दूसरा और तीसरा मोर्चा एक साथ लड़ेगा

Lok Sabha Elections Opposition : अगले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के विरोध में दो मोर्चे बनेंगे लेकिन दोनों अलग अलग चुनाव नहीं लड़ेंगे। जानकार सूत्रों का कहना है कि विपक्ष के नेताओं को पता है कि सारी विपक्षी पार्टियों के एक मंच पर लाना या एक गठबंधन में लाना नामुमकिन है। वैचारिक विरोध के अलावा कई पार्टियों के बीच सीधा जमीनी टकराव है। इसलिए एक गठबंधन में सारी पार्टियों को लाने की बजाय दो अलग अलग मोर्चे बनाए जाने की तैयारी है और बाद में दोनों मोर्चों के बीच कहीं आधिकारिक रूप से तो कहीं परदे के पीछे का तालमेल होगा। सीटों के बंटवारे में एडजस्टमेंट की जाएगी। Read Also: ममता की बेचैनी बढ़ रही है जानकार सूत्रों के मुताबिक दूसरा मोर्चा कांग्रेस का होगा, जो अभी यूपीए है। यानी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के मुकाबले कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए होगा। इसमें कांग्रेस के अलावा एनसीपी, डीएमके, राष्ट्रीय जनता दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा, एआईयूडीएफ, सीपीएम, सीपीआई आदि पार्टियां होंगी। इसके अलावा एक तीसरा मोर्चा होगा, जिसमें तृणमूल कांग्रेस, वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति आदि पार्टियां हो सकती हैं। शिव सेना को लेकर अभी संशय है क्योंकि अगले छह महीने में उसके गठबंधन बदल करने का… Continue reading दूसरा और तीसरा मोर्चा एक साथ लड़ेगा

शिव सेना पर पवार का दांव

shiv sena sharad pawar : महाराष्ट्र के महाविकास अघाड़ी में शामिल एनसीपी के नेता शरद पवार का कोई खास सद्भाव कांग्रेस के प्रति नहीं है। वे शिव सेना के प्रति अपना सद्भाव दिखाते रहते हैं और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ उनकी मुलाकातें भी होती रहती हैं। लेकिन जहां राजनीति की बात आती है वहां वे शिव सेना की लगाम कसे रखते हैं। उनको पता है कि शिव सेना के पास मुख्यमंत्री का पद है और इसलिए विधानसभा स्पीकर का पद किसी हाल में उसके पास नहीं जाना चाहिए। इसलिए जैसे ही शिव सेना के नेताओं ने स्पीकर पद की मांग की वैसे ही पवार ने दो टूक कहा कि स्पीकर का पद कांग्रेस के पास ही रहेगा। ध्यान रहे कांग्रेस ने नाना पटोले को स्पीकर बनवाया था लेकिन बाद में पार्टी ने उनको प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। तब से स्पीकर का पद खाली है। दो दिन के विशेष सत्र में उपाध्यक्ष और शिव सेना के नेता भास्कर जाधव ने सदन का संचालन किया और हंगामा करने के नाम पर भाजपा के एक दर्जन विधायकों को एक साल के लिए निलंबित कर दिया। तब से शिव सेना के नेता स्पीकर पद की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि… Continue reading शिव सेना पर पवार का दांव

क्या शिव सेना-भाजपा में कोई खिचड़ी?

shiv sena BJP : हो सकता है दोनों पार्टियों में खिचड़ी पकरने की अफवाहे भाजपा ही बनवा रही हो। इसलिए कि महाराष्ट्र जैसे कमाऊ-सियासी प्रदेश की सत्ता से बाहर होना मोदी सरकार को भी बैचेन बनाए रखने वाला है। तभी लगातार चर्चा है महा विकास अघाड़ी में सब कुछ ठीक नहीं है। यह सब कुछ ठीक नहीं चलने का सिलसिला मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के प्रधानमंत्री से मिलने के बाद शुरू हुआ। उसके तुरंत बाद शिव सेना के सबसे मुखर नेता संजय राउत ने प्रधानमंत्री को भाजपा और देश का सर्वोच्च नेता बताते हुए तारीफ की। खुद उद्धव ने भी कहा कि वे भले भाजपा से अलग हो गए हैं लेकिन मोदी से रिश्ते खत्म नहीं हुए हैं। यह भी पढ़ें: योजना में अटका है एमएलसी का मामला! अब खबर है कि संजय राउत और मुंबई महानगर के भाजपा अध्यक्ष रहे आशीष सेलार के बीच एक गुप्त मीटिंग हुई है। जब खबर आम हो गई तो राउत ने कहा कि दोनों एक-दूसरे को काफी समय से जानते हैं और इसलिए इस मुलाकात में ज्यादा कुछ नहीं देखना चाहिए। लेकिन इस मुलाकात की खबर के तुरंत बाद पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का एक बयान आया, जिसमें उन्होंने कहा- शिव सेना हमारी दुश्मन… Continue reading क्या शिव सेना-भाजपा में कोई खिचड़ी?

