• [WRITTEN BY : Devdutt Dubey] PUBLISH DATE: ; 12 August, 2019 08:49 AM | Total Read Count 160
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कांग्रेस में फैसलों का अब कम होगा फासला

देवदत्त दुबे

कांग्रेस में जब से राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर दुविधा बनी हुई थी तब से राज्यों में भी पार्टी के महत्वपूर्ण फैसले नहीं हो पा रहे थे लेकिन सोनिया गांधी के अंतरिम रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाने के बाद प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण फैसलों के लिए फासला कम बचा है।

दरअसल, मुख्यमंत्री कमलनाथ पार्टी हाईकमान के सामने बहुत पहले ही पेशकश कर चुके हैं कि प्रदेश अध्यक्ष पद पर मेरा इस्तीफा ले लिया जाए और नई नियुक्ति कर दी जाए लेकिन पिछले ढाई महीनों से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर ही उठापटक मची हुई थी। इस कारण प्रदेश अध्यक्ष का फैसला भी लगातार टाला जा रहा था लेकिन सोनिया गांधी के अंतरिम रूप से रष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अब उम्मीद बन गई है कि पार्टी जल्दी प्रदेश में नए अध्यक्ष बनाएगी जिससे कि संगठन को चुस्त-दुरुस्त बनाया जा सके और कार्यकर्ताओं की न केवल सत्ता में भागीदारी बढ़ाई जाए वरन आगामी दिनों में होने वाले नगरीय निकाय के चुनाव पंचायती राज के चुनाव में सत्ता और संगठन मिलकर पार्टी का बेहतर प्रदर्शन करें साथ ही सदस्यता अभियान में भी गति दी जा सके।

बहरहाल, प्रदेश में नए राजनीतिक समीकरण बनने की भी संभावनाएं बन गई। प्रदेश के क्षत्रप नेताओं के बारे में सोनिया गांधी भली-भांति जानती है। खासकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लंबे समय तक सोनिया गांधी के साथ काम किया है तो पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी सोनिया गांधी के सहयोगी रहे हैं जबकि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाना चाह रहे थे। ऐसे में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, मंत्री जीतू पटवारी की उम्मीद प्रदेश अध्यक्ष को लेकर बनी हुई थी लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं और मुख्यमंत्री के तौर पर वैसे ही मजबूत बने हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ की पसंद प्रदेश अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण रहेगी और मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रदेश में अपनी पहचान पिछड़ों के नेता के रूप में आदिवासियों के नेता के रूप में बना चुके हैं। इन वर्गों को वे लगातार मजबूती दे रहे हैं और उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि वे पिछड़े वर्ग से या फिर आदिवासी वर्ग से नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करवाएं और उनमें भी वे चाहेंगे कि किसी मंत्री को यह जिम्मेवारी मिले जिससे कि मंत्रिमंडल विस्तार के समय  एक मंत्री पद खाली हो जाएगा और मंत्री जब प्रदेश अध्यक्ष बनेगा तब सत्ता और संगठन में तालमेल भी रहेगा। इससे एक बार फिर पिछड़े वर्ग के और आदिवासी वर्ग के मंत्रियों में उम्मीदें बढ़ गई  हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जिस तरह से प्रदेश में इन वर्गों के युवा चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया है उसे दोनों ही वर्गों का मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रति विश्वास बढ़ा है। साथ ही पिछड़ा वर्ग को जिस तरह से 27% आरक्षण देकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस वर्ग का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है उसी तरह विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी वर्ग को सौगातों की झड़ी लगाई है उससे आदिवासी वर्ग भी मुख्यमंत्री कमलनाथ से खासा प्रभावित हुआ है। यहां तक कि भाजपा में चिंता की लकीरें बढ़ गई है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ जिस तरह से बिना हो-हल्ला किए प्रदेश में एक के बाद एक निर्णय ले रहे हैं उससे कहीं भाजपा ने पिछले 15 वर्षों में जिस वर्ग में जनाधार बढ़ाया था वह कांग्रेस में वापस ना चला जाए। खासकर आदिवासी वर्ग में संघ और भाजपा ने लंबे समय तक काम किया था जबकि कमलनाथ के कुछ दिन के ही फैसलों ने इस वर्ग को खासा प्रभावित किया है।

कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में सत्ता और संगठन की बेहतर जमावट करने में जुटे मुख्यमंत्री कमलनाथ को अब एक और मौका मिल गया है जब वे अपने किसी पसंदीदा मंत्री को प्रदेश अध्यक्ष बनवा कर प्रदेश में नए सिरे से समीकरण बनाने में की कोशिश करेंगे और माना जा रहा है की पिछड़े या फिर आदिवासी वर्ग से नया प्रदेश अध्यक्ष पार्टी को शीघ्र ही मिलेग।

इस वर्ग के मंत्री भी दुविधा में है कि वे मंत्री रहे या प्रदेश अध्यक्ष बन जाए जिन मंत्रियों के नाम प्रदेश अध्यक्ष के लिए चल रहे हैं उसमें बाला बच्चन उमंग सिंगार ओमकार सिंह मरकाम जीतू पटवारी सज्जन सिंह वर्मा एवं हर्ष यादव के नाम शामिल है इसके लिए पार्टी क्षेत्रीय समीकरणों को भी ध्यान में रखेगी क्योंकि महाकौशल से स्वयं मुख्यमंत्री कमलनाथ आते हैं। इस कारण मालवा मध्य भारत और बुंदेलखंड का दावा प्रदेश अध्यक्ष के लिए मजबूती से रहेगा। 13 अगस्त को पिछड़ा वर्ग द्वारा मुख्यमंत्री का सम्मान अपैक्स भवन में आयोजित है उस दौरान भी प्रदेश अध्यक्ष की रूपरेखा तय हो सकती है।

 

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