‘रासुका’: आपात्काल की अवांछित संतान

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने डाॅ. कफील खान को रिहा करने का फैसला दिया था, उस पर मैंने जो लेख लिखा था, उस पर सैकड़ों पाठकों की सहमति आई लेकिन एक-दो पाठकों ने काफी अमर्यादित प्रतिक्रिया भी भेजी। उन्होंने इसे हिंदू-मुसलमान के चश्मे से देखा।

लोकतंत्र के हित में

इस निर्णय को स्वीकार करने के बजाय उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया। बेशक यह उसका अधिकार है। मगर ये गौरतलब है कि सरसरी नजर में उत्तर प्रदेश सरकार की संबंधित कार्रवाई अनुचित और संवैधानिक भावना के खिलाफ नजर आती थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी इसे इसी नजरिए से देखा। राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के मामले में सरकारें ऐसी कार्रवाई करने लगें और उसे न्यायपालिका का समर्थन भी मिलने लगे, तो यही माना जाएगा कि देश में लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं है। फिलहाल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐसी आशंका को दूर किया है। यह भी गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामला का स्वतः संज्ञान लेते हुए पिछले रविवार को स्व एक विशेष सुनवाई की थी। उस दौरान उसने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से हिंसा करने के आरोपियों की लखनऊ में पोस्टर लगाने को लेकर कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। कहा कि यह पूरी तरह से अनुचित कदम है। अगले दिन अपने फैसले में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की पीठ ने कहा कि इस तरह से सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाना संबंधित लोगों की व्यक्तिगत… Continue reading लोकतंत्र के हित में

पोस्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची यूपी सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुयी हिंसा और तोड़फोड़ के आरोपियों के पोस्टर हटाने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ बुधवार को शीर्ष अदालत में अपील दायर की।

छुट्टी होने के बावजूद इलाहाबाद कोर्ट खुला

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपियों की होर्डिंग्स लगाने के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नाराजगी जाहिर की है।

चिन्मयानंद की जमानत के खिलाफ पीड़िता पहुंची सुप्रीम कोर्ट

कानून की छात्रा के साथ दुष्कर्म के आरोपी पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिंन्मयानंद को मिली इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत को पीड़िता

सीएए के कारण हुयी हिंसा की जांच रिटायर्ड जज करें : प्रियंका

सीएए को असंवैधानिक बताते हुये कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने नये कानून को कांग्रेस शासित राज्यों में लागू नहीं करने की वकालत की और उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन के दौरान हुयी हिंसा की जांच इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मौजूदा अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में कराने की मांग की।

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