महाराष्ट्र में ढाई साल का पेंच!

महाराष्ट्र में ढाई साल का पेंच : महाराष्ट्र में भाजपा और शिव सेना का तालमेल इसी बात पर टूटा था। शिव सेना के नेता कह रहे थे कि बंद कमरे में अमित शाह ने वादा किया था कि मुख्यमंत्री का पद ढाई-ढाई साल के लिए दोनों पार्टियों के बीच बंटेगा। दूसरी ओर भाजपा ने इससे इनकार किया, जिसके बाद शिव सेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिल कर सरकार बनाई। पिछले दिनों फिर ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री की बात अचानक उभरी, जिस पर शिव सेना ने कहा कि एनसीपी के साथ ऐसी कोई बात नहीं हुई है और पांच साल तक शिव सेना का ही मुख्यमंत्री रहेगा। यह भी पढ़ें: कांग्रेस में शिव सेना को लेकर संदेह अब एक बार फिर ढाई साल का पेंच सामने आया है। अगले साल अप्रैल में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री के तौर पर ढाई साल पूरे करेंगे। उसके बाद क्या होगा, इसका अंदाजा किया को नहीं है। जानकार सूत्रों का कहना है कि उसके बाद वे अगले ढाई साल तक भाजपा के समर्थन से भी मुख्यमंत्री रह सकते हैं या उनके समर्थन से अगले ढाई साल के लिए भाजपा का मुख्यमंत्री बन सकता है। हालांकि शिव सेना के नेता इससे इनकार कर रहे हैं… Continue reading महाराष्ट्र में ढाई साल का पेंच!

कांग्रेस में शिव सेना को लेकर संदेह

कांग्रेस में शिव सेना को लेकर संदेह : महाविकास अघाड़ी बनने के बाद कांग्रेस और शिव सेना में कमाल का तालमेल दिखा था। दोनों के नेताओं ने एक दूसरे पर बहुत भरोसा दिखाया था। लेकिन अब वह भरोसा टूटता दिख रहा है। यही कारण है कि दोनों ओर से बयानबाजी शुरू हो गई है। सरकार बनने के थोड़े दिन बाद ही दोनों पार्टियों में अविश्वास पैदा होने लगा था। लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि शिव सेना सांसद संजय राउत की पत्नी को ईडी का नोटिस जाने के बाद ज्यादा बदलाव हुआ है। उसके बाद शिव सेना का रुख भाजपा के प्रति नरम हुआ है। फिर जब उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की तब घटनाक्रम में नया मोड़ आया। इसके तुरंत बाद संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की। यह भी पढ़ें: रावत और ममता की चिंता अब शिव सेना के विधायक प्रताप सरनाईक ने उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिख कर कहा कि केंद्रीय एजेंसियां बहुत परेशान कर रही हैं और इसलिए शिव सेना को भाजपा के साथ तालमेल कर लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीपी और कांग्रेस दोनों शिव सेना को कमजोर कर रहे हैं। कांग्रेस को इन बयानों का मतलब समझ… Continue reading कांग्रेस में शिव सेना को लेकर संदेह

शरद पवार और विपक्ष : उम्मीद, भरोसा किस चेहरे से?

