यूपी में विस्तार होगा या नहीं?

उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा मार्च-अप्रैल से चल रही है। कोरोना की दूसरी  लहर शुरू होने से पहले ही जब योगी आदित्यनाथ की सरकार के चार साल पूरे हुए थे तभी कहा जा रहा था कि अब आखिरी बार मंत्रिमंडल में विस्तार होगा

कांग्रेस तालमेल करेगी या प्रियंका यूपी छोड़ेंगी!

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की दुविधा खत्म नहीं हो रही है। पार्टी तय नहीं कर पा रही है कि उसे किस तरह से चुनाव लड़ना है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने सक्रिय राजनीति की शुरुआत उत्तर प्रदेश की प्रभारी के तौर पर शुरू किया।

मोदी-योगी के काम का प्रचार

प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, पार्टी के प्रभारी राधामोहन सिंह और संगठन महामंत्री सुनील बंसल। ये तीनों नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रचार का पहला चरण चला चुके हैं और अब दूसरे इलाकों में प्रचार के लिए निकलेंगे।

चित्रकूट में संघ चिंतन और योगी

chitrakoot yogi adityanath : आश्चर्य की बात यह है कि जिस घबराहट में संघ आज सक्रिय हुआ है अगर समय रहते उसने चारों तरफ़ से उठ रही आवाज़ों को सुना होता तो स्थिति इतनी न बिगड़ती। पर ये भी हिंदुओं का दुर्भाग्य है कि जब-जब संघ वालों को सत्ता मिलती है, उनका अहंकार आसमान को छूने लगता है। देश और धर्म की सेवा के नाम फिर जो नौटंकी चलती है उसका पटाक्षेप प्रभु करते हैं और हर मतदाता उसमें अपनी भूमिका निभाता है। लेखक: विनीत नारायण chitrakoot yogi adityanath : उत्तर प्रदेश के चुनाव कैसे जीते जाएं इस पर गहन चिंतन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी अधिकारियों और प्रचारकों का एक सम्मेलन चित्रकूट में हुआ हैं। ऐसे शिविर में हुई कोई भी वार्ता या लिए गए निर्णय इतने गोपनीय रखे जाते हैं कि वे कभी बाहर नहीं आते। मीडिया में जो खबरें छपती हैं वो केवल अनुमान पर आधारित होती हैं, क्योंकि संघ के प्रचारक कभी असली बात बाहर किसी से साझा नहीं करते। इसलिए अटकलें लगाने के बजाए हम अपनी सामान्य बुद्धि से ही इस महत्वपूर्ण शिविर के उद्देश्य, वार्ता के विषय और रणनीति पर अपने विचार बना सकते है। जहां तक उत्तर प्रदेश के आगामी विधान… Continue reading चित्रकूट में संघ चिंतन और योगी

अब योगी के समर्थन में उतरे मौर्य

लखनऊ | उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ( UttarPradesh Deputy Chief Minister Keshav Prasad Maurya ) का सुर बदल गया है। अब वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करने लगे हैं। गौरतलब है कि एक दिन पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री उनके घर गए थे और उनके घर पर ही पार्टी व संघ के पदाधिकारियों की बैठक हुई थी। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने केशव प्रसाद मौर्य के बेटे और बहू से मुलाकात की और नव दंपति को आशीर्वाद दिया। यह भी पढ़ें: भारत-पाक सेना काबुल जाए? इसके एक दिन बाद बुधवार को केशव प्रसाद मौर्य ने अपने उस बयान से किनारा कर लिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, यह दिल्ली ही तय करेगा। इस बयान के बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं है। इस बीच मुख्यमंत्री मंगलवार को मौर्य के घर पहुंचे, जिसके बाद उनके सुर बदल गए हैं। मौर्य ने कहा है कि वे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साथ थे, साथ हैं और साथ रहेंगे। यदि बीच में कोई दीवार आई तो उसे गिरा देंगे। SC on 12Th Board : SC ने 12वीं की परीक्षा के लिए अड़ी आंध्र प्रदेश की… Continue reading अब योगी के समर्थन में उतरे मौर्य

