जेसीबी में छंटनी व नीरज का सुंदरकांड

जब मैं दिसंबर 1979 में पत्रकारिता व नौकरी करने दिल्ली आया तो मेरे तत्कालीन पत्रकारिता समूह के दफ्तर में मेरे वरिष्ठो ने मुधे बताया कि हमारे यहां नेताओं के लिए राजनीतिबाज शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।