किसानों की ‘अमीरी’ देखी नहीं जा रही!

प्रचार हो रहा है कि ये कैसे किसान हैं, जो जिंस की पैंट-जैकेट पहनते हैं, पिज्जा खाते हैं, मसाज कराते हैं, बड़ी गाड़ियों से आते हैं और ट्रैक्टर पर डीजे बजा कर डांस करते हैं।

कैसे संचालित हो रहा आंदोलन?

यह यक्ष प्रश्न की तरह है कि आखिर इतना लंबा चलने वाला, इतना बड़ा और प्रभावी किसान आंदोलन कैसे संचालित हो रहा है

आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास

क्या भारत की सर्वशक्तिमान सरकार और उसके मुखिया किसान आंदोलन के सामने मजबूर हो गए हैं

किसान चाहते हैं, पीएम बात करें

कैंद्र सरकार के बनाए तीन कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर पिछले 23 दिन से आंदोलन कर रहे किसान चाहते हैं कि उनकी मांगों को समझने और उसे पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे उनसे बात करें

ईस्ट इंडिया कंपनी व अंबानी-अडानी में क्या फर्क?

अहम फर्क यह कि ईस्ट इंडिया कंपनी के मालिक गोरे अंग्रेज थे तो अंबानी-अडानी हिंदुस्तानी अश्वेत चेहरों वाले हैं। अन्यथा दोनों धंधे-मुनाफे के लिए किसी भी सीमा तक जाने वाले।

किसान आंदोलन अंबानी के दरवाजे पहुंचेगा

केंद्र सरकार के बनाए तीन केंद्रीय कानूनों के विरोध में लाखों किसान कड़ाके की ठंड के बीच राजधानी दिल्ली की सीमा पर डटे हैं तो उनके समर्थन में देश भर के किसान अपने अपने राज्यों में प्रदर्शन कर रहे हैं।

तीनों कृषि कानूनों हो रद्द

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने कहा है कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है और तीनों कानूनों को रद्द नहीं करती है तो आर-पार की लड़ाई होगी।

सरकार ने मंशा साफ कर दी

केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों पर अपनी मंशा साफ कर दी है। प्रधानमंत्री के गुजरात के कच्छ में दिए भाषण, केंद्रीय कृषि मंत्री के अंग्रेजी के एक अखबार को दिए इंटरव्यू और किसानों के साथ वार्ता में शामिल केंद्रीय मंत्री और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों के बयानों से साफ हो गया है कि सरकार न तो कृषि विधेयकों को रद्द करेगी और न उनमें कोई बड़ा बदलाव करेगी

‘उत्तम खेती’ होगी चाकरी में कन्वर्ट!

किसान मौत का वारंट लटका बूझ रहा है तो मोदी सरकार किसानों के उड़ने की ‘एक नई आजादी’ के सपने में है। कौन सही-कौन गलत? पहले सरकार की दलीलों पर गौर करें।

किसानों ने जवाब और चेतावनी दी

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने ठीक एक हफ्ते बाद केंद्र सरकार की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर अपना जवाब भेजा है। किसान संगठनों ने कहा है कि उन्होंने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट खत्म कराएगा आंदोलन!

केंद्र सरकार जो काम नहीं कर सकी है वह काम अब सुप्रीम कोर्ट करेगा। केंद्र सरकार ने किसान संगठनों के साथ बातचीत में कहा था कि वह कृषि विशेषज्ञों, किसान संगठनों के नेताओं और सरकार के लोगों को मिला कर एक कमेटी बना देगी, जो कृषि कानूनों से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार करेगी।

खेती पर अंबानी-अडानी की पुरानी नजर!

अंबानी-अडानी के धंधे का रामबाण नुस्खा भारत की 138 करोड़ आबादी पर कंट्रोल है। धीरूभाई अंबानी ने साठ के दशक में इंदिरा दरबार से धागे के आयात का लाइसेंस ले कर कपड़े याकि टेक्सटाइल क्षेत्र पर कब्जे के बिजनेस प्लान में काम किया तो वह भीड़ की सस्ते कपड़े की जरूरत से था।

आंदोलनकारियों की कौन सुन रहा है?

केंद्र सरकार के बनाए तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को आंदोलन करते 20 दिन हो गए। शुरू में सरकार ने किसानों से बातचीत भी की पर पिछले एक हफ्ते से कोई वार्ता नहीं हुई है।

कानून वापसी तक चलेगा आंदोलन

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा है कि कानून वापस होने तक उनका आंदोलन चलेगा।

वैक्सीन के लिए अभी इंतजार करना होगा

अमेरिका और ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई जाने लगी है पर भारत में वैक्सीन के लिए लोगों को अभी इंतजार करना होगा।

अंबानी-अडानी का आइडिया नहीं तो किसका?

सवाल है डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, मेड इन इंडिया की बातें करते-करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे ‘किसानों को उड़ने की छूट’ वाले कानून बना बैठे? मोटे तौर पर खेती में सब ठीक है।

किसानों को सरकार पर भरोसा नहीं

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने सोमवार को सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक भूख हड़ताल की। दिल्ली की सीमा पर चल रहे आंदोलन के 19वें दिन किसानों ने एक दिन का उपवास किया

अब मंत्रियों से कैसे बात करेंगा किसान?

भारत सरकार के चार मंत्री किसानों से बात कर रहे हैं। रूटीन की वार्ता कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश के जिम्मे थी

किसानों को थका-डरा कर भगाएंगें?

केंद्र सरकार किसानों को थकाने और उनके आंदोलन को लंबा चलने देने की रणनीति पर काम कर रही है। सरकार को लग रहा है कि आंदोलन लंबा चला तो किसान थकेंगे। उनका लौटना शुरू होगा

किसानों का सुप्रीम कोर्ट में जाना ठीक नहीं था!

क्या किसान आंदोलन के अंदर फूट पड़ गई है? क्या किसान जिन तीन केंद्रीय कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किसान संगठनों ने साझा तौर  पर किया या एक संगठन ने अपने मन से जाकर याचिका दायर कर दी

खुद्दार बनाम धंधेबाजों का भारत सत्य!

भारत आत्मघाती मोड़ पर है। सोचें मौजूदा वक्त के इस एक लब्बोलुआब पर। सिख, जाट व किसान घरों के कोई अस्सी हजार जवान हिमालय की चोटियों पर चीनी सैनिकों पर बंदूक ताने बर्फ में खड़े हैं

किसान आज करेंगे भूख हड़ताल

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान सोमवार को भूख हड़ताल करेंगे।

किसान आज हाईवे बंद करेंगे

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन रविवार को दिल्ली-जयपुर हाईवे बंद करेंगे। किसानों ने इससे पहले शनिवार को हरियाणा और पंजाब में टोल प्लाजा फ्री किए।

किसानों की आज बड़ी कार्रवाई!

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों के आंदोलन के 16 दिन हो गए हैं। इस बीच सरकार से किसानों की पांच दौर की वार्ता हुई है

आंदोलन आखिर कैसे खत्म होगा?

किसानों का आंदोलन कैसे खत्म होगा? यह यक्ष प्रश्न है। सरकार में इसे लेकर चिंता है। यह नागरिकता कानून के विरोध में हुए शाहीन बाग की तरह का आंदोलन नहीं है

किसान तेज करेंगे आंदोलन

केंद्र सरकार की ओर से दिए गए लिखित प्रस्ताव को खारिज करने के एक दिन बाद किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। किसानों ने गुरुवार को दो टूक अंदाज में कहा कि सरकार का इंटरेस्ट सिर्फ प्रदर्शन खत्म कराने में है

किसानों को फैसला करना है: तोमर

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने केंद्रीय कृषि कानूनों में बदलाव का मामला किसानों के पाले में डाल दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार बदलाव और सुधार के लिए तैयार है

राहुल खुद विपक्षी नेताओं के संपर्क में!

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का कुछ विपक्षी नेताओं के साथ सीधा संपर्क पहले से है। सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी के साथ उनकी अच्छी बनती है और दोनों में अक्सर बातें होती हैं।

भाजपा शासित राज्यों में बंद को समर्थन!

किसानों का भारत मोटे तौर पर सफल रहा। चार घंटे किसानों ने चक्का जाम किया। उत्तर भारत के कई राज्यों में खास कर पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के कुछ हिस्सों में तो बंद पूरी तरह से सफल रहा।

किसान बचें नेताओं से

किसान नेताओं को सरकार ने जो सुझाव भेजे हैं, वे काफी तर्कसंगत और व्यवहारिक हैं। किसानों के इस डर को बिल्कुल दूर कर दिया गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म होने वाला है।