देवगौड़ा जैसी बाइडेन की कहानियां!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं, जहां राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी।

अमेरिका का असली संकट

राष्ट्रपति के आदेश जारी के तुरंत बाद अमेरिका में ट्विटर पर टॉप ट्रेंड आईविलनॉटकॉप्लाय (मैं आदेश नहीं मानूंगा) का हैशटैग कर रहा था।

आखिर क्या है चीन नीति?

ये तो साफ है कि अब चीन झुक कर अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखने के मूड में नहीं है। तो क्या अब अमेरिका झुक कर चलेगा?

शी और बाइडन से सीखें मोदी

जब हमारे फौजी अफसर चीनियों से बात कर सकते हैं तो अपने मित्र शी चिन फिंग से, जिनसे मोदी दर्जन बार से भी ज्यादा मिल चुके हैं, सीधी बात क्यों नहीं करते ?

Taliban को मानते हैं कट्टर तो Islamic State Khorasan को क्या कहेेंगे…

आखिर 20 सालों तक तालिबान में रहने के बाद अमेरिकी सेना वापस चली गई. तय सीमा के पहले ही अमेरिका अपने सैनिकों को लेकर जाने में कामयाब…

#Dronestrike : अमेरिका ने लिया काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले का बदला, पिछले 2 दशकों का सबसे बड़ा हमला ….

काबुल एयरपोर्ट में हुए बम धमाकों और आतंकी हमले में मारे गए अमेरिकी सैनिकों का बदला आज सरकार ने ले लिया है. बताया जा रहा है कि अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट कहने वाले आतंकवादी संगठन के खिलाफ ड्रोन हमला किय

काबुल एयरपोर्ट हमले के बाद आया बाइडन का रिएक्शन, कहा- हम तुम्हें पकड़कर इसकी सजा देंगे

राष्ट्रपति ने कहा कि काबुल में हामिद करज़ई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और उसके पास एक होटल पर हुए भयावह हमले के पीछे ISIS का हाथ है.

इस्लाम से लड़े बिना नियति घायल!

यह शीर्षक अटपटा लगेगा। सोच सकते हैं अमेरिका लड़ कर ही तो घायल है। लेकिन अमेरिका ने इस्लाम से लड़ाई कहां बताई है? अमेरिका अपने को इस्लाम से लड़ता हुआ नहीं बताता है।

इस्लाम का सत्य और चीन की बर्बरता!

पौने दो अरब मुसलमानों में अधिकांश मन ही मन तालिबान की जीत और अमेरिका की हार से सुकून में हैं तो वह क्या इस्लाम का सुकून नहीं?

जंगली ही खोदते हैं सभ्यताओं की कब्र!

चट्टान जैसी अटल सभ्यताएं और विशाल साम्राज्य कैसे खानाबदोश घुड़सवारों की बर्बरता से खत्म हुए, इसकी दास्तां इतिहास में भरी हुई है।

आंतक से लड़ना बिना आंतक के बीज को मिटाए!

इस्लाम की यह जिद्द, यह प्रतिस्पर्धा स्थाई है कि उसके पैगंबर ही आखिरी ईश्वर अवतार है और उनकी आसमानी किताब, कुरानशरीफ के अनुसार उसे दुनिया बनानी है।

अमेरिका की 75 साला गलती!

दूसरे महायुद्ध के बाद 1945 से दुनिया की एकमेव स्थायी महाशक्ति अमेरिका (पश्चिमी सभ्यता) ने 75 सालों में जितना धोखा इस्लाम से खाया है, वह उससे जितना घायल हुआ है वैसा किसी से नहीं!

अमेरिका का बड़ा फैसला! राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा- अभी अफगानिस्तान में मौजूद रहेंगे अमेरिकी सैनिक

अमेरिकी सैनिकों को तब तक रखेगा, जब तक कि वहां से हर अमेरिकी को वापस निकाला नहीं जाता है। भले ही उन्हें अपनी सेना की वापसी के लिए उनकी 31 अगस्त की समय सीमा के बाद भी वहां सैन्यबल को रखना पड़े।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा- तय समयसीमा के बाद भी अफगानिस्तान में रुकेंगे सैनिक

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वे अफगानिस्तान में तब तक सैनिकों को रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जब तक प्रत्येक अमेरिकी नागरिक को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता. उन्होंने साफतौर….

अमेरिका में यह हुआ

अगर यह सचमुच हुआ, तो यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी सिस्टम सचमुच वैसा चुस्त- दुरुस्त नहीं है, जैसी धारणा दुनिया में बनी हुई है? अफगानिस्तान में पराजय ने अमेरिका के लिए असहज स्थिति पैदा की है।

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