चुनाव आयोग उपचुनाव टाले

घोष ने मांग की कि स्थिति के सामान्य होने तक 30 सितंबर को होने वाले उपचुनाव को टाल दिया जाए, जबकि चुनाव आयोग ने घटना पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

राज्यसभा की एक ही सीट का चुनाव क्यों?

केंद्र में मंत्री बनाए गए सर्बानंद सोनोवाल को भी राज्यसभा में जाना है क्योंकि वे अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। फिर उनके लिए असम में खाली हुई सीट पर उपचुनाव की घोषणा क्यों नहीं की गई?

चुनाव टलना शुरू हो गए हैं

election postponed commission : कोरोना वायरस की महामारी के बीच पश्चिम बंगाल का चुनाव लंबा खींचने को लेकर चौतरफा आलोचना से घिरे चुनाव आयोग को आगे के चुनावों को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा क्योंकि राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव टलने लगे हैं। चुनी हुई सरकार अपने नागरिकों और कर्मचारियों का जीवन जोखिम में नहीं डालनी चाहती हैं और उनके फैसलों पर आम लोगों की भी सहमति है। भारत में जल्द आ रही है Covid 19 से मुकाबले को ‘Moderna’ Vaccine, अब छू मंतर होगा कोरोना इस समय कोई भी नागरिक किसी किस्म का चुनाव नहीं चाहता है। इससे चुनाव आयोग ( election postponed commission  ) को सबक लेने की जरूरत है। महाराष्ट्र में राज्य चुनाव आयोग ने जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव टालने से इनकार करते हुए इन्हें कराने की घोषणा कर दी है, जिस पर रोक लगवाने के लिए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। यह भी पढ़ें: स्वतंत्र निदेशकों के लिए भी कुछ नियम बने! महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट का खतरा अब भी बना हुआ है और विशेषज्ञ तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे में चुनाव कराना खतरनाक हो सकता है। इसी… Continue reading चुनाव टलना शुरू हो गए हैं

यूपी, उत्तराखंड में क्या उपचुनाव नहीं होंगे?

देश में इस समय अलग अलग राज्यों में विधानसभा की 25 सीटें खाली हैं। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सात-सात सीटें खाली हैं। उत्तराखंड में विधानसभा की दो सीटें खाली हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ( election in up uttarakhand ) में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इसलिए चुनाव आयोग में यह विचार हो रहा है कि इन राज्यों में खाली सीटों पर अभी उपचुनाव नहीं कराया जाए। अभी कोरोना के हालात को देखते हुए चुनाव आयोग शायद ही चुनाव कराने का फैसला करे। अगर केसेज कम होते हैं तो अगस्त-सितंबर तक चुनाव हो सकता है। उस समय उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में चार-पांच महीने का समय ही बचा रहेगा। इस वजह से इन राज्यों में उपचुनाव नहीं भी कराया जा सकता है। यह भी पढ़ें: चिराग का दबाव काम नहीं आएगा यह भी पढ़ें: उमर को मुख्यमंत्री कौन बनाएगा? election in up uttarakhand सवाल है कि अगर उत्तराखंड में उपचुनाव नहीं हुए तो मुख्यमंत्री का क्या होगा? मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत विधायक नहीं हैं और सितंबर तक उनको विधायक बनना होगा तभी वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रह सकते हैं। अगर आयोग उपचुनाव नहीं कराने का फैसला करता है तो… Continue reading यूपी, उत्तराखंड में क्या उपचुनाव नहीं होंगे?

