एनआरसी

खौफ फैलाते मुद्दे

देश में पिछले दो-तीन महीने से नागरिकता संशोधित कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर लेकर जिस तरह कोहराम मचा है

मेघालय की आग

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ और इनर लाइन परमिट व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर मेघालय में पिछले तीन दिन से जारी हिंसा में अब तक तीन लोग मारे जा चुके हैं।

अभी एनआरसी ठंडे बस्ते में!

तो भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी को थोड़े वक्त के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया। यह थोड़ा वक्त कितना होगा, अभी नहीं कहा जा सकता है पर पश्चिम बंगाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण का लब्बोलुआब यह है कि भाजपा अभी एनआरसी का मुद्दा नहीं उठाने जा रही है।

एनआरसी सिर्फ असम और बंगाल में!

ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी लागू करने का मुद्दा छोड़ सकती है। वैसे भी अभी इस बारे में सरकार ने कोई पहल नहीं की है। उसे अभी संशोधित नागरिकता कानून, सीएए के तहत नागरिकता देने की चिंता है और साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, एनपीआर को किसी तरह से लागू करना है।

एनआरसी पर विराम लगाने का समय!

केंद्र सरकार को अब राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी को लेकर सीधी घोषणा कर देनी चाहिए। अब समय आ गया है कि सरकार कहे कि वह पूरे देश में एनआरसी नहीं लागू करने जा रही है।

भाजपा-जदयू में शह-मात का खेल

बिहार में गजब हुआ है। एनडीए का राज है और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, एनपीआर और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास हुआ है। सोचें, भाजपा ने जदयू, राजद और कांग्रेस की हां में हां मिलाते हुए कहा कि बिहार में एनपीआर को 2010 के फॉर्मेट में यानी तब की यूपीए सरकार के बनाए फॉर्मेट में लागू किया जाना चाहिए और एनआरसी तो किसी कीमत पर लागू नहीं होनी चाहिए।

शाहीन बाग और सवाल

यह सवाल पहले भी उठा था कि नागरिकता संशोधन विरोधी कानून के खिलाफ आंदोलन में हिंसा केवल उन राज्यों में क्यों हुई, जहां भारतीय जनता पार्टी का शासन है। अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कहना है कि...

एनपीआर 2010 के प्रारूप में हो लागू : नीतीश

बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन आज नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर जमकर हंगामा हुआ।

उत्तर पूर्वी दिल्ली में तीसरे दिन भी तनावपूर्ण माहौल

उत्तर पूर्वी दिल्ली में सीएए और एनआरसी को लेकर भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। तीसरे दिन भी मौजपुर-बाबरपुर इलाके में सुबह से ही पथराव हो रहा है

जाफराबाद मुस्लिम-दलित गठजोड़ का खतरा

शाहीन बाग़ में हो रहे धरने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा था , यह प्रदर्शन एक संयोग नहीं , एक प्रयोग है। कर्नाटक , महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश में हू-ब-हू शाहीन बाग़ दोहराया गया और रविवार को दिल्ली...
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