दूसरी ओर पाकिस्तान लगातार सीमा पर अशांति के प्रयास में लगा हुआ है। सो, भारत को दोनों मोर्चों पर खासा सावधान रहने की जरूरत है। 

भारत और चीन के बीच मैकमोहन रेखा के जरिए सीमा रेखा बनाई गई है। इस रेखा से एक सौ किलोमीटर अंदर भारत की तरफ चांगलागाम जिला है, जिसके अंजाव गांव में चीनी सेना द्वारा लकड़ी का पुल बनाने की बात भाजपा सांसद ने कही है। सेना का कहना है कि यह पूरा इलाका पहाड़ और जंगल वारा है, जहां छोटे छोटे ढेर सारे नाले और नदियां हैं, जो बरसात के दिन में उफनने लगती हैं। इनके पार करने के लिए कई बार छोटे छोटे पुल बनाने होते हैं। 

सो, हो सकता है कि कहीं ऐसे ही नाले के ऊपर चीन के सैनिकों ने पुल बनाया हो पर वह अपनी सीमा में ही बनाया होगा। यानी सेना किसी हाल में यह मानने को तैयार नहीं है कि चीनी सैनिक अंदर आए हैं। पर भाजपा सांसद ने जिस अंजाव गांव की बात की है वह चांगलागाम जिले में है और मैकमोहन रेखा से 70 किलोमीटर अंदर है। 

अगर दो-चार किलोमीटर के दायरे में पुल बनाने की बात होती तो कहा जा सकता था कि भाजपा सांसद से लोकेशन समझने में भूल हुई है। पर 70 किलोमीटर अंदर पुल बनाने की बात में लोकेशन की गलती नहीं हो सकती है। इसलिए सेना को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। ध्यान रहे इससे पहले कई बार चीन के सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी। डोकलाम का मामला ज्यादा पुराना नहीं हुआ है। भूटान की सीमा से लगते डोकलाम में चीनी सैनिकों ने अपना ठिकाना बना लिया था और लंबे गतिरोध व सेना की तैनाती के बाद वे पीछे हटे थे। 

असल में जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करके और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट कर भारत ने एक साथ कई मोर्चे खोल दिए हैं। लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करने और उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने से चीन बौखलाया है। उसने इसी वजह से कश्मीर मसले पर पाकिस्तान का साथ दिया था। चीन की सेना अक्सर लेह व लद्दाख के इलाके में घुसपैठ करती रहती है। 

असल में चीन के साथ भारत का सीमा विवाद बहुत पुराना है। 1914 में एक अंग्रेजों ने तिब्बत के साथ एक समझौता किया था, जिसके आधार पर मैकमोहन रेखा बनी थी पर चीन उस समझौते को नहीं मानता है और पूर्वोत्तर में भारत के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है। इसी तरह कश्मीर में अक्साई चीन के रूप में भारत का एक बड़ा इलाका उसने कब्जा कर रखा है। हालांकि दोनों देशों ने आपस में लगातार बातचीत के लिए कूटनीतिक और सामरिक मैकानिज्म बनाया है और दोनों देशों के राजनयिक व सैन्य अधिकारी लगातार संपर्क में रहते हैं। इसके बावजूद चीन गाहेबगाहे भारत को परेशान करने के लिए अपने सैनिकों की घुसपैठ कराता रहता है। 

कश्मीर पर फैसले के बाद चीन को अपने लोगों को जवाब देना है। जिस तरह पाकिस्तान में सरकार और सेना दोनों को पाकिस्तानी लोगों को बताना है कि वे भारत को चैन से नहीं बैठने देंगे उसी तरह चीन को भी अपने लोगों को बताना है। एक तरफ वह हांगकांग में विरोध झेल रहा है तो दूसरी ओर भारत के साथ सीमा विवाद में उसे बैकफुट पर आना पड़ रहा है। इसलिए चीन बौखलाहट में है और पाकिस्तान भी है। 

तभी भारत सरकार को दोनों मोर्चों पर सावधान रहने की जरूरत है। भाजपा के सांसद तापिर गाओ ने बाद में अपना वीडियो मैसेज हटा लिया पर उन्होंने उसमें बिल्कुल सीमा रेखा तक सड़क बनाने और सैनिकों की गश्त बढ़ाने का सुझाव दिया था। सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। 

 

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