बड़े चुनाव सुधारों की जरूरत

बड़े चुनाव सुधारों की जरूरत : वैसे तो इस समय अनेक चुनाव सुधारों की जरूरत है। खुद चुनाव आयोग में कई तरह के सुधार जरूरी हैं। आयोग ने पिछले कुछ समय में जैसे जैसे फैसले किए हैं और इन फैसलों की वजह से उसकी जैसी छवि बनी है उसे देखते हुए यह जरूरी है कि इस संवैधानिक संस्था के पूरे ढांचे में आमूलचूल बदलाव किया जाए। यह भी पढ़ें: कश्मीर में उम्मीद की खिड़की! सबसे पहला बदलाव तो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में करने की जरूरत है, जिसकी विसंगतियों की ओर पिछले कई सालों से ध्यान दिलाया जा रहा है। अभी केंद्र सरकार की मर्जी से चुनाव आयुक्त नियुक्त होते हैं। आमतौर पर रिटायर हो चुके या रिटायर होने की कगार पर पहुंचे अधिकारियों की अनुकंपा नियुक्ति चुनाव आयोग में होती है। जैसे उत्तर प्रदेश के एक रिटायर अधिकारी को हाल में चुनाव आयुक्त बनाया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही तीनों आयुक्त एक ही राज्य- उत्तर प्रदेश के हो गए हैं। संवैधानिक रूप से इसमें कोई खामी नहीं है लेकिन नैतिक रूप से यह फैसला सवालों के घेरे में है। भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना संवैधानिक व्यवस्था की अहम जरूरत… Continue reading बड़े चुनाव सुधारों की जरूरत

हनुमान बेनिवाल बोले राजस्थान में कोविड संकट के लिए केंद्र-राज्य जिम्मेदार, अफसरों पर एफआईआर हो, सीएम अशोक गहलोत ने की पीएम मोदी से बात

जयपुर | राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल (Nagour MP Hanuman Beniwal) ने रविवार को राजस्थान में कोरोना वायरस (Rajasthan Situation on Corona Virus) की बिगड़ती स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर तीखा हमला किया। उन्होंने ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाओं की कमी और इतने सारे युवाओं की मौत का हवाला दिया और बोले कि जिम्मेदार अधिकारियों / सरकार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। दूसरी ओर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Rajasthan Chief Minister) ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से कोविड-19 की स्थिति पर बात की, उन्होंने राज्य में ऑक्सीजन संकट (Oxygen Crisis in Rajasthan) का भी हवाला दिया और उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जल्द ही जीवन की आपूर्ति यानी आक्सीजन की कमी को पूरा करेगी। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथसिंह (Defence Minister Rajnath Singh) से भी संवाद किया है। हनुमान बेनीवाल बोले कि, “केंद्र सरकार और राज्य सरकार के घटिया कामकाज के कारण स्थिति और खराब हो गई है। देश में कोरोना संक्रमण फैलने के लिए देश का चुनाव आयोग भी उतना ही जिम्मेदार है क्योंकि वे बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव स्थगित कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।” यह… Continue reading हनुमान बेनिवाल बोले राजस्थान में कोविड संकट के लिए केंद्र-राज्य जिम्मेदार, अफसरों पर एफआईआर हो, सीएम अशोक गहलोत ने की पीएम मोदी से बात

चुनाव टले रहे तो क्या करेंगी ममता?

यह एक काल्पनिक सवाल है पर बहुत मौजू हैं कि अगर पश्चिम बंगाल में विधानसभा के उपचुनाव टले रहे तो और कोरोना वायरस की महामारी के वजह से चुनाव आयोग ने अगले छह महीने तक चुनाव ही नहीं कराया तो ममता बनर्जी क्या करेंगी? ध्यान रहे कोरोना वायरस की महामारी के बीच चुनाव कराने को लेकर आयोग को बड़ी गालियां पड़ी हैं। अदालतों से लेकर मीडिया तक ने आयोग को कठघरे में खड़ा किया है। ऊपर से चुनाव के बाद से बंगाल में भाजपा और तृणमूल का जैसा टकराव चल रहा है वह अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है। सो, चुनाव आयोग भी आहत है और भाजपा व केंद्र सरकार तो आहत है ही। अगर दोनों ने चुप्पी साध ली तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी क्या करेंगी? ध्यान रहे वे विधायक नहीं हैं। उनको छह महीने के अंदर किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ कर जीतना होगा। इसमें उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। चार-पांच सीटें वैसे ही खाली हो गई हैं और उनके लिए कोई भी विधायक सीट खाली कर देगा। पर कोरोना के बीच चुनाव कैसे होगा? उनके पास छह महीने का समय है पर उसके जरिए जरूरी है कि चुनाव आयोग पांच महीने में चुनाव की घोषणा करे।… Continue reading चुनाव टले रहे तो क्या करेंगी ममता?

