महंगाई रोकने की क्या योजना है?

inflation high fuel price  : केंद्र सरकार के पास क्या बढ़ती महंगाई को रोकने की कोई योजना है या उसने सब कुछ भाग्य के सहारे छोड़ा हुआ है? यह यक्ष प्रश्न है क्योंकि महंगाई रोकने का मामला अर्थव्यवस्था के हर पहलू से जुड़ा है। उत्पादन से लेकर आपूर्ति शृंखला और लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने तक के सारे उपाय समग्रता में करने होंगे तभी महंगाई काबू में आएगी और लोगों की मुश्किलें कम होंगी। इसके उलट अभी लोगों की मुश्किलों के कई आयाम पैदा हो गए हैं। एक तरफ लोगों के पास काम-धंधे और रोजगार की कमी है तो दूसरी ओर पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस से लेकर खाने-पीने की वस्तुओं, निर्माण सामग्री और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि लोग जरूरी खर्च में भी कटौती कर रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक की आर्थिक शाखा ने एक अध्ययन के आधार पर रिपोर्ट दी है कि महंगाई बढ़ने की वजह से लोग पेट्रोल और डीजल का खर्च पूरा करने के लिए स्वास्थ्य और खाने-पीने की जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च में कटौती कर रहे हैं। स्टेट बैंक की इस रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मार्च में पेट्रोल और डीजल पर होने वाला… Continue reading महंगाई रोकने की क्या योजना है?

अच्छे दिन का इंतजार अनंत!

अच्छे दिन का इंतजार : अगर आप जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटा कर उसका विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू होने, नागरिकता संशोधन कानून पास किए जाने, सेंट्रल विस्टा बनने और तीन तलाक को अवैध करने के कानून को अच्छे दिन का आना मानते हैं, फिर तो आपके लिए अच्छे दिन आ गए हैं। लेकिन जो लोग अच्छे दिन में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने, खाने के तेल-दाल की कीमतें घटने, रोजगार के नए अवसर बनने, चीन के साथ लगी सीमा के सुरक्षित होने की उम्मीद कर रहे थे तो उनका इंतजार लंबा होगा। यह भी कह सकते हैं कि उनका इंतजार शायद कभी खत्म नहीं होगा। क्योंकि आने वाले दिनों में न तो पेट्रोल और डीजल की कीमत पुराने दिनों वाली होनी है और न खाने-पीने की चीजों के दाम कम होने हैं और न रोजगार के अवसर बनने वाले हैं। सीमा पर चीन के भारतीय जमीन छोड़ कर वापस लौटने की तो उम्मीद छोड़ ही देनी होगी। यह भी पढ़ें: कश्मीर में उम्मीद की खिड़की! असल में भारत आर्थिक संकट के ऐसे दुष्चक्र में फंस गया है, जिसमें से उसका निकलना मुश्किल दिख रहा है। सरकार अगर पेट्रोल और डीजल… Continue reading अच्छे दिन का इंतजार अनंत!

यूथ का आज, कल दोनों खराब!

भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। सबसे बड़ी आबादी वाले देश चीन में युवाओं की बड़ी कमी हो गई है और इसलिए चीन ने कानून बदल कर लोगों को तीन बच्चे पैदा करने की छूट दी है। इसके उलट भारत में 18 से 44 साल की उम्र के लोगों की संख्या 60 करोड़ है। यानी भारत की पूरी आबादी में 40 फीसदी से ज्यादा लोग 18 से 44 साल की उम्र वाले हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण और उसको संभालने में भारत की विफलता ने सबसे ज्यादा इसी समूह के लोगों को प्रभावित किया है। भारत में 18 साल से कम उम्र की आबादी भी 25 फीसदी से ज्यादा है। इन बच्चों को भारत का भविष्य कहा जाता है। इन्हीं के बारे में नरेंद्र मोदी सरकार ने नारा दिया था- पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया। एक नारा- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का भी दिया गया था। लेकिन कोरोना संक्रमण के बीच पढ़ाई सरकार की प्राथमिकता में रहा ही नहीं इसलिए भविष्य तो अंधकारमय हो गया है। युवाओं का वर्तमान भी पूरी तरह से चौपट हो गया है। यह भी पढ़ें: सब खलास, शिक्षा सर्वाधिक! यह भी पढ़ें: आर्थिकी भी खलास! एक-एक करके उनके लिए सारे… Continue reading यूथ का आज, कल दोनों खराब!

