चीन की बौखलाहट और क्वाड का भविष्य

हाल में क्वाड देशों- भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच सुरक्षा संवाद हुआ। वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न इस अनौपचारिक स्वरूपी सम्मेलन का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि पहली बार चारों देशों के राष्ट्रप्रमुखों ने बैठक की। यूं

बाइडेन में है दम, मोदी सुधरें और लपकें मौका

यह शीर्षक अपने डॉ. वेदप्रताप वैदिक की थीसिस के विपरीत है। वैदिकजी भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया केक्वाड यानी‘क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग’ अर्थात चीन विरोधी मोर्चे परइस अखबार में लिख चुके हैं कि भारत क्यों किसी का मोहरा बने

अमेरिका के असली इरादे जाहिर हुए

चौगुटे की असलियत जल्दी ही सामने आ गई। चौगुटे के चारों राष्ट्रों के नेताओं ने अपने-अपने भाषण में चीन का नाम तक नहीं लिया था और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक लचीले और समावेशी संगठन की बात कही थी

क्वाड नहीं है सॉफ्ट डिप्लोमेसी का मंच

सवाल है कि हिंद-प्रशांत में शांति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर आधारित व्यवस्था बनाने के लिए क्वाड के देश किस तरह से काम करेंगे? क्या इसके लिए क्वाड के देश कोई सैन्य गठजोड़ करने वाले हैं?

भारत क्यों बने किसी का मोहरा ?

भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया— इन चार राष्ट्रों के चौगुटे का जो पहला शिखर-सम्मेलन हुआ

अमेरिका की प्राथमिकता क्या?

जब क्वैड की पहली शिखर बैठक हुई, तो जिन मुद्दों को इस गुट ने ज्यादा महत्त्व देकर प्रचारित किया, उनमें सुरक्षा का सवाल नहीं था। बल्कि उसमें कोरोना वैक्सीन और जलवायु परिवर्तन को ज्यादा अहमियत मिली। जबकि इस गुट को चीन का असर नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है।