Supreme Court की चुनाव आयोग को नसीहत, मीडिया की शिकायतें बंद करें संवैधानिक संस्थाएं

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि संवैधानिक अधिकारी (Constitutional Officer) शिकायत करने और मीडिया (Media) पर संदेह करने के बजाय इससे बेहतर कुछ और कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी चुनाव आयोग की उस याचिका पर अपने फैसले में की, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने मीडिया रिपोटरें के बारे में शिकायत करते हुए कहा था कि कोविड के बीच राजनीतिक रैलियों को रोकने के लिए हत्या के लिए मामला दर्ज किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, न्यायालयों में खुली पहुंच संवैधानिक स्वतंत्रता के लिए एक मूल्यवान सुरक्षा है। प्रेस की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति की संवैधानिक स्वतंत्रता का एक पहलू है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मीडिया (Media) को अदालती कार्यवाही से रिपोटिर्ंग करने से रोकने के लिए चुनाव आयोग की प्रार्थना में कोई भी ठोस शिकायत नहीं पाया गया है और न्यायपालिका को जवाबदेह ठहराना आवश्यक है। शीर्ष अदालत ने यह भी देखा कि मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) द्वारा की गई टिप्पणी कठोर और रूपक अनुचित थी और न्यायिक संयम आवश्यक था। इसे भी पढ़ें – Odisha में कोरोना वायरस के रिकार्ड 10,521 नए मामले आए, कुल संक्रमितों की संख्या 5 लाख के पार शीर्ष अदालत ने… Continue reading Supreme Court की चुनाव आयोग को नसीहत, मीडिया की शिकायतें बंद करें संवैधानिक संस्थाएं

चुनाव आयोग की अलग ही चिंता

केंद्रीय चुनाव आयोग ने खुद ही अपनी प्रतिष्ठा मिट्टी में मिलाई है। इसके लिए अदालत या मीडिया को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने जिस तरह का आचरण किया है वह ऐतिहासिक गिरावट की मिसाल है। हालांकि मद्रास हाई कोर्ट ने उसके पूर्वाग्रह को लेकर कुछ नहीं कहा पर कोरोना वायरस की गंभीरता को दरकिनार करके कई चरणों में चुनाव कराने और चुनाव प्रचार के दौरान दिशा-निर्देशों के खुलेआम उल्लंघन पर आंखें मूंदे रखने पर तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि क्यों नहीं आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाया जाए। चुनाव आयोग अदालत की इस टिप्पणी से उतना आहत नहीं हुआ, जितना इसके मीडिया में छपने और दिखाए जाने से हुआ। तभी आयोग ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका देकर कहा कि मीडिया को अदालती टिप्पणियों के प्रसारण और प्रकाशन से रोका जाए। इस पर भी अदालत ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई और याचिका खारिज कर दी। बहरहाल, ऐसा नहीं है कि चुनाव आयोग अदालती टिप्पणी से सुधर गया है। उसने वोटों की गिनती के दिन के लिए नए दिशा-निर्देश बनाए तो पार्टियों से कहा कि उम्मीदवार को तभी मतगणना केंद्र में… Continue reading चुनाव आयोग की अलग ही चिंता

