कोरोना रोक नहीं सकते, फिर क्या करें?

पूरी दुनिया में व्यापक वैक्सीनेशन के बाद यह लगभग तय हो गया है कि किसी भी वैक्सीन से कोरोना वायरस के संक्रमण को रोका नहीं जा सकता है। वैक्सीन लगाए होने के बावजूद वायरस लोगों को संक्रमित कर रहा है।

महामारी में ऐसी बेरहमी!

कहा यह गया था कि महामारी के दौरान सरकार सबके हित का ख्याल रखेगी। उस दौरान किसी के साथ जोर-जबर्दस्ती ना हो, इसे ध्यान में रखा जाएगा।

कोरोना से राहत नहीं

डब्लूएचओ के अधिकारियों ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी को नियंत्रित करने के प्रयासों के परिणामों अब तक निराशाजनक हैँ।

अमेरिका का असली संकट

राष्ट्रपति के आदेश जारी के तुरंत बाद अमेरिका में ट्विटर पर टॉप ट्रेंड आईविलनॉटकॉप्लाय (मैं आदेश नहीं मानूंगा) का हैशटैग कर रहा था।

LPG cylinders Price Hike : तेल कंपनियों ने आम आदमी की जेब में की Strike, 15 दिनों के अंदर दूसरी बार इतनी बढ़ाई कीमत…

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा एक बार फिर से घरेलू रसोई गैस के दामों में ₹25 की बढ़ोतरी कर दी गई है. बता दें कि 15 दिनों पहले भी घरेलू रसोई गैस (LPG) में ₹25 की बढ़ोतरी की गई थी

तीन दिन मोदी करेंगे मंत्रिपरिषद की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी मंत्रिपरिषद की लगातार तीन दिन तक बैठक करने वाले हैं। वे हफ्ते तीन दिन का बैठक करेंगे। बताया जा रहा है कि तीन दिन की इस बैठक के दौरान अगले तीन साल के लिए सरकार का एजेंडा तैयार किया जाएगा।

पांच राज्यों की चुनावी तैयारी शुरू

केंद्रीय चुनाव आयोग ने पांच राज्यों की चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। यह बात पिछले महीने ही चुनाव आयोग की ओर से कही गई थी। अभी बुधवार को चुनाव आयोग ने पांचों राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारी की बैठक बुलाई, जिसमें चुनावी तैयारियों पर विचार किया गया।

राज्यसभा की चिंता में केंद्र सरकार

सरकार और भाजपा दोनों ने राज्यसभा को गंभीरता से लेने की जरूरत दिखाई। लोकसभा में वैसे भी विपक्ष के पास ज्यादा सांसद नहीं हैं और विपक्ष की पार्टियों के बीच तालमेल भी नहीं है। इसके मुकाबले राज्यसभा में बेहतर तालमेल है।

कोरोना काल में संसद

corona crisis parliament session : कोरोना वायरस की महामारी शुरू होने के बाद संसद चौथा सत्र शुरू होने वाला है। पिछले साल बजट सत्र के समय महामारी शुरू हुई थी और उसकी वजह से सत्र को समय से पहले खत्म कर दिया गया। उसके बाद जैसे तैसे पिछले साल मॉनसून सत्र का आयोजन हुआ और शीतकालीन सत्र टाल दिया गया। इस साल बजट सत्र का आयोजन हुआ लेकिन वह सत्र बहुत छोटा रहा। उसे भी केसेज बढ़ने की वजह से बीच में ही रोक दिया गया। अब फिर मॉनसून सत्र होने जा रहा है लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि यह सत्र भी सामान्य रूप से चल पाएगा। क्योंकि इसका आयोजन भी कोरोना काल के ऐसे प्रोटोकॉल के तहत हो रहा है, जिससे संसदीय कार्यवाही न तो पूरी तरह से वर्चुअल बन पाती है और न पूरी तरह से ऑफलाइन हो पाती है। यह भी पढ़ें: कृषि कानून क्यों नहीं बदल रही सरकार? सबसे हैरान करने वाली बात है कि देश में 16 जनवरी से टीकाकरण का अभियान चल रहा है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 60 साल से ऊपर के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू होने के बाद एक मार्च को टीके की पहली डोज लगवा ली… Continue reading कोरोना काल में संसद

कितने मुद्दे हैं पर विपक्ष!

