• [EDITED BY : Mohan Kumar] PUBLISH DATE: ; 19 June, 2019 11:16 PM | Total Read Count 58
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पीएम की बैठक में नहीं गया विपक्ष

नई दिल्ली। एक देश, एक चुनाव और आजादी की 75वीं सालगिरह सहित कई मसलों पर विचार विमर्श के लिए बुलाई गई बैठक में विपक्षी पार्टियां शामिल नहीं हुईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सभी पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की बैठक बुलाई थी। इसमें कांग्रेस सहित ज्यादातर विपक्षी पार्टियों के नेता नहीं शामिल हुए। विपक्षी पार्टियों में एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी शामिल हुए। सरकार की सहयोगी शिव सेना भी इस बैठक में नहीं शामिल हुई। बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लगभग सभी पार्टियों ने एक देश, एक चुनाव के प्रस्ताव का समर्थन किया है।

प्रधानमंत्री मोदी की बुधवार को बुलाई बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार, शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर बादल, बीजू जनता दल के अध्यक्ष और ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती, वाईएसआर के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी आदि ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ज्यादातर पार्टियों ने इस मुद्दे का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि सीपीएम की राय अलग है, लेकिन उन्होंने इसका विरोध नहीं किया। 

राजनाथ सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक देश, एक चुनाव पर सुझाव देने के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। कांग्रेस, सपा, शिव सेना, बसपा, डीएमके, टीडीपी और तृणमूल का कोई भी नेता बैठक में शामिल नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी, बसपा प्रमुख मायावती ने भी बैठक में शामिल होने से पहले ही इनकार कर दिया था। लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी और डी राजा मोदी की बुलाई इस बैठक में शामिल हुए, लेकिन उन्होंने एक देश एक चुनाव के मुद्दे का विरोध किया।

कांग्रेस के इस बैठक में शामिल नहीं होने के मुद्दे पर पार्टी के एक नेता ने कहा कांग्रेस एक देश, एक चुनाव के विचार से सहमत नहीं है। जानकार सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं व कुछ सहयोगी दलों के नेताओं से बातचीत करने के बाद सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया। इस मुद्दे पर कांग्रेस और सहयोगी दलों की बुधवार सुबह संसद भवन में बैठक होने वाली थी, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रम की वजह से यह बैठक नहीं हो सकी।

 

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मायावती ने बताया ढकोसला

बहुजन समाज पार्टी की नेता और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक देश, एक चुनाव के विचार को भाजपा का नया ढकोसला करार दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बुलाई गई सभी पार्टियों की बैठक का भी बहिष्कार किया और कहा कि सरकार अगर इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन पर विचार के लिए बैठक बुलाती तो वे जरूर शामिल होतीं।

मायावती ने बुधवार को कहा कि एक देश, एक चुनाव भाजपा का नया ढकोसला है ताकि ईवीएम की सुनियोजित धांधलियों आदि के जरिए लोकतंत्र पर कब्जा किए जाने को लेकर उपजी गंभीर चिंता की तरफ से लोगों का ध्यान बंटाया जा सके। प्रधानमंत्री की बुलाई बैठक को लेकर मायावती ने पहले ट्विट किया और उसके बाद एक बयान जारी करके कहा कि भाजपा सरकार को ऐसी सोच, मानसिकता व कार्यकलापों से दूर रहना चाहिए, जिससे देश के संविधान और लोकतंत्र को आघात पहुंचता है।

बसपा प्रमुख ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा - भारत जैसे विशाल, 130 करोड़ से अधिक आबादी वाले 29 राज्यों व सात केंद्र शासित प्रदेशों वाले लोकतांत्रिक देश में एक देश, एक चुनाव के बारे में सोचना ही पहली नजर में अलोकतांत्रिक व गैर संवैधानिक लगता है। देश के संविधान निर्माताओं ने न तो इसकी परिकल्पना की और न ही इसकी कोई गुंजाइश देश के संविधान में रखी। दुनिया के किसी छोटे से छोटे देश में भी ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आती है।

मायावती ने कहा - किसी भी लोकतांत्रिक देश में चुनाव कभी कोई समस्या नहीं हो सकता और न ही चुनाव को कभी धन के व्यय-अपव्यय से तौलना उचित है। देश में एक देश, एक चुनाव की बात वास्तव में गरीबी, महंगाई, बेरोजबारी, बढ़ती हिंसा जैसी ज्वलंत राष्ट्रीय समस्याओं से ध्यान बांटने का प्रयास और छलावा है। उन्होंने ईवीएम को भी चुनावी प्रक्रिया के लिए नुक़सानदायक बताते हुए कहा कि बैलेट के बजाए ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराने की सरकार की जिद से देश के लोकतंत्र और संविधान को असली खतरा है।

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