• [EDITED BY : Devdutt Dubey] PUBLISH DATE: ; 16 July, 2019 02:32 PM | Total Read Count 201
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फिर संतुलन बनाने की मुश्किलें बढ़ीं

देवदत्त दुबेः ‘एक अनार सौ बीमार’ की तर्ज पर निगम-मंडल में पद पाने कांग्रेस नेताओं के बीच होड़ लगी है। विभिन्न गुटों में बंटी पार्टी के लिए इन नियुक्तियों में संतुलन बनाने की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वैसे भी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी में सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे में इन नियुक्तियों को लेकर नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। दरअसल पार्टी चुनाव के पहले तमाम नेताओं से सत्ता में आने के बाद कुछ ना कुछ देने का वादा करती है लेकिन वादे इतने हो जाते हैं कि ऊंट के मुंह में जीरा जैसी स्थिति हो जाती है।

इनमें प्रतिस्पर्धा ही शुरू हो जाती है। कुछ लोग होते हैं जिन्होंने विपक्ष में रहते हुए पार्टी के लिए संघर्ष किया है। कुछ भी नेता होते हैं जिनकी दावेदारी मजबूत होते हुए भी टिकट नहीं मिल पाता है और कुछ लोग होते हैं जो सत्ता में पार्टी के आने के बाद नेताओं से मधुर संबंध बना लेते हैं। हाईकमान से दबाव डलवा दें तो कुछ स्थानीय नेताओं के सहारे पद पाने की कोशिश करते।

इन सब में कुछ का ही चयन करना होता है जो काफी मुश्किल भरा काम होता है। ऐसी ही मुश्किलों से एक बार फिर पार्टी नेताओं का सामना हो रहा है। वैसे तो विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है और ऐसे में ना तो मंत्रिमंडल विस्तार होना है और ना ही निगम-मंडलों में नियुक्तियों की कोई संभावना थी लेकिन अपैक्स बैंक के प्रशासक पद पर जब से अशोक सिंह की नियुक्ति हुई है तब से दावेदारों की उम्मीद जोर मारने लगी है।

जिस तरह से मंत्रिमंडल विस्तार और आईएएस और आईपीएस की महत्वपूर्ण नियुक्तियों में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की चली है उसी तर्ज पर अशोक सिंह की नियुक्ति से दिग्विजय सिंह ने निगम-मंडलों में भी अपने समर्थकों को एडजस्ट करना शुरू कर दिया है। अशोक सिंह की नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वे एक तो ग्वालियर इलाके से आते हैं और दूसरी ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया विरोधी माने जाते हैं और यह नियुक्ति उस वक्त हुई जब सिंधिया मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ लंच और डिनर करके वापस दिल्ली पहुंचे ही थे।

ऐसे में सिंधिया समर्थकों में बेचैनी है कि उन्हें निगम-मंडलों में कितना स्थान मिल पाएगा। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश के सभी बड़े नेताओं से निगमों के लिए नाम ले लिए और इन नामों पर नेताओं से दिल्ली में चर्चा भी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ इस दौरे में मंत्रिमंडल विस्तार के लिए भी रास्ता बना रहे जिसमें गुटीय संतुलन इस तरह का हो कि मंत्री और निगम-मंडलों में मिलाकर संख्या तय हो।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ऐसे नेताओं को भी निगम-मंडलों में पद देना चाहते हैं जो भले ही किसी गुट विशेष ना जुड़े हों। उनकी कोई नेता भले ही सिफारिश ना करे लेकिन उन्होंने विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस के लिए संघर्ष किया है। भाजपा सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। उनके खिलाफ मुकदमे लादे गए हैं और उन्हें ना तो अब तक पार्टी की ओर से कोई जिम्मेवारी मिली है और ना ही उनको विधानसभा या लोकसभा में टिकट मिला है। इसके साथ जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखा जा रहा है जिससे आगामी दिनों में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायती राज के चुनाव में पार्टी को मदद मिल सके।

जाहिर है निगम-मंडलों में नियुक्तियों की सुगबुगाहट से कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय से लेकर दिल्ली तक हलचल है। पार्टी के सामने समस्या यही है कि पद बहुत कम है और दावेदार बहुत ज्यादा और इसमें भी नेताओं के बीच संतुलन साधने के साथ-साथ क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को भी ध्यान रखना है। माना जा रहा है कि यह नियुक्तियां विधानसभा सत्र के समाप्त होने के बाद ही होंगी। इसके पहले मंत्रिमंडल का विस्तार भी किया जाएगा।

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