Opposition attacks in parliament  : इस समय देश में आम लोगों से जुड़े इतने मुद्दे हैं कि अगर संसद में विपक्ष उन मुद्दों को गंभीरता से उठाए तो सरकार बैकफुट पर जा सकती है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई रिकार्ड स्तर पर है। लगातार दो महीने खुदरा महंगाई की दर छह फीसदी से ऊपर रही है। बेरोजगारी रिकार्ड स्तर पर है। किसान आंदोलन चल रहा है और सरकार उसे खत्म कराने के लिए कुछ नहीं कर रही है। उधर सीमा पर चीन लगातार अपने को मजबूत कर रहा है। उसने भारत की कब्जाई जमीन खाली नहीं की है। पैंगोंग झील से पीछे हटने के बाद वह बाकी इलाकों में डट कर बैठा है, जिसकी वजह से सरकार को सेना की तैनाती बढ़ानी पड़ी है। अफगानिस्तान के हालात से भारत की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हुआ है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर खत्म नहीं हो रही है और देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार एक बार फिर धीमी हो गई है। विपक्ष की ओर से ये मुद्दे उठाए भी जाएंगे, जैसे हर बार उठाए जाते हैं लेकिन वह संसदीय कार्यवाही की एक औपचारिकता जैसी होती है। यह भी… Continue reading कितने मुद्दे हैं पर विपक्ष!

जीएसटी एक लाख करोड़ से नीचे

june GST collection : नई दिल्ली। नौ महीने में पहली बार वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी का संग्रह एक लाख करोड़ से कम हुआ है। जून के महीने में जीएसटी संग्रह घट कर 92,849 करोड़ रुपए हो गया। एक महीने पहले मई में जीएसटी कलेक्शन 1.02 लाख करोड़ रुपए रहा था। उससे एक महीने पहले अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन एक लाख 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रहा था। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को जून महीने का जीएसटी डाटा जारी किया। इससे पहले सितंबर 2020 में जीएसटी संग्रह 95,480 करोड़ रुपए रहा था। मोदी की नई कैबिनेट के 90 प्रतिशत मंत्री करोड़पति हैं, 42% पर आपराधिक मामले : ADR की रिपोर्ट जून में कुल जीएसटी संग्रह में केंद्र सरकार का हिस्सा यानी सीजीएसटी 16,424 करोड़ रुपए है। राज्यों का हिस्सा यानी एसजीएसटी 20,397 करोड़ रुपए और इंटीग्रेटेड यानी आईजीएसटी 49,079 करोड़ रुपए रहा। उपकर करीब 6,949 करोड़ रुपए रहा। सरकार की ओर से बयान में कहा गया है कि जून में जीएसटी राजस्व पिछले साल की समान अवधि से दो फीसदी ज्यादा है। जीएसटी कलेक्शन का यह आंकड़ा पांच जून से पांच जुलाई के बीच का है। सरकार की ओर से बताया गया है कि पांच जून से पांच… Continue reading जीएसटी एक लाख करोड़ से नीचे

नौकरियां हों तो मिलें!

यह रोजगार के अवसर बढ़ने का संकेत नहीं है। इन आंकड़ों से सिर्फ यह पता चलता है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण जिंदगी के अस्त-व्यस्त होने के बाद जून में बहुत से कामकाज फिर से शुरू हुए। जबकि असल में भारत में बेरोजगारी की दर अब भी एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। unemployment in the country : दिल्ली सरकार ने पिछले साल कोरोना महामारी की पहली लहर आने के बाद नौकरी ढूंढन वालों और रोजगार देने वालों को जोड़ने के लिए रोजगार बाजार पोर्टल शुरू किया था। रोजगार ढूंढ रहे व्यक्ति इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण कर सकते हैं। वहीं रोजगार देने वाले उद्यमी भी अपने यहां मौजूद अवसरों की जानकारी इस पोर्टल पर डालते हैं। पिछले महीने इस पोर्टल पर 34 हजार से ज्यादा लोगों ने नौकरी की तलाश में अपने प्रोफाइल पोस्ट किए। दूसरी तरफ नियोक्ताओं की तरफ लगभग साढ़े नौ हजार नौकरियों के अवसर की सूचना दी गई। मोदी की नई कैबिनेट के 90 प्रतिशत मंत्री करोड़पति हैं, 42% पर आपराधिक मामले : ADR की रिपोर्ट तो जो खाई है, वह स्पष्ट है। अगर इन आंकड़ों को एक सैंपल मानें, तो इसका मतलब है कि जितने लोग रोजगार ढूंढ रहे हैं,… Continue reading नौकरियां हों तो मिलें!