शरद पवार और विपक्ष : शरद पवार के घर पर कुछ विपक्षी पार्टियों और कुछ जाने-माने नागरिकों की जो बैठक हुई है उसका मकसद समझना मुश्किल नहीं है। बैठक के बाद भले पवार की पार्टी के नेता कहें कि यह बैठक उन्होंने नहीं बुलाई थी या यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं थी लेकिन हकीकत सबको पता है। यह 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले देश में लोगों के सामने एक विकल्प पेश करने, एक अलग विचारधारा दिखाने और देश के लोगों को एक अलग कहानी सुनाने के मकसद से हुई। आगे इसका स्वरूप और स्पष्ट होगा। थोड़े दिन के बाद यह भी साफ होगा कि इस समूह के नेता कांग्रेस के नेतृत्व वाले दूसरे मोर्चे का साथ किस तरह का चुनावी तालमेल करेंगे। यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में चुनाव की क्या जल्दी है? लेकिन उससे पहले सवाल है कि क्या इस समूह में ( शरद पवार और विपक्ष) कोई चेहरा ऐसा है, जो उम्मीद जगा सके या देश के लोगों को भरोसा दिलाए? यह प्रयास कुछ कुछ वैसा  ही है जैसा 2011 में अरविंद केजरीवाल ने किया था। उन्होंने इसी तरह देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं को और जाने-माने लोगों को एक जगह इकट्ठा किया था और इंडिया अगेंस्ट करप्शन… Continue reading शरद पवार और विपक्ष : उम्मीद, भरोसा किस चेहरे से?

Yashwant Sinha Rashtramanch Meeting : भाजपा-विरोधी ‘राष्ट्रमंच’ की नाकामी

Yashwant Sinha Rashtramanch Meeting : तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने पहल की और अपने ‘राष्ट्रमंच’ की ओर से देश के राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाई। विपक्षी दलों की इस बैठक की हफ्ते भर से अखबारों में बड़ी चर्चा हो रही थी। कहा जा रहा था कि सारे विपक्षी दलों का जबर्दस्त गठबंधन खड़ा किया जाएगा, जो अगले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी और भाजपा को चित्त कर देगा लेकिन हुआ क्या ? खोदा पहाड़ और उसमें से चुहिया भी नहीं निकली। यह भी पढ़ें: यह कैसा धर्मांतरण है ? चुहिया भी नहीं निकली, यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि बैठक के बाद इसके प्रवक्ता ने एकदम शीर्षासन की मुद्रा धारण कर ली। उसने सबसे बड़ी बात यह कही कि यह बैठक उन्होंने वैकल्पिक सरकार बनाने के हिसाब से नहीं बुलाई थी और इसका लक्ष्य भाजपा सरकार का विरोध करना नहीं है। यदि ऐसा ही था तो फिर इसे क्यों बुलाया गया था ? इसमें सभी छोटी-मोटी पार्टियों को तो बुलाया गया था लेकिन भाजपा को आयोजक लोग कैसे भूल गए ? भाजपा को इसमें क्यों नहीं बुलाया गया ? देश की स्थिति सुधारने में क्या उसका कोई योगदान नहीं हो सकता है… Continue reading Yashwant Sinha Rashtramanch Meeting : भाजपा-विरोधी ‘राष्ट्रमंच’ की नाकामी

पवार के घर पर जुटे विपक्षी नेता

Sharad Pawar Yashwant Sinha Meeting : नई दिल्ली। एनसीपी के प्रमुख शरद पवार के घर पर मंगलवार को कई विपक्षी पार्टियों के नेता जुटे। तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा के बनाए राष्ट्र मंच के तहत विपक्षी नेताओं का यह जमावड़ा हुआ। इस बैठक में शरद पवार के अलावा यशवंत सिन्हा भी शामिल हुए। बैठक के बाद पवार की पार्टी के नेता माजिद मेमन ने सफाई देते हुए कहा कि यह तीसरे मोर्चे की बैठक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक शरद पवार ने नहीं बुलाई थी। कांग्रेस पार्टी को इसमें नहीं बुलाया गया था। गौरतलब है कि ममता बनर्जी के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पिछले दो हफ्ते में दो बार शरद पवार से मुलाकात की है। सोमवार को भी वे पवार से मिले थे और उसके बाद ही यह बैठक बुलाई गई थी। हालांकि खुद प्रशांत किशोर ने सोमवार को ही कहा था कि अगले चुनाव में कोई तीसरा या चौथा मोर्चा नरेंद्र मोदी को नहीं हरा पाएगा। माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर विपक्षी पार्टियों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। बहरहाल, मंगलवार को हुई बैठक के बाद माजिद मेमन ने कहा- मीडिया में… Continue reading पवार के घर पर जुटे विपक्षी नेता

