भारत ने दक्षिण चीन सागर में भेजा था जलपोत

चीन के साथ पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून की रात को हुई हिंसक झड़प के तुरंत बाद भारतीय नौसेना ने अपना एक युद्धपोत दक्षिण चीन सागर में भेज दिया था। माना जा रहा है कि भारत ने चीन पर दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाया था।

क्या भारत-चीन में युद्ध होगा?

सीमा पर तनातनी के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर का एक वक्तव्य सामने आया है। एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में उन्होंने लद्दाख की वर्तमान स्थिति को 1962 के बाद, सबसे गंभीर बताया है।

भारत-चीन में विवाद सुलझाने पर सहमति

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी पर भारत और चीन के बीच पिछले करीब चार महीने से चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए गुरुवार को एक बार फिर बातचीत होगी।

चीन से है देशभक्ति का सवाल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अब ‘चौकीदार चोर है’ का नारा नहीं लगा रहे हैं। उन्होंने पिछला लोकसभा चुनाव इसी नारे पर लड़ा था। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार को सूट-बूट की सरकार कहना बंद कर दिया है।

चीन को भारत बताए हमलावर

पता नहीं क्यों भारत ने अभी तक चीन को हमलावर नहीं कहा है, जबकि हकीकत है कि चीन ने भारत की सीमा में घुसपैठ की है।

भारत न बने अमेरिकी मोहरा

आजकल भारत और अमेरिका के बीच जैसा प्रेमालाप चल रहा है, मेरी याददाश्त में कभी किसी देश के साथ भारत का नहीं चला।

दुश्मन का चरित्र, हमारा चरित्र

लाख टके का सवाल है कि बीजिंग, इस्लामाबाद के सत्ता प्रतिष्ठानों, रीति-नीतिकारों में भारत के चरित्र और उसकी ताकत पर क्या राय है? यह अहम सवाल है तो वाशिंगटन, लंदन, मास्को, पेरिस, बर्लिन याकि दुनिया के चौधरी देशों में भारत के प्रति धारणा का सवाल नंबर दो पर है।

भारत कैसे करे सीमा रक्षा?

भारत लड़े या न लड़े? भारत को अपनी अखंडता- सार्वभौमता की रक्षा में लड़ना चाहिए या नहीं? वह कैसे लड़े?  कौन है दुश्मन? वह चीन से लड़े या पाकिस्तान से? क्या दोनो से  उसकी लड़ाई नहीं है? दोनों क्या उसके दुश्मन नहीं है

ट्रंप ने मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया

भारत और चीन दोनों के मना कर देने के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच पंच बनने का प्रस्ताव दिया है।

चीन को डराना है जरूरी!

भारत क्या चीन से डर रहा है या उसकी सैनिक, कूटनीतिक और आर्थिक ताकत को लेकर वह आशंकित है, जिसकी वजह से टकराव मोल लेने की बजाय जल्दी से जल्दी समझौते की पहल कर रहा है? भारत के उलट चीन समझौते को अपना विशेषाधिकार मान रहा है

पहले संकट में सीडीएस का अनुभव!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल आजादी दिवस के अपने भाषण में देश में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त करने की बात कही थी

चीन के सपने पर मोदी का हमला

पूर्वी लद्दाख में भारत चीन सीमा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 15-16 जून की रात भारत और चीन के सैनिकों में हुई खूनी झड़प के महज 18 दिन के भीतर ही तीन जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने अचानक लद्दाख का दौरा करके सबको चौंका डाला।

पीछे हटी भारत, चीन की सेनाएं

द्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी पर दो महीने तक रहे गतिरोध के बाद भारत और चीन की सेनाओं के पीछे हटने का काम कई जगहों पर पूरा हो गया है।

जीत का श्रेय लेने भाजपा प्रवक्ता नहीं पहुंचे!

यह बहुत हैरान करने वाली बात थी पर जिस समय लद्दाख में विवाद की जगह से चीन और भारत के सैनिक पीछे हटने लगे

भारत को क्यों जल्दी थी समझौते की?

यह बिल्कुल समझ में नहीं आने वाली बात है कि भारत को आखिर चीन के साथ समझौता करने की इतनी क्यों जल्दी थी?

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