साढ़े सात फीसदी गिरेगी जीडीपी!

दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद, जीडीपी की दर में अनुमान से कम गिरावट के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई ने पूरे साल के जीडीपी के अनुमान में भी सुधार किया है।

जीडीपी में सुधार बनाए रखना मुश्किल!

भारत सरकार में फीलगुड का माहौल है। आर्थिक मोर्चे पर एक के बाद एक लगातार दो अच्छी खबरें आई हैं। पहली खबर सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी को लेकर आई थी।

जीडीपी 7.5 फीसदी गिरी

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 23.9 फीसदी की भारी भरकम गिरावट के बाद दूसरी तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पादन में थोड़ा सुधार हुआ है और यह दूसरी तिमाही में साढ़े  सात फीसदी गिरा है।

माइनस 9.5 फीसदी रहेगी जीडीपी

कोरोना महामारी के संकट के बीच भले अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के दावे किए जा रहे हैं पर हकीकत यह है कि अर्थव्यवस्था इस पूरे वित्त वर्ष में निगेटिव ही रहने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी की विकास दर के माइनस में रहने के अंदेशे पर मुहर लगा दी है

जीएसटी भी दलगत राजनीति का शिकार

वस्तु व सेवा कर को देश के सभी राज्यों की सरकारों की सहमति से बनाया गया था। जब इसकी परिकल्पना की गई थी तो उसमें एक बात पहले दिन से शामिल थी कि इस पर विचार के लिए बनी राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति का अध्यक्ष ऐसे राज्य के वित्त मंत्री को बनाया जाएगा, जो केंद्र में सत्तारूढ़ दल का विपक्ष हो।

सरकारी नौकरियों के सृजन पर रोक संबंधी आदेश वापस ले सरकार: कांग्रेस

कांग्रेस ने गैर जरूरी खर्चों में कटौती से जुड़े सरकार के प्रस्ताव को लेकर शनिवार को कहा कि नयी नौकरियों के सृजन पर रोक जन विरोधी कदम है और इस आदेश को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।

शीर्षक-प्रबंधन की खोह का पतनाला

पिछले सवा छह साल से प्रचार-माध्यमों के शीर्षक-प्रबंधन में दिन-रात लगी रहने वाली नरेंद्र भाई मोदी की सरकार को, मालूम नहीं, यह मालूम है कि नहीं, कि इन विलासी-शीर्षकों की खोह में मौजूद ज़मीनी-पतनाला किस क़दर सड़ांध मारने लगा है।

जान और जहान दोनों जा रहे हैं!

कोरोना के बढ़ते संक्रमण और उस संक्रमण से रिकार्ड संख्या में हो रही मौतों के बीच पिछले तीन दिन में अर्थव्यवस्था से जुड़ी तीन खबरें आई हैं, जिनसे भारत की अर्थव्यवस्था के भयावह संकट की तस्वीर साफ दिखने लगी है

बरबाद, फेल देश छोड़ कहां जाएं लोग?

त्रासदियां भुले हुए को, बिछुड़ों को मिलाती हैं। हाल की त्रासद घटना ने मुझे अपनी उस पुरानी दोस्त से फिर मिला दिया जिसे मैं सालों से भूली बैठी थी। मैं रैने से 2006 में तब मिली थी जब हम दोनों सेंट एंड्र्यू में साथ पढ़ते थे।

लेबनान पर फिर फोकस

पिछले हफ्ते बेरूत में हुए धमाके ने एक बार फिर इस देश की बदहाली की तरफ दुनिया का ध्यान खींचा है। उस विस्फोट का कारण तो तुरंत पता नहीं चला, लेकिन उसमें डेढ़ सौ से ज्यादा लोग मारे गए।

संकट में सरकारी कंपनियां

भारत में अभूतपूर्व आर्थिक संकट है। हालांकि ऐसा नहीं है कि कोरोना वायरस की वजह से ही यह संकट खड़ा हुआ है। कोराना का संक्रमण शुरू होने से पहले लगातार सात तिमाहियों में विकास दर गिरती जा रही थी।

किश्तें बाउंस होने लगीं, बैंक फ्रॉड बढ़ने लगा

पिछले दिनों भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि अगले छह महीने बैंकों के लिए बहुत भारी पड़ने वाले हैं।

और लोड करें