Uttar Pradesh BJP Politics : यूपी भाजपा में दूसरी बाजी शुरू

Uttar Pradesh BJP Politics | उत्तर प्रदेश में चल रहे भाजपा के आंतरिक घमासान में पहली बाजी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीती है। उन्होंने एके शर्मा को अपनी सरकार में मंत्री नहीं बनाया और मंत्रिमंडल का तत्काल विस्तार करने की संभावना भी टाल दी। उन्होंने अपने हिसाब से राज्य का दौरा किया, कोरोना कंट्रोल करने का काम किया और कहा कि अगले महीने किसी समय मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। लेकिन उनके पहली बाजी जीतते ही दूसरी बाजी शुरू हो गई। यह बाजी मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने को लेकर है। यह भी पढ़ें: यूपी में कुछ तो गडबड़ है! आमतौर पर यह माना जाता है कि जो मुख्यमंत्री है उसके चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जाएगा और वहीं मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी होगा। भाजपा ने गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में इसी तरह चुनाव लड़ा था। सिर्फ एक असम है, जहां इसका अपवाद देखने को मिला। पार्टी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा और पार्टी के चुनाव जीतने के बाद हिमंता बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बनाया। तभी उत्तर प्रदेश के चुनाव के लिहाज से यह अहम माना जा रहा है कि पार्टी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री का दावेदार… Continue reading Uttar Pradesh BJP Politics : यूपी भाजपा में दूसरी बाजी शुरू

यूपी में कुछ तो गडबड़ है!

Uttar Pradesh BJP News | एक महीने के भीतर भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष लखनऊ के दौरे पर गए और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ व भाजपा की कोर कमेटी के साथ बैठक की। उनके साथ प्रदेश के प्रभारी राधामोहन सिंह भी थे। राधामोहन सिंह का 20 दिन में यह तीसरा दौरा था। दोनों नेताओं ने दो बार में कई दौर की वार्ता की। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली में वार्ता की। फिर योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली आकर पार्टी के सभी नेताओं से बातचीत की। अब सवाल है कि इतनी मुलाकातों में क्या बातें हो रही हैं? ऐसी कौन सी बात है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बार कह देने से नहीं सुलझ रही है? क्या योगी सचमुच इतने ताकतवर हो गए हैं कि वे मोदी की बात नहीं मान रहे हैं? या यह पार्टी के अंदर कोई नूराकुश्ती चल रही है? यह भी पढ़ें: आपसी टकराव से नुकसान संभव यह भी पढ़ें: सिद्धू पर डोरे डाल रहे हैं केजरीवाल कोरोना वायरस के प्रबंधन में विफलता से ध्यान हटाने के लिए यह विवाद जान बूझकर खड़ा किया गया हो सकता है। भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री ने अनौपचारिक बातचीत में इसका संकेत देते हुए कहा कि… Continue reading यूपी में कुछ तो गडबड़ है!

Uttar Pradesh BJP Situation | आपसी टकराव से नुकसान संभव

Uttar Pradesh BJP Situation | उत्तर प्रदेश भाजपा के नेताओं में आपसी टकराव बहुत बढ़ गया है। भले पार्टी के नेता एक साथ बैठ कर मीटिंग कर रहे हैं लेकिन मनमुटाव बहुत ज्यादा हो गया है। इसका असर चुनाव नतीजों पर होगा। पहले तो टिकट बंटवारे के दौरान ही अपने लोगों को ज्यादा से ज्यादा टिकट दिलाने की होड़ रहेगी उसके बाद सब एक-दूसरे के उम्मीदार को हरवाने की राजनीति करेंगे। भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि आलाकमान की ओर से बार बार दूत भेजने का मकसद इसी आशंका को दूर करना है। सोमवार को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर कोर कमेटी की बैठक में भी इस मसले पर बातचीत होने की खबर है। टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव के मुद्दे और मुख्यमंत्री के चेहरे पर पार्टी आलाकमान की ओर से एक राय बनाने की कोशिश हो रही है। यह भी पढ़ें: सिद्धू पर डोरे डाल रहे हैं केजरीवाल यह भी पढ़ें: केरल में राहुल की तिकड़ी से नाराजगी Uttar Pradesh BJP Situation : पार्टी के कई नेताओं ने इस बात की आशंका जताई है कि उनके खिलाफ भीतरघात हो सकता है। राज्य सरकार के मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही 2012 के चुनाव में भितरघात… Continue reading Uttar Pradesh BJP Situation | आपसी टकराव से नुकसान संभव