गवर्नमेंट नहीं गोल्ड का सहारा

coronavirus disaster indian economy : भारत सरकार की वित्त मंत्री ने हाल में छह लाख 30 हजार करोड़ रुपए के एक आर्थिक पैकेज का ऐलान किया। उससे पहले पिछले साल उन्होंने करीब 21 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान किया था। दोनों पैकेज लोगों को कर्ज की गारंटी देने वाले थे। सरकार ने आर्थिक पैकेज के जरिए लोगों को सिर्फ कर्ज लेने के लिए प्रेरित करने का काम किया। लेकिन हैरानी की बात है कि लोग सरकार के इतने बड़े पैकेज के बावजूद उससे कर्ज नहीं ले रहे हैं, बल्कि सोना गिरवी रख कर कर्ज ले रहे हैं और अपना जीवन चला रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की अपनी रिपोर्ट से पता चला है कि पिछले साल मार्च में कोरोना वायरस की लहर शुरू होने के बाद सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने वालों की संख्या में अचानक बड़ा इजाफा हुआ है। लोगों की हालत ऐसी हो गई है कि वे अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सोना गिरवी रख रहे हैं। coronavirus disaster indian economy गिरवी रखा सोना वापस लेने वालों की संख्या भी अचानक गिर गई है, जिससे कर्ज देने वालों बैंकों में सोने की नीलामी तेज हो गई है। यूपी में किसान वोट बांटने का खेल इससे… Continue reading गवर्नमेंट नहीं गोल्ड का सहारा

ये विषमता कहां ले जाएगी?

inequality india rich poor : केंद्रीय बैंक बड़ी संख्या में नोट छाप कर ब्याज दरों को कम करना चाहते थे, ताकि लोन देकर उद्योगों को बढ़ावा दे सकें और अर्थव्यवस्था को नुकसान से निकाला जा सके। लेकिन ऐसा होने के बजाए यह पैसा शेयर बाजार में लगाया गया। नतीजतन वही लोग अमीर होते रहे, जो पहले से अमीर थे। कोरोना महामारी की मार पूरी दुनिया पर पड़ी। भारत सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में एक रहा। ये एक आपदा है, यह मानने में कोई हिचक नहीं हो सकती। लेकिन किसी परिवार में अगर किसी आपदा से सभी बराबर पीड़ित हों, तो सब यह मान लेते हैं कि बुरा वक्त आया, तो उसका नतीजा सबको भुगतना पड़ा। लेकिन अगर बुरा वक्त किसी एक तबके लिए चमकने का मौका मिल जाए, तो समाज में सवाल उठेंगे। न सिर्फ सवाल उठेंगे, बल्कि देर सबेर असंतोष भी पैदा होगा। आज हम उसी कगार पर हैँ। एक ताजा रिपोर्ट ने बताया है कि (डॉलर को मुद्रा का आधार मानें तो) 2020 में हर भारतीय परिवार की घरेलू संपत्ति 6.1 प्रतिशत कम हो गई है। रुपये को आधार माने तो यह कमी करीब 3.7 प्रतिशत है। संपत्ति में आई इस कमी की मुख्य वजह यहां जमीन… Continue reading ये विषमता कहां ले जाएगी?

40 साल बाद निगेटिव विकास दर

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2020-21 के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का आंकड़ा आ गया है। भारत के इतिहास में 40 साल बाद के बाद पहली बार विकास दर निगेटिव रही है। पूरे वित्त वर्ष की जीडीपी विकास दर माइनस 7.3 फीसदी रही है। इससे पहले केंद्र में जब पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी तब 1979-80 में विकास दर माइनस में रही थी। हालांकि तब भी विकास दर अभी से बेहतर थी। उस समय माइनस 5.2 फीसदी विकास दर दर्ज की गई थी। इस तरह पिछले 40 साल में देश की सबसे खराब विकास दर 2020-21 में रही है। इससे पहले यानी 2019-20 में देश की विकास दर चार फीसदी रही थी। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष की शुरुआत कोरोना की महामारी से हुई थी और पहली तिमाही में ही विकास दर माइनस 23.9 फीसदी रही थी। दूसरी तिमाही में भी विकास दर में गिरावट रही। हालांकि तीसरी और चौथी तिमाही में स्थिति थोड़ी सुधरी थी। जनवरी से मार्च 2021 के दौरान यानी चौथी तिमाही में जीडीपी की विकास दर पॉजिटिव होकर 1.6 फीसदी हो गई थी। पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था के आकार का अनुमान 38.96 लाख करोड़ रुपए रहा है। एक साल… Continue reading 40 साल बाद निगेटिव विकास दर

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