डेढ़ घंटे चली मोदी-उद्धव की मुलाकात

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री बनने के बाद दूसरी बार उद्धव की प्रधानमंत्री से यह दूसरी मुलाकात थी। इस बार वे मराठा आरक्षण के मसले पर बात करने आए थे। इसके अलावा उन्होंने चक्रवाती तूफान ताउते से हुई तबाही के लिए मुआवजे के बारे में भी बात की। प्रधानमंत्री के साथ उनकी मुलाकात डेढ़ घंटे से ज्यादा चली। मुलाकात के बाद उद्धव ने कहा कि राजनीतिक रूप से वे भाजपा के साथ नहीं हैं पर मोदी से रिश्ता खत्म नहीं हो गया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मराठा आरक्षण लागू करने के लिए प्रधानमंत्री से मदद मांगी। उसके अलावा उन्होंने वैक्सीनेशन और तूफान से हुए नुकसान के मुआवजे के बारे में बात की। एक दिन पहले ही यह मुलाकात तय हुई है और दोनों ने मीटिंग अकेले में की। ये बातचीत करीब एक घंटा चालीस मिनट तक चली मुलाकात के बाद इस बारे में पूछे जाने पर उद्धव ने कहा- भले ही राजनीतिक रूप से साथ नहीं हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है… Continue reading डेढ़ घंटे चली मोदी-उद्धव की मुलाकात

केरल कांग्रेस का मामला, उलझा

चुनाव नतीजों के बाद आशंका जताई जा रही थी और इस कॉलम में दो बार पहले लिखा जा चुका है कि केरल में कांग्रेस पार्टी के सामने बड़ा संकट आएगा, वह संकट आ गया है। पार्टी में घमासान छिड़ गया है। विधायक दल के नेता पद से हटाए गए पार्टी के दिग्गज नेता रमेश चेन्निथला ने पार्टी आलाकमान से नाराजगी जताई है तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने भी चुनाव समीक्षा करने के लिए बनाई गई कमेटी के बहाने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। रामचंद्रन ने चुनाव नतीजों की समीक्षा कर रही अशोक चव्हाण कमेटी के साथ मीटिंग करने से ही इनकार कर दिया। यह भी पढ़ें: पंजाब में क्या कैप्टेन समझेंगे? ध्यान रहे इन दिनों सारी बैठकें वर्चुअल हो रही हैं इसलिए अशोक चव्हाण कमेटी ने उनको वीडियो लिंक भेजा था, जिसे क्लिक करके उनको मीटिंग में शामिल होना था पर वे इससे आहत हो गए। उन्होंने कहा कि वे सात बार के सांसद हैं और यह उनका अपमान है कि उनको सिर्फ एक लिंक भेज दिया गया और उस पर क्लिक करके बैठक में शामिल होने को कहा गया। यह भी पढ़ें: सीएए के नियम क्यों नहीं बना रही सरकार? असल में यह कोई कारण… Continue reading केरल कांग्रेस का मामला, उलझा

केरल कांग्रेस में बड़ा संकट खड़ा होगा

कांग्रेस पार्टी अपनी गलतियों से एक-एक करके राज्यों में अपने कमजोर करती जा रही है। ऐसा नहीं है कि हर जगह उसको भाजपा ने कमजोर किया है या भाजपा मजबूत हुई है तो वह कमजोर हुई है। असल में इसका उलटा है। जहां भी उसका भाजपा से सीधा मुकाबला है वहां वह बची हुई है। भाजपा उसको खत्म नहीं कर पाई है। गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्य इसके उदाहरण हैं। कांग्रे स को भाजपा से ज्यादा क्षेत्रीय पार्टियों ने नुकसान किया है या कांग्रेस ने खुद का नुकसान अपने किया है। आंध्र प्रदेश से लेकर असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में कांग्रेस अपनी गलतियों से हाशिए में गई है। ऐसी ही गलती पार्टी ने केरल में शुरू कर दी है। उसने पार्टी के बड़े नेता पीसी चाको को पार्टी छोड़ कर जाने दिया। हालांकि इसमें कांग्रेस की अपनी गलती से ज्यादा चाको का लालच और उनकी महत्वाकांक्षा जिम्मेदार है। लेकिन कांग्रेस उनको मना सकती थी। चाको कांग्रेस छोड़ कर शरद पवार की पार्टी एनसीपी में गए और उसके प्रदेश अध्यक्ष बन गए। अब केरल महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रही लतिका सुभाष ने भी कांग्रेस छोड़ कर एनसीपी ज्वाइन कर लिया है। ऊपर से कांग्रेस… Continue reading केरल कांग्रेस में बड़ा संकट खड़ा होगा

