मजदूरों का कोई देश नहीं!

मजदूरों के शोषण की किसी खबर को पढ़ते वक्त अगर यह भुला दिया जाए कि वो खबर कहां की है, तो फिर उसे कहीं का भी समझा जा सकता है। कहने का मतलब यह कि मजदूर चाहे जहां भी हों, उनकी कहानी एक जैसी है।