तबलीगी जमात के विदेशियों पर पाबंदी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस फैलने और दिल्ली के दंगों को लेकर निशाने पर आए तबलीगी जमात के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

लोगों पर भी फोड़ेंगे ठीकरा

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स के रणदीप गुलेरिया ने गुरुवार को कई बातें ऐसी कहीं, जिनसे भविष्य का अंदाजा लग रहा है। इसमें खासतौर से गौर करने वाली एक बात उन्होंने कही। गुलेरिया ने कहा कि लॉकडाउन से भारत को फायदा हुआ है, इससे संक्रमण की रफ्तार कम हुई और मेडिकल तैयारियों के लिए वक्त मिला।

प्रवासी मजदूरों और तबलीगियों की वापसी

कर्नाटक की सरकार ने अपना फैसला बदलकर ठीक किया। पहले उसने उत्तर भारत के मजदूरों की घर-वापसी के लिए जो रेलगाड़ियां तैयार थीं, उन्हें अचानक रद्द कर दिया था

जमात के लोगों को घर जाने की इजाजत

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मरकज में शामिल हुए लोगों को अब घर जाने की इजाजत दे दी गई है

कोरोना के दौर में विदेश नीति

कोरोना के इस दौर में भारत की विदेश नीति का क्या हाल है ? इसमें शक नहीं कि भारत की केंद्र और राज्य सरकारें कोरोना से लड़ने में जी-जान से जुटी हुई हैं।

दोहरेपन में फँसे राष्ट्रवादी

हाल में एक बड़े हिन्दू राष्ट्रवादी नेता का बयान छपा कि ‘कुछ तबलीगियों के काम को पूरे समुदाय का प्रतिबिंब नहीं मानना चाहिए।’ जब अनुयायियों से पूछा गया कि आशय पूरी तबलीगी जमात से है या पूरा मुस्लिम समुदाय? तो चुप्पी रही।

कोरोनाः कांग्रेस को हुआ क्या है ?

कांग्रेस-अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 7 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पांच सुझाव दिए थे, उनमें से ज्यादातर बहुत अच्छे थे।

तबलीगी जमात के प्रमुख के फार्म हाउस पर छापा

तबलीगी जमात के मरकज से हजारों लोगों के कोरोना वायरस संक्रमित होने की खबरों के बीच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने गुरुवार की सुबह तबलीगी जमात के प्रमुख प्रमुख मौलाना मोहम्मद साद कंधालवी के शामली स्थित फार्म हाउस पर छापेमारी की।

महामारी में भी चलता सांप्रदायिक नैरेटिव?

कोरोना वायरस के संकट के समय में सांप्रदायिकता का एक बेहद खतरनाक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है। और यह अनायास नहीं है। इसके पीछे सोची समझी, सुविचारित योजना दिख रही है।

आप के मुस्लिम नेता नाराज हैं

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अच्छा काम कर रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तारीफ भी हो रही है पर उनकी पार्टी के मुस्लिम नेता उनसे खुश नहीं हैं।

मौलाना साद कराएंगे कोरोना संक्रमण की जांच

तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद कोरोना वायरस ‘कोविड-19’संक्रमण की जांच कराने पर सहमत हो गये हैं।

संक्रमण के 30 फीसदी मामले जमात के

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण फैलाने में तबलीगी जमात की भूमिका को लेकर सोशल मीडिया में चल रही बहस के बीच भारत सरकार ने इस बारे में स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कई मंत्रालयों की साझा प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि भारत में संक्रमण के कुल मामलों में 30 फीसदी मामले तबलीगी जमात से जुड़े लोगों के हैं। गौरतलब है कि दिल्ली के निजामुद्दीन में मार्च में तबलीगी जमात का एक मरकज हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में देश और विदेश से आए लोग जुटे थे। देश के कई राज्यों में इनसे संक्रमण फैलने की चर्चा है। बहरहाल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि देश में अभी तक कुल 14 हजार 378 कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हुई है। इसमें 4,291 यानी 29.8 फीसदी संक्रमित तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं। यह भी कहा गया कि जमात के सदस्यों के चलते 23 राज्यों में कोरोना का संक्रमण फैला। इसके मुताबिक तमिलनाडु में 84 फीसदी, दिल्ली में 63 फीसदी, तेलंगाना में 79 फीसदी, आंध्रप्रदेश में 61 फीसदी और उत्तर प्रदेश के 59 फीसदी संक्रमित तबलीगी जमात से हैं या फिर इनके संपर्क में आए थे। केंद्र सरकार ने एक दूसरी अहम जानकारी यह दी है… Continue reading संक्रमण के 30 फीसदी मामले जमात के

खरगोन में तबलीगी जमात का सदस्य कोविड-19 से संक्रमित, मामला दर्ज

मध्यप्रदेश के खरगोन में तबलीगी जमात के 60 वर्षीय सदस्य के खिलाफ कोविड-19 फैलाने जैसे कथित घातक कार्य करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

तबलीगी जमात में हिस्सा लेने वाले 40 का पता चला: गृहमंत्री

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने आज कहा कि महाराष्ट्र से लापता तबलीगी जमात के 58 सदस्यों में से 40 का पता लगा लिया गया है

मसीहा का क्या इलाज!

मिर्जा गालिब ने कहा था, ‘‘वो अपनी खू न छोड़ेंगे, हम अपनी वज’अ क्यों छोड़ें…’’। सचमुच, जब दुनिया अभूतपूर्व रोग से लड़ रही है, और रोजाना हर कोने में सैकड़ों उस से मर रहे हैं। तब भी अनेक मुस्लिम नेताओं ने इस्लाम की शान का दावा अपना पहला कर्तव्य समझा। किसी ने मस्जिद में जुटना अपना अधिकार बताया; तो किसी ने पड़ोसी देश पर बमबारी कर दी; तो किसी ने गुरुद्वारे में सिखों का सामूहिक संहार कर डाला। खुद तबलीगी जमात के सदर दस दिन पहले तक मस्जिदों में जुटना जरूरी बताते रहे। इस्लामियों के सहयोगी भी उन का बचाव करना अपना नं. एक कर्तव्य मान उसी कटिबद्धता से लगे हैं। किसी ने कहा कि बेचारे मुसलमान भोले हैं, इसलिए उन के जमावड़े का क्या दोष!  यहाँ वामपंथी पत्रकार ने लिखा कि अगर भारत को अफगानिस्तान में सिखों-हिन्दुओं की चिंता हो, तो उसे अपना नागरिकता कानून बदल के सब धान बाइस पसेरी करना चाहिए। तबलीगियों द्वारा देश भर में क्लस्टर-कोरोना फैलाने पर किसी ने कहा कि इस पर एफ.आई.आर. करने के बदले करुणा दिखानी चाहिए थी…। गर्ज कि कोरोना हो या कत्लेआम, पहली चीज हर हाल में इस्लाम की शान ऊपर रखना है। तब, काफिर को भी अपनी बात क्यों… Continue reading मसीहा का क्या इलाज!

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