एनसीपी से कांग्रेस और शिव सेना दोनों नाराज

महाराष्ट्री की महाविकास अघाड़ी सरकार में खींचतान चलती रहती है। वहां सरकार में तीन पार्टियां शामिल हैं और उनके समीकरण बदलते रहते हैं। कभी लगता है कि एनसीपी और शिव सेना एक साथ हैं, कभी लगता है कि शिव सेना और कांग्रेस एक साथ हैं तो कभी लगता है कि कांग्रेस और एनसीपी एक साथ हैं। जैसे इन दिनों एनसीपी के नेता और राज्य सरकार के मंत्री नवाब मलिक के एक बयान को लेकर कांग्रेस और शिव सेना दोनों के नेता नाराज हो गए हैं। इससे पहले अनिल देशमुख के मामले में कांग्रेस और एनसीपी एक साथ आ गए थे और शिव सेना दोनों से नाराज थी। बहरहाल, पिछले दिनों नवाब मलिक ने बयान दिया कि राज्य सरकार अपने सभी नागरिकों को मुफ्त में वैक्सीन लगवाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में कैबिनेट में चर्चा हो गई है। नवाब मलिक अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं और सरकार के प्रवक्ता नहीं हैं। तभी शिव सेना के नेता इस बात से नाराज हुए कि उन्होंने किस हैसियत से कैबिनेट की बैठक की बात मीडिया को बताई और वैक्सीन मुफ्त में लगाने की बात का खुलासा किया? शिव सेना के नेता चाहते थे कि 18 साल से ऊपर की उम्र के… Continue reading एनसीपी से कांग्रेस और शिव सेना दोनों नाराज

एनसीपी नहीं, शिव सेना खतरे में!

महाराष्ट्र में सत्ता और राजनीति का समीकरण तेजी से बदल रहा है। राज्य सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन को संकट में डालने वाला जो विवाद शरद पवार की पार्टी एनसीपी के नेता अनिल देशमुख से शुरू हुआ था उसके जाल में शिव सेना फंसती दिख रही है। अहमदाबाद में अमित शाह के साथ शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की हुई कथित मुलाकात के बाद तेजी से समीकरण बदला है। अनिल देशमुख ने तो गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया लेकिन उसके बाद अब सारा निशाना शिव सेना के ऊपर हो गया है। वैसे कई जानकार नेताओं का यह भी कहना है कि अनिल देशमुख का इस्तीफा एनसीपी या शरद पवार के लिए झटका नहीं है क्योंकि वे असल में जिसे गृह मंत्री बनाना चाहते थे वह बन गया। ध्यान रहे अनिल देशमुख के इस्तीफे के बाद दिलीप वलसे पाटिल को नया गृह मंत्री बनाया गया है। कुछ दिन पहले ही शिव सेना के सांसद संजय राउत ने कहा था कि अनिल देशमुख एक्सीडेंटल गृह मंत्री हैं, शरद पवार असल में जितेंद्र पाटिल या दिलीप वलसे पाटिल को गृह मंत्री बनाना चाहते थे। इस लिहाज से अनिल देशमुख के इस्तीफे से एनसीपी को कोई नुकसान नजर नहीं आ रहा है। लेकिन… Continue reading एनसीपी नहीं, शिव सेना खतरे में!

विपक्ष की कमान कौन संभालेगा?

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बीच कायदे से विपक्ष के नेतृत्व संभालने वाली बात नहीं उठनी चाहिए थी लेकिन विपक्षी पार्टियों के नेताओं की राजनीति से यह सवाल उठा है।

प्रधानमंत्री का विपक्षी नेताओं से सद्भाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि चमकाने के लिए जैसे वैक्सीन डिप्लोमेसी कर रहे हैं वैसे ही विपक्ष के प्रति सद्भाव दिखाने की मेडिकल डिप्लोमेसी भी की है।

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