ये हम हैं और ये हमारी बरबादी है

आप पाएंगे कि हर कोई अपने काम में देर कर रहा है। मसलन, मद्रास हाईकोर्ट ने यह कहने में कितनी देर कर दी कि चुनाव आयोग ही कोरोना की दूसरी लहर का जिम्मेदार है और अगर चुनाव आयोग पर हत्या का मुकदमा दायर किया जाए तो भी गलत नहीं होगा। यह तल्ख टिप्पणी तब आई है जब पश्चिम बंगाल का चुनाव अंतिम चरण में पहुंच गया है। जब चुनाव की घोषणा हुई थी, उस समय भी कोरोना जारी था और सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के नियम लागू थे। तो जब आठ चरणों में चुनाव कराने का ऐलान हुआ तभी क्यों नहीं हमारे किसी हाईकोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया? उसके बाद भी, सारे नियम-कायदे त्याग कर, पूरी नंगई से, रैलियां व रोड-शो चलते रहे, तब भी किसी अदालत को ख्याल नहीं आया कि यह गलत हो रहा है। और अगर सचमुच देश में चल रहे मौजूदा कोहराम के लिए चुनाव आयोग ही दोषी है तो अदालत केवल कह कर क्यों रुक गई, उसने सचमुच उस पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने का आदेश क्यों नहीं दे दिया? ऐसा करने के लिए उसे और क्या चाहिए? क्या उसके लिए इससे भी ज्यादा तबाही की दरकार है? कुछ दिन पहले दिल्ली… Continue reading ये हम हैं और ये हमारी बरबादी है

देश के हाई कोर्ट्स को सलाम

देश की उच्च न्यायपालिका में लोगों के कम होते भरोसे की मजबूत होती धारणा के बीच देश की उच्च अदालतों ने रोशनी की किरण दिखाई है। दिल्ली से लेकर मद्रास हाई कोर्ट और इलाहाबाद से लेकर गुजरात हाई कोर्ट तक ने कमाल किया है। कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में जब देश की सर्वोच्च अदालत तक इस धारणा के साथ काम कर रही है कि सरकार के प्रशासकीय कामकाज में न्यायिक दखल नहीं होना चाहिए, ऐसे समय में हाई कोर्ट्स ने रास्ता दिखाया है। कम से कम चार हाई कोर्ट्स ने राज्य सरकारों को जिम्मेदार बनाने वाली टिप्पणियां की हैं। हालांकि उनके भी आदेश नहीं आए हैं, जिससे कहा जाए कि अब नजीर बनेगी। लेकिन मौजूदा समय में किसी जज का राज्य सरकारों के कामकाज पर तीखी मौखिक टिप्पणी भी बहुत बड़ी बात है और दिल्ली हाई कोर्ट ने तो सीधे केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया और मद्रास हाई कोर्ट ने संवैधानिक संस्था होने के नाम पर पवित्र गाय बने केंद्रीय चुनाव आयोग को उसकी गलतियों के लिए आईना दिखाया। ध्यान रहे पिछले साल कोरोना वायरस की पहली लहर के समय जब प्रवासी मजदूर पलायन कर रहे थे और देश की छह हाई कोर्ट्स ने केंद्र से… Continue reading देश के हाई कोर्ट्स को सलाम

चुनाव आयोग को क्या हो गया है?

केंद्रीय चुनाव आयोग के लिए कोरोना वायरस की महामारी के बीच पांच राज्यों में चुनाव कराना और उसमें भी खास कर पश्चिम बंगाल में आठ चरण में चुनाव कराना बहुत शर्मिंदगी का कारण बना है। पार्टियों ने आयोग पर पक्षपात का या केंद्र सरकार से मिले होने का जो आरोप लगाया वह अपनी जगह है, अदालतों की फटकार अलग पड़ी। इसके बावजूद ऐसा नहीं लग रहा है कि चुनाव आयोग कोई भी फैसला करने में अपने दिमाग का इस्तेमाल कर रहा है। पहले पता नहीं किस मजबूरी या किस दबाव में बंगाल में आठ चरण में चुनाव कराया और चुनाव के बीच कोरोना विस्फोट के बावजूद पता नहीं किस दबाव में बचे हुए तीन-चार चरणों का चुनाव एक साथ कराने का फैसला नहीं किया, लेकिन अब वोटों की गिनती के लिए भी जो नियम बनाए जा रहे हैं वे समझ से परे हैं। मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के लिए आयोग जिम्मेदार है और यह सवाल भी किया क्यों नहीं आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाया जाए। हाई कोर्ट ने वोटों की गिनती के दिए कोविड प्रोटोकॉल सख्ती से लागू करने को कहा तो आयोग ने… Continue reading चुनाव आयोग को क्या हो गया है?

बंगाल में आठवें चरण में 76 फीसदी मतदान

चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक शाम छह बजे तक 76.06 फीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों में इसमें बढ़ोतरी हो सकती है।

UP Panchayat Election : अंतिम चरण के लिए वोटिंग शुरू, 17 जिलों में हो रहा मतदान

लखनऊ | कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार के बीच यूपी (UP) में गांव की सरकार (Government) बनाने का जोश नजर आ रहा है। चौथे और अंतिम चरण का मतदान (Voting) आज सुबह सात बजे से शुरू हो गया है। 17 जिलों में शाम को छह बजे तक चलने वाले मतदान के लिए मतदाताओं के साथ पोलिंग पार्टियां व सुरक्षा कर्मी मुस्तैद हैं। प्रदेश में आज बुलंदशहर, हापुड़, संभल, शाहजहांपुर, अलीगढ़, मथुरा, फरुर्खाबाद, बांदा, कौशांबी, सीतापुर, अंबेडकरनगर, बहराइच, बस्ती, कुशीनगर, गाजीपुर, सोनभद्र और मऊ जिलों में मतदान शुरू हो गया है। चुनाव आयोग (Election Commission) से मिली जानकारी के अनुसार, इस फेज में कुल 19035 मतदान केंद्र और 48554 मतदेय स्थल बनाए गए हैं। कुल 2 करोड़ 98 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग इस चरण में कर सकेंगे। इसे भी पढ़ें – Kerala: नीलांबुर से कांग्रेस उम्मीदवार वी. वी. प्रकाश का दिल का दौरा पड़ने से निधन चतुर्थ चरण के 17 जनपदों में 738 जिला पंचायत वार्ड के जिला पंचायत सदस्यों के लिए 10679 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। 18356 क्षेत्र पंचायत वार्ड के क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए 85408 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसी तरह इन 17 जिलों में 14111 ग्राम पंचायत के प्रधान पद के लिए 114400… Continue reading UP Panchayat Election : अंतिम चरण के लिए वोटिंग शुरू, 17 जिलों में हो रहा मतदान

बंगाल में आज अंतिम चरण का मतदान

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा के आठवें और अंतिम चरण का मतदान गुरुवार को होगा। सात चरण के मतदान के बाद राज्य की बची हुई 35 सीटों पर गुरुवार की सुबह सात बजे मतदान शुरू होगा और शाम छह बजे तक चलेगा। 294 सदस्यों की विधानसभा की 257 सीटों पर मतदान हो चुका है और दो सीटों पर उम्मीदवारों के निधन की वजह से मतदान टल गया है। आठवें और अंतिम चरण के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए हैं और कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी के निर्देश दिए गए हैं। राज्य विधानसभा के आठवें और अंतिम चरण में कोलकाता की सात विधानसभा सीटों सहित बीरभूम की 11, मुर्शिदाबाद की 11 और मालदा जिले की छह विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसी के साथ बंगाल में विधानसभा चुनाव के मतदान की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। इसके बाद दो मई को मतगणना होगी। आखिरी चरण का मतदान होने के बाद मीडिया समूहों की ओर से कराए गए एक्जिट पोल के नतीजे शाम तक जारी होंगे। राज्य में अंतिम तीन चरणों के चुनाव कराने में आयोग को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है क्योंकि अचानक से कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो गई। चौथे… Continue reading बंगाल में आज अंतिम चरण का मतदान

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