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कांग्रेस का सुलझा हुआ तार्किक स्टेंड

कांग्रेस से एक अच्छी बात निकल कर आई है। कपिल सिब्बल के इस बयान ने कांग्रेस में खलबली मचा दी थी कि राज्य सरकारें नागरिकता संशोधन क़ानून को लागू करने से इनकार नहीं कर सकती। अब कांग्रेस से सुलझा हुआ बयान आया है कि नागरिकता संशोधन क़ानून की वैधता साबित होने तक राज्य सरकारों को क़ानून लागू करने को बाध्य नहीं किया जा सकता। हालांकि सुप्रीमकोर्ट ने क़ानून लागू करने पर कोई स्टे नहीं दिया है , सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस का बयान भी क़ानून के खिलाफ नहीं आया है , लेकिन कांग्रेस का यह स्टेंड जायज है। अगर यह तार्किक स्टेंड वह पहले ही लेती तो देश में इतना तनाव नहीं बनता , जितना अब बन गया है। कांग्रेस से ही एक जिम्मेदार दल होने की उम्मींद की जा सकती है। लगता है कि कांग्रेस का एक समझदार वर्ग वामपंथियों की देश को तोड़ने वाली साजिश से वाकिफ हुआ है , तभी कुछ समझदारी की बातें की जा रही हैं। क़ानून में भारतीय मुस्लिम नागरिकों के खिलाफ कुछ भी न होने के बावजूद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया के वामपंथी मुस्लिम छात्रों के सडकों पर आ कर विरोध करने के पीछे कौन काम कर रहा है , कांग्रेस… Continue reading कांग्रेस का सुलझा हुआ तार्किक स्टेंड

सीएए पर सिब्बल ने दी सफाई

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने संशोधित नागरिकता कानून, सीएए पर शनिवार को दिए अपने बयान पर रविवार को सफाई दी। उन्होंने शनिवार को केरल में एक कार्यक्रम में कहा था कि सीएए को लागू करने के अलावा राज्यों के पास कोई विकल्प नहीं है। इस पर सवाल उठाए जाने के बाद उन्होंने रविवार को कहा कि इसका विरोध  करने का राज्यों को अधिकार है पर अगर सुप्रीम कोर्ट ने इसे मान्यता दे दी तो फिर इसके विरोध में प्रस्ताव पास करने वाले राज्यों को परेशानी हो सकती है। सिब्बल ने रविवार को कहा कि राज्य विधानसभाओं को केंद्र सरकार से सीएए वापस लेने की मांग करने वाला प्रस्ताव पारित करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट ने सीएए को संवैधानिक करार दिया तब इस कानून का विरोध करने वाले राज्यों के लिए परेशानी पैदा होगी। इससे पहले सिब्बल ने शनिवार को कहा था कि राज्यों के पास किसी केंद्रीय कानून को पारित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है। इस बयान पर सफाई देते हुए सिब्बल ने शनिवार को ट्विट कर कहा- मेरा मानना है कि सीएए असंवैधानिक है। हर राज्य विधानसभा के पास इस कानून को वापस लेने… Continue reading सीएए पर सिब्बल ने दी सफाई

केरल में सीएए के खिलाफ पारित प्रस्ताव के समर्थन में आये अमरिंदर

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ केरल विधानसभा में पारित प्रस्ताव के समर्थन में आगे आते हुए

केरल विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव असंवैधानिक : रविशंकर

नई दिल्ली। नागरिकता कानून के विरोध में केरल विधानसभा द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने का केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कड़ा विरोध जताया है। प्रसाद ने अनुच्छेद 245/46 और 256 का हवाला देते हुए बुधवार को यहां कहा कि केरल विधानसभा का प्रस्ताव गलत है और संविधान की भावनाओं के खिलाफ है। रविशंकर प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में कहा यह आश्चर्य की बात है कि जिस सरकार ने संविधान की शपथ ली है, वह गैर संवैधानिक बात कर रही है कि नागरिकता कानून राज्य में नहीं लागू होने देंगे। प्रसाद ने कहा यह कानून संसद द्वारा पारित है। नागरिकता देना या लेना संविधान की सातवीं अनुसूची का विषय है, जिसपर संसद को ही कानून बनाने का अधिकार है। संसद पूरे भारत या भारत के लिए किसी क्षेत्र विशेष के लिए कानून बना सकती है। संसद नागरिकता संबंधी किसी विषय पर कानून बना सकती है। कानून मंत्री ने कहा संविधान का अनुच्छेद 256 कहता है कि राज्य की शासकीय शक्ति इस तरह उपयोग में लाई जाएगी कि संसद द्वारा पारित कानून को लागू किया जा सके। इसे भी पढ़ें : पेपर लीक होने पर लाइब्रेरियन भर्ती परीक्षा निरस्त कानून मंत्री ने यह भी कहा कि “केंद्र के कानून को लागू… Continue reading केरल विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव असंवैधानिक : रविशंकर

केरल विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रतिद्वंद्वी एकजुट

साल के अंतिम दिन यह दुर्लभ क्षण था, जब पारंपरिक रूप से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माकपा की अगुवाई वाले वाम मोर्चा और कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ ने केरल विधानसभा में सीएए को वापस लेने की मांग वाला एक प्रस्ताव पारित करने के लिए हाथ मिला लिया।

केरल विधानसभा में सीएए को वापस लेने की मांग वाला प्रस्ताव पारित

तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को वापस लेने की मांग वाला एक प्रस्ताव मंगलवार को पारित हो गया। इसे भी पढ़ें : सर्वसम्मति से पारित हुआ संविधान संशोधन विधेयक राज्य में सत्तारुढ़ माकपा नीत एलडीएफ और विपक्षी कांग्रेस नीत यूडीएफ ने सीएए के खिलाफ पेश प्रस्ताव का समर्थन किया, वहीं, भाजपा के एकमात्र विधायक एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री ओ राजगोपाल ने इसका विरोध किया। यह विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र था। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पेश किया था।

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