मौर्य के घर हुई बैठक, योगी भी पहुंचे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से चल रही सियासी हलचल में मंगलवार को एक बड़ा मोड़ आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर सोमवार को हुई कोर कमेटी की बैठक के एक दिन बाद मंगलवार को पार्टी के सारे बड़े नेता उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ( yogi adityanath keshav prasad Maurya ) के घर पहुंचे। चार साल में पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजधानी लखनऊ में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास पर पहुंचे। दोनों के बीच बैठक हुई। इस दौरान संघ के कई बड़े पदाधिकारी और भाजपा नेता भी मौजूद रहे। गौरतलब है कि लंबे समय से दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। योगी और मौर्य के बीच आपसी मनमुटाव कई बार खुलकर भी सामने आ चुका है। एक हफ्ते पहले ही आगरा में एक कार्यक्रम में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा दिल्ली से ही तय होगा। मौर्य के अलावा पार्टी के कई और नेताओं ने मुख्यमंत्री का चेहरा पेश किए जाने के मसले पर बयान दे चुके हैं। पार्टी के नेता पिछले करीब एक महीने से विवाद सुलझाने के प्रयास कर रहे हैं। Weather Forecast: Monsoon को लेकर अब आई… Continue reading मौर्य के घर हुई बैठक, योगी भी पहुंचे

Uttar Pradesh Politics 2021 : यह बाजी तो योगी ने जीती है

Uttar Pradesh Politics 2021 | उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले भाजपा के अंदर दबाव की राजनीति की पहली बाजी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीत ली है। उन्होंने 18 साल तक नरेंद्र मोदी के करीब रहे पूर्व आईएएस अधिकारी एके शर्मा को अपनी सरकार में मंत्री नहीं बनाया। प्रधानमंत्री मोदी चाहते थे कि एके शर्मा योगी सरकार में मंत्री बनें और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ तालमेल बनाते हुए सरकार का कामकाज संभालें। इसका मकसद चुनाव से पहले सरकार के बारे में बन रही निगेटिव धारणा को बदलना था। लेकिन इस बात को योगी ने दूसरे अंदाज में लिया। उनको लगा कि केंद्रीय नेतृत्व उनको कंट्रोल करना चाहता है और सरकार में सीधा हस्तक्षेप बढ़ाने के प्रयास के तौर पर एके शर्मा को भेजा गया है। यह भी पढ़ें: पत्रकारों को राहुल की चिंता योगी को यह भी लगा कि अगर वे इस समय दबाव में झुकते हैं तो टिकटों के बंटवारे से लेकर मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर उनकी घोषणा तक सब जगह उनको समझौता करना होगा। इसलिए उन्होंने शर्मा का रास्ता रोक दिया। उनको कई तरह से समझाने के प्रयास हुए लेकिन वे शर्मा को मंत्री बनाने पर राजी नहीं हुए। सो, अंत में… Continue reading Uttar Pradesh Politics 2021 : यह बाजी तो योगी ने जीती है

संगठन में गए एके शर्मा!

