यूपी पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत किए एनकाउंटर

कानपुर के बिकरू गांव में 3 जुलाई को आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद यूपी पुलिस एक्शन मोड में आ गई है और राज्य में अपराधियों को सफाया करने के लिए अभियान लांच किया है।

हमारे सामने मौजूद यक्ष-प्रश्न

ये ऐसी घटना थी, जिसकी पटकथा सबको पहले से मालूम थी। विकास दुबे ने जब मध्य प्रदेश में समर्पण किया, उसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियों की भरमार लग गई कि अब उसे एनकाउंटर में मार डाला जाएगा। ऐसा अनुमान लगाने वाले सिर्फ विशेषज्ञ और पत्रकार नहीं थे

सिर्फ राज खुलने का मसला नहीं था

उत्तर प्रदेश के गैंगेस्टर विकास दुबे के कथित पुलिस इनकाउंटर में मारे जाने के बाद सबसे ज्यादा इस बात की चर्चा है कि उसे इसलिए मार दिया गया

विपक्ष ने की न्यायिक जांच की मांग

उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस वालों की हत्या के आरोपी गैंगेस्टर विकास दुबे के एक कथित मुठभेड़ में मारे जाने की घटना पर विपक्षी पार्टियों ने कई सवाल उठाए हैं। विपक्षी पार्टियों ने इस घटना की न्यायिक जांच की मांग की है। कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने इस घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

विकास दुबे एनकाउंटर पर दिग्विजय ने उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस जवानों की हत्या करने का आरोपी विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन से कानपुर ले जाते समय कार पलटने के बाद भागने की कोशिश में 

नक्सलियों से मुठभेड़, इंस्पेक्टर-कांस्टेबल शहीद

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में रविवार को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच एक बड़ी मुठभेड़ हुई, जिसमें एक सब इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल शहीद हो गए।

आस्था गंवाने का वर्ष

भारत 2019 में तब झूमा जब हैदराबाद पुलिस ने बलात्कारियों को एनकाउंटर में मारा। वह अदालतों, सुप्रीम कोर्ट और न्याय व्यवस्था पर भरोसा टूटने का जनता का ऐलान था। दिल्ली में वकीलो के सामने पुलिस के प्रति जनता की हमदर्दी हो या अप्रैल में भारत के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर एक महिला द्वारा उत्पीड़न का आरोप और उस पर चीफ जस्टिस द्वारा बाले-बाले सुनवाई

चीफ जस्टिस, गहलोत और सत्य!

आज सुप्रीम कोर्ट में हैदराबाद पुलिस एनकाउंटर पर सुनवाई है। मतलब न्याय के सत्व की परीक्षा। यह मामला 21वीं सदी में भारत की न्याय प्रक्रिया के औचित्य, साख को लिए हुए है। चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने जोधपुर हाईकोर्ट की इमारत के उद्घाटन में अपनी राय बताते हुए कहा है कि न्याय प्रतिशोध या बदला नहीं हो सकता।

दिमाग, बुद्धि का आजादी बाद सूखा!

भारत के तीन मसले। एक, बलात्कार। दूसरा, आरोपियों को पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारना। तीसरा, सवा सौ करोड़ नागरिकों का दिमाग, उनका मनोविश्व! तीनों बातें भारत का आईना हैं। आजाद भारत के 72 साला सफर का आईना! हां, बलात्कार और बलात्कारियों का एनकाउंटर आईना है भारत का!

तत्काल ‘न्याय’ पर चीफ जस्टिस की नसीहत

जोधपुर। हैदराबाद में बलात्कार और हत्या के चार आरोपियों को पुलिस की कथित मुठभेड़ में मार डाले जाने की घटना पर देश भर में चल रही बहस के बीच चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने न्याय की अवधारणा पर जरूरी नसीहत दी है। उन्होंने कहा है कि न्याय को कभी भी प्रतिशोध में नहीं बदला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय कभी भी त्वरित नहीं हो सकता है। चीफ जस्टिस बोबड़े  ने न्‍याय के नाम पर की जाने वाली हत्याओं की निंदा की है। उन्होंने कहा- जब न्याय प्रतिशोध का रूप ले लेता है तो वह अपना चरित्र गंवा देता है। जोधपुर में शनिवार को आयोजित हाई कोर्ट के एक कार्यक्रम में चीफ जस्टिस ने अपराध न्याय प्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा- न्याय कभी भी त्वरित नहीं हो सकता है। न्याय को कभी भी प्रतिशोध का रूप नहीं लेना चाहिए। मुझे लगता है कि जब न्याय प्रतिशोध बन जाता है तो वह अपना चरित्र गंवा देता है। जस्टिस एसए बोबड़े ने पिछले महीने ही चीफ जस्टिस पद की शपथ ली है। राजस्थान हाई कोर्ट के एक समारोह में शनिवार को उन्होंने यह भी माना कि भारतीय न्याय व्यवस्था में ऊपर से नीचे… Continue reading तत्काल ‘न्याय’ पर चीफ जस्टिस की नसीहत

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