हाथ नहीं, पैरों से उड़ान भर रहा दिव्यांग अमर बहादुर

किसी ने ठीक ही कहा है, यदि हमारी उड़ान देखनी हो, तो आसमां से कह दो कि वो अपना कद और ऊंचा कर ले। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है