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात रहे आईएएस अधिकारी एके शर्मा नौकरी छोड़ कर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बनने गए थे लेकिन उनको संगठन में जगह मिली है। कई महीने के इंतजार के बाद एके शर्मा को प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया गया है। आईएएस की नौकरी से वीआरएस लेकर उत्तर प्रदे गए एके शर्मा को विधान परिषद का सदस्य बनाया गया था और कहा जा रहा था कि वे उत्तर प्रदेश में उप मुख्यमंत्री बनेंगे या कम से कम मंत्री जरूर बनेंगे। इस बात को लेकर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच तनाव की खबरें आई थीं। बहरहाल, उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन में कुछ नई नियुक्तियां की गई हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने शनिवार को पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए एक प्रदेश उपाध्यक्ष, दो प्रदेश मंत्री और सात मोर्चा अध्यक्ष नियुक्त किए। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के 18 साल से भरोसेमंद रहे पूर्व आईएएस अधिकारी और एमएलसी एके शर्मा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। शनिवार को भाजपा के सात विभिन्न मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा भी की गई है। प्रियांशु दत्त द्विवेदी को युवा मोर्चा, राज्यसभा सांसद गीता शाक्य को महिला… Continue reading संगठन में गए एके शर्मा!

सपा का तालमेल छोटी पार्टियों के साथ

उत्तर प्रदेश में सबसे व्यवस्थित तरीके से चुनावी तैयारी समाजवादी पार्टी कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उम्मीदवारों की छंटनी के साथ साथ पार्टियों के साथ तालमेल की तैयारी भी काफी हद तक कर ली है। उन्होंने यह साफ कर दिया है कि पहले जिन दो बड़ी पार्टियों के साथ तालमेल करके वे लड़े थे उनसे कोई समझौता नहीं होगा। इसका मतलब है कि कांग्रेस और बसपा से तालमेल की गुंजाइश खत्म है। इसकी बजाय वे छोटी पार्टियों के साथ तालमेल करेंगे। इससे ज्यादा से ज्यादा जातियों को अपने साथ जोड़ने में सहूलियत होगी। जानकार सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव तीन या चार छोटी पार्टियों से तालमेल करेंगे। यह भी पढ़ें: बिहार से बनेंगे सबसे ज्यादा मंत्री! इसमें एक बहुजन समाज पार्टी से अलग होकर बनने वाली नई पार्टी भी होगी। ध्यान रहे बसपा के 11 विधायकों ने ऐलान किया है कि एक और विधायक का समर्थन लेकर वे बसपा से अलग नई पार्टी बनाएंगे। उनके साथ ही यह भी कह दिया है कि नई पार्टी का तालमेल समाजवादी पार्टी से होगा। बसपा से अलग होने वाली पार्टी गैर जाटव दलित और गैर यादव पिछड़ी जातियों की प्रतिनिधि पार्टी होगी। इसके नेता लालजी वर्मा होंगे, जो… Continue reading सपा का तालमेल छोटी पार्टियों के साथ

योगी से दिल्ली की चिढ़ क्यों?

हां, नरेंद्र मोदी और अमित शाह की योगी आदित्यनाथ के प्रति अब वह भावना कतई नहीं है, जो सन् 2017 में उन्हें मुख्यमंत्री बनाते वक्त थी। तब नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों की उनके प्रति भावना वैसी ही थी जैसे विजय रूपानी के प्रति है। मतलब योगी इशारों पर नाचेंगे। अपना कद नहीं बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री बन सकने का ख्याल नहीं बनाएंगे और मोदी जब कहेंगे कि मैं फलां आईएएस की नौकरी छुड़वा (एके शर्मा) उसे विधायक, उसे उप मुख्यमंत्री या गृह मंत्री बना तुम्हारी मदद की सोच रहा हूं तो मेरी सर्वज्ञता में मेरे आदेश की पालना करो। कोई माने या न माने और शायद योगी भी नहीं स्वीकारेंगे कि लगभग चार साल योगी ने मोदी-शाह के साये में वैसे ही राज किया, जैसे विजय रूपानी ने किया। कैबिनेट हो या मुख्यमंत्री सचिवालय, अफसरशाही-प्रोजेक्ट-पैसे हैंडल करने की हर अहम जगह में वहीं हुआ जो मोदी-शाह से निर्देशित था। यह भी पढ़ें: यूपी से ही दिल्ली का हिंदू पीएम तब गड़बड़ कैसे? जवाब है योगी के भगवा वस्त्र से! मोदी-शाह ने भगवा वस्त्र के राजनीतिक लाभ में योगी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया था। तब कल्पना नहीं थी कि चार सालों में देश की बरबादी के चलते और मोदी-शाह… Continue reading योगी से दिल्ली की चिढ़ क्यों?

यूपी से ही दिल्ली का हिंदू पीएम

यह बात हिंदू राजनीति के संदर्भ में है। इसका यह तथ्य नोट रखें कि नरेंद्र मोदी ने भी बनारस से यूपी को साध कर दिल्ली की सत्ता बनाई है। हिंदू राजनीति से दिल्ली में तख्तपोशी का जरिया गंगा-यमुना मैदान है। तभी योगी आदित्यनाथ के लिए 2022 का विधानसभा चुनाव निर्णायक है। यदि वे अपने दमखम पर यूपी में दुबारा मुख्यमंत्री बन गए तो वे हिंदुओं के अगले स्वाभाविक प्रधानमंत्री होंगे। तब 2024 के लोकसभा चुनाव की जीत का श्रेय उनका होगा। तब तक नरेंद्र मोदी की दस साल की सत्ता इतनी मौतें, ऐसा दिवालियापन लिए हुए होगी कि उनके आगे योगी वक्त के बादशाह होंगे। अमित शाह क्यों नहीं? इसलिए कि मोदी और योगी के बीच यूपी के हिंदू वोटों में उनके महानायक बनने की गुंजाइश नहीं है। जब योगी यूपी से पूरे देश के साधु-संत समाज, भगवा राजनीति के प्रतीक नेता हैं तो न राम मंदिर में अमित शाह की भूमिका का मतलब है और न प्रदेश के बाकी भगवा विकास में अमित शाह श्रेय कमा सकते हैं। यदि हिंदू-मुस्लिम दंगे याकि बतौर गृह मंत्री सड़कों पर पानीपत की तीसरी लड़ाई का सिनेरियो भी अमित शाह बनवाए तब भी यूपी में तो सब कुछ योगी की कमान के श्रेय… Continue reading यूपी से ही दिल्ली का हिंदू पीएम

क्या यूपी के ब्राह्मण ऐसे सधेंगे?

भाजपा में चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण नाराज हैं। यह आज की चर्चा नहीं है। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही इसकी चर्चा शुरू हो गई थी और उसके बाद कुछ घटनाएं भी ऐसी हुईं, जिनसे इस बात को बल मिला। योगी के पूरे कार्यकाल में ब्राह्मणों पर अत्याचार की चर्चा रही, ब्राह्मण अधिकारियों को किनारे किए जाने की खबरें आईं, जिसका अंत नतीजा यह है कि ब्राह्मण नाराज है और चोटी खोल ली है कि किसी तरह से योगी को हराना है। उसी चर्चा में यह बात शामिल है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह प्रदेश के ब्राह्मणों को साधने का प्रयास कर रहे हैं। यह भी पढ़ें: यूपी से ही दिल्ली का हिंदू पीएम अब देखें कि यूपी के ब्राह्मणों को कैसे साधने का प्रयास हो रहा है? कांग्रेस पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को भाजपा में शामिल कराया गया। इसका ऐसा प्रचार किया गया, जैसे ब्राह्मणों के सर्वोच्च नेता ने भाजपा का दामन थाम लिया और अब ब्राह्मण भाजपा के सिवा किसी को वोट नहीं देंगे। जितिन प्रसाद को शामिल कराने से पहले अमित शाह उनसे मिले और उसके बाद मीडिया में यह नैरेटिव बनवाया गया कि भाजपा के… Continue reading क्या यूपी के ब्राह्मण ऐसे सधेंगे?

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