‘भारत बंद’ पर विपक्ष के समर्थन पर बोले केंद्रीय मंत्री नकवी, कहा- बंजर जमीन पर खेती का हो रहा प्रयास…

कृषि कानून के विरोध में आज आंदोलनकारी किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया था. भारत बंद को लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने भी अपना समर्थन….

भारत बंद का मिलाजुला असर

हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावाकेरल, बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा में व्यापक असर।

भारत बंद पर बोले टिकैट. : राजनीति से लेना देन नहीं,किसानों के हक के लिए 10 साल तक आंदोलन के लिए तैयार…

भारत बंद के बारे में किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि इसका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि हम पिछले 2…

बंद में शामिल हो कार्यकर्ता: कांग्रेस

कांग्रेस महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता सोमवार को किसान यूनियन द्वारा आहूत किये गए शांतिपूर्ण ‘भारत बंद’ को अपना पूरा समर्थन देंगे।

किसान आंदलोन : सड़क पर जुटे AAP और अकाली दल के कार्यकर्ता, पुलिस ने लगाई बेरिकेडिंग…

किसान आंदोलन को आज 3 साल हो गए हैं. आज इस दिन को आम आदमी पार्टी (AAP)  और शिरोमणि अकाली दल( Shiromani Akali Dal ) काला दिवस के रूप में मना रहे हैं….

कृषि कानून पर सरकार व कोर्ट रिपोर्ट

केंद्रीय कृषि कानूनों और उसके विरोध में चल रहे किसानों के आंदोलन पर विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की जो कमेटी बनाई थी, उसकी रिपोर्ट जारी करने का समय आ गया है।

संसद नहीं चलने से किसका भला!

अमित शाह ने अपने खास अंदाज में घटना की क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहा कि इस तरह की चीजों से कुछ लोग विकास को पटरी से उतारना चाहते हैं। मकसद तो सरकार ने बता दिया पर बड़ा सवाल है कि कौन ऐसा कर रहा है? सरकार उसका पता क्यों नहीं लगा रही है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि संसद नहीं चलने का फायदा किसको होना है?

विपक्ष की साझेदारी कहां है

आम आदमी पार्टी को पंजाब में इस बार ज्यादा आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ना है। तभी आप ने कृषि बिल पर चर्चा के लिए नोटिस दिया है। कायदे से कृषि कानूनों और किसानों का मुद्दा समूचे विपक्ष को साझा तौर पर उठाना चाहिए था। कांग्रेस, लेफ्ट, एनसीपी आदि पार्टियों को एक साथ मिल कर यह मुद्दा उठाना चाहिए था।

टिकैत ने सितंबर तक का समय दिया, 22 जुलाई से हर दिन संसद पर प्रदर्शन करने का ऐलान

rakesh tikait threatened नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले सात महीने से ज्यादा समय से आंदोलन कर रहे किसान इस महीने से अपना आंदोलन तेज करने वाले हैं। किसानों ने 22 जुलाई से हर दिन संसद भवन पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने केंद्र सरकार को सितंबर तक किसानों की मांग मांनने की चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके बाद किसान बड़ा आंदोलन करेंगे। toofan Boycott : रिलीज होने से पहले ही फरहान अख्तर की ‘तूफान’ बनी बॉयकॉट का कारण, लेकिन क्यों.. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए सितंबर तक का समय दिया है। उन्होंने ट्विट करके कहा- सरकार किसानों की बात मान कर कानून वापस ले, एमएसपी को कानून बनाए अन्यथा इस बार संघर्ष बड़ा होगा, किसानों के ट्रैक्टर लाल किले का ही नहीं संसद का भी रास्ता जानते हैं। इससे पहले राकेश टिकैत शनिवार को अपने काफिले के साथ कुंडली बार्डर पर चल रहे कृषि कानून विरोधी आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि संयुक्त मोर्चा बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन यह भी तय है… Continue reading टिकैत ने सितंबर तक का समय दिया, 22 जुलाई से हर दिन संसद पर प्रदर्शन करने का ऐलान

संसद सत्र के दौरान किसान करेंगे प्रदर्शन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बनाए कृषि कानूनों के विरोध में सात महीने से ज्यादा समय से आंदोलन कर रहे किसानों ने संसद सत्र के दौरान प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को दिल्ली और हरियाणा की सीमा पर बैठक की। इस बैठक में फैसला किया गया कि संसद के मॉनसून सत्र के दौरान आंदोलनकारी संसद भवन पर प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा 19 जुलाई से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र से दो दिन पहले 17 जुलाई को सभी विपक्षी दलों के सांसदों को चेतावनी पत्र देकर संसद में चुप्पी तोड़ने या कुर्सी छोड़ने की मांग की जाएगी। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि जब तक तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता और न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर कानून बनाने की बात नहीं होती, तब तक विपक्षी सांसद संसद न चलने दें। यह भी कहा गया कि 22 जुलाई से लगातार बार्डर से आंदोलनकारी संसद मार्ग पर जाकर प्रदर्शन करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने बताया कि इसी तरह आठ जुलाई को देश भर में पेट्रोल, डीजल व गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ हाईवे के किनारे 10 से 12 बजे तक गाड़ियों, गैस सिलेंडर के… Continue reading संसद सत्र के दौरान किसान करेंगे प्रदर्शन

अपने बनाए एजेंडे भी अटके!

Modi government agriculture law : लगातार दूसरी बार नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद सोचें, उन्होंने कितने नए एजेंडे बनाए थे और कितने नए मोर्चे खोले थे। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि पांच साल तक सरकार चलाने के बाद अगर सरकार ने कुछ एजेंडा बनाया और संसद से उसे मंजूरी कराई है तो निश्चित रूप से सरकार के पास कोई कार्य योजना भी होगी। लेकिन अफसोस की बात है कि जो एजेंडा सरकार ने बनाया और जिस पर जोर-जबरदस्ती संसद की मुहर लगवाई वैसे एजेंडे भी दो साल से अटके हैं। ऐसा लग रहा है कि सरकार के पास उस पर अमल की कोई कार्य योजना नहीं थी या सरकार ने यह अंदाजा नहीं लगाया था कि इसे लागू करते समय किस किस तरह की समस्याएं आ सकती हैं। यह भी पढ़ें: समस्याएं सुलझ नहीं, बढ़ रही हैं! ऐसा सबसे पहला मुद्दा कृषि कानूनों ( Modi government agriculture law ) का है। कोरोना वायरस की महामारी के बीच केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिए तीन कृषि कानून बनाए, जिनको संसद से लगभग जबरदस्ती पास कराया गया। राज्यसभा में इन कानूनों का भारी विरोध हुआ। विपक्ष के सांसद इन पर वोटिंग की मांग करते रहे पर इस अनिवार्य… Continue reading अपने बनाए एजेंडे भी अटके!

सिद्धू ने की कैप्टेन की शिकायत

नई दिल्ली। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी में चल रहा घमासान दिल्ली पहुंच गया है। क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू मंगलवार को दिल्ली पहुंचे और पार्टी आलाकमान की ओर से बनाई गई तीन सदस्यों की कमेटी के सामने पेश हुए। बताया जा रहा है कि इस कमेटी के सदस्यों- मल्लिकार्जुन खड़गे, हरीश रावत और जेपी अग्रवाल के सामने सिद्धू ने मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के प्रति तीखे तेवर दिखाए और उनकी जम कर शिकायत की। सिद्धू करीब दो घंटे तक कमेटी के सदस्यों के साथ रहे। बाद में सिदधू ने कहा कि वे सच के साथ हैं। सच को जिताना है और हर विरोधी ताकत को हराना है। उन्होंने कहा- कमेटी को सारी बात व सच्‍चाई बता दी है। मेरा स्‍टैंड साफ है लोगों की लोकतांत्रिक ताकत समान व बरकरार रहनी चाहिए। मेरा स्‍टैंड कायम है, कायम था और कायम रहा है। कमेटी के सामने अपनी बात रख कर आने के बाद सिद्धू ने कहा कि हर विरोधी ताकतों को हराना है और सच को जिताना है। गौरतलब है कि कैप्टेन की सरकार से इस्तीफा देने के बाद से ही सिद्धू और कैप्टेन अमरिंदर सिंह में खींचतान चल रही है। बहरहाल,… Continue reading सिद्धू ने की कैप्टेन की शिकायत

किसान आंदोलन और शाहीन बाग का फर्क

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ छह महीने से आंदोलन कर रहे किसान कहीं नहीं जा रहे हैं। वे दिल्ली को तीन तरफ से घेरे रहेंगे और सीमा पर बैठे रहेंगे। आंदोलन के छह महीने पूरे होने के मौके पर किसानों के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जरूरत पड़ी तो किसान 2024 तक यानी अगले लोकसभा चुनाव तक आंदोलन करते रहेंगे। उन्होंने आंदोलन कर रहे किसानों की वजह से कोरोना फैलने की बातों को खारिज करते हुए कहा कि जो किसान, जहां है वहीं से आंदोलन कर रहा है इसलिए यह सुपर स्प्रेडर इवेंट नहीं है। सो, यह तय है कि किसान आंदोलन का हस्र नागरिकता संशोधन कानून पर शाहीन बाग में हुए आंदोलन वाला नहीं होने जा रहा है। कोरोना की पहली लहर में शाहीन बाग का आंदोलन खत्म हो गया था। पहले आंदोलन में शामिल लोगों की संख्या धीरे धीरे कम हुई और उसके बाद चुपचाप आंदोलन खत्म हो गया। एक समय दिल्ली के शाहीन बाग से लेकर देश के दूर-दराज तक के हिस्सों में सीएए विरोधी आंदोलन चल रहा था। लेकिन वायरस की पहली लहर ने इसे खत्म कर दिया। ऐसा लग रहा था कि कोरोना की दूसरी लहर में किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा… Continue reading किसान आंदोलन और शाहीन बाग का फर्क

किसानों पर सुप्रीम कोर्ट भी चुप

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 145 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों के बारे में जल्दी किसी फैसले की जरूरत है। अगर केंद्र सरकार कोई फैसला नहीं करती है तो उसका कारण समझ में आता है। उसका राजनीतिक मकसद है और जिस कारोबारी मकसद के लिए उसने ये कानून बनाए हैं उसे भी पूरा करना है। कुछ चुनिंदा कारोबारियों के हितों के सामने किसानों के हित उसके लिए ज्यादा मायने नहीं रखते हैं। लेकिन क्या सुप्रीम कोर्ट के सामने भी ऐसी ही मजबूरी है, जो वह फैसला नहीं कर रही है। आखिर सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है पर अदालत उस पर कोई विचार क्यों नहीं कर रही है? यह सही है कि इन दिनों कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से अदालत का काम पूरी रफ्तार से नहीं हो रहा है और वर्चुअल सुनवाई करनी पड़ रही है। लेकिन सर्वोच्च अदालत को प्राथमिकता तय करनी होगी। उसकी बनाई तीन सदस्यों की कमेटी ने कोई दस दिन पहले अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है। अदालत ने इस कमेटी को आठ हफ्ते का ही समय दिया था। हालांकि रिपोर्ट सौंपने में उससे… Continue reading किसानों पर सुप्रीम कोर्ट भी चुप

किसानों से बात करे सरकार

केंद्र सरकार को अपने बनाए कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के प्रति दुश्मनी का भाव छोड़ देना चाहिए और उनके साथ तत्काल बातचीत करनी चाहिए। राजधानी दिल्ली में जिस तेजी से कोरोना वायरस का संक्रमण फैल रहा है उसे देखते हुए यह आशंका निराधार नहीं है कि किसानों के बीच महामारी फैल सकती है। किसान 144 दिन से धरने पर बैठे हैं। वे थक भी गए हैं और खेती-किसानी का उनका काम भी प्रभावित हो रहा है। कोरोना का खतरा अलग से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार उनसे बातचीत की शुरुआत करे और जिस शर्त पर होता है उनका आंदोलन खत्म कराने का प्रयास करे। भाजपा के सहयोगी और हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह आंदोलन कर रहे किसानों से बातचीत शुरू करे। भाजपा के अपने सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्विट करके कहा कि सरकार किसानों से बात करे और आंदोलन खत्म कराए। उन्होंने तो अपनी पार्टी की सरकार को सुझाव भी दिया कि कैसे आंदोलन खत्म कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से वादा करे कि जो भी राज्य इस कानून को लागू नहीं करना चाहता है वह इसे लागू नहीं… Continue reading किसानों